Today’s Insights: क्या आपके टमाटर के पौधे भी बन रहे हैं झाड़ी? लीफ कर्ल वायरस से निपटने के रामबाण उपाय जानें
टमाटर की फसल में पत्ती मुड़ने (Leaf Curl) के लक्षण फसल की बर्बादी का संकेत हो सकते हैं. इस सप्ताह अपनी फसल की बारीकी से जांच करें-चाहे वह कीटों का हमला हो, पानी की कमी या जानलेवा वायरस. समय रहते सफेद मक्खी पर नियंत्रण और सही पोषण प्रबंधन अपनाकर किसान भाई अपनी मेहनत और मोटा मुनाफा बचा सकते हैं.
Tomato Leaf Curl: खेतों में लहलहाते टमाटर के पौधों को देखकर हर किसान का दिल खुश हो जाता है, लेकिन अगर वही पत्तियां अचानक मुड़ने लगें, तो समझिए कि आपकी मेहनत पर किसी की नजर लग गई है. इस सप्ताह टमाटर की खेती करने वाले किसान भाइयों को बहुत सावधान रहने की जरूरत है. अक्सर हम पत्तियों के मुड़ने को मामूली समझकर छोड़ देते हैं, लेकिन यह आपकी पूरी फसल को बर्बाद करने वाले लीफ कर्ल वायरस की दस्तक हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते पौधों की नब्ज पहचान ली जाए, तो हजारों का नुकसान टाला जा सकता है. याद रखिए, खेत सिर्फ फसल नहीं, एक किसान का भविष्य होता है और इसकी सुरक्षा आपके हाथों में है.
क्या यह सिर्फ प्यास है या कोई गंभीर बीमारी?
सबसे पहले पौधों को ध्यान से देखें. अगर पत्तियां प्याले या कप की तरह ऊपर की ओर मुड़ रही हैं और मोटी होती जा रही हैं, तो यह खतरे की घंटी है. गौर करने वाली बात यह है कि क्या पत्तियों पर पीले धब्बे दिख रहे हैं या वे छूने पर कुरकुरी महसूस हो रही हैं? अगर धूप बहुत तेज है और पत्तियां सिर्फ मुड़ रही हैं लेकिन पीली नहीं हैं, तो शायद उन्हें सिर्फ पानी और छांव की तलाश है. लेकिन अगर पत्तियों का रंग बदल रहा है, तो समझ लीजिए कि वायरस ने हमला कर दिया है.
सफेद मक्खी और छोटे कीट
अक्सर पत्तियां खुद नहीं मुड़तीं, बल्कि उन्हें मोड़ने वाले दुश्मन पत्तियों के पीछे छिपे होते हैं. अपनी फसल की नई और कोमल पत्तियों के नीचे झांक कर देखें. क्या वहां सफेद मक्खियां, छोटे हरे एफिड्स या पतले थ्रिप्स रेंग रहे हैं? ये नन्हे कीट दिखने में छोटे हैं, लेकिन ये वायरस फैलाने के सबसे बड़े वाहक हैं. ये पौधों का रस चूस लेते हैं और उन्हें झाड़ी जैसा बना देते हैं. अगर आपके पौधे की बढ़वार रुक गई है और वह बौना दिखने लगा है, तो तुरंत समझ जाएं कि कीटों ने अपना जाल फैला लिया है.
तनाव और वायरस के बीच का अंतर समझना है जरूरी
एक समझदार किसान वही है जो अपने पौधों की भाषा समझे. कभी-कभी बहुत ज्यादा गर्मी या पानी की कमी से भी पत्तियां खुद को बचाने के लिए रोल हो जाती हैं. यह तनाव की स्थिति है जो मौसम ठीक होने पर सुधर जाती है. लेकिन अगर पत्तियों में पीलापन है, वे मोटी हो गई हैं और फल छोटे व टेढ़े-मेढ़े आ रहे हैं, तो यह येलो लीफ कर्ल वायरस है. इसके अलावा नाइट्रोजन या पोटेशियम जैसी खाद की कमी से भी पत्तियों के किनारे पीले पड़ने लगते हैं. इसलिए बिना जांचे कोई भी महंगी दवा न छिड़कें.
अब क्या करें किसान?
अगर आपको शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं, तो सबसे पहले उन पौधों को उखाड़कर खेत से दूर दबा दें जो पूरी तरह बीमार हो चुके हैं, ताकि वायरस दूसरे स्वस्थ पौधों में न फैले. कीटों को रोकने के लिए नीम के तेल का छिड़काव एक बेहतरीन और सस्ता देसी इलाज है. खेत के आसपास खरपतवार न उगने दें क्योंकि कीट वहीं छिपते हैं. अगर नमी और धूप सही होने के बावजूद सुधार नहीं हो रहा, तो तुरंत किसी विशेषज्ञ की सलाह से सही कीटनाशक का चुनाव करें. आपकी थोड़ी सी चौकसी इस सप्ताह आपकी मेहनत की कमाई को बचा सकती है.