Tomato Farming : सर्दियों में टमाटर की खेती किसानों के लिए कमाई का बड़ा जरिया होती है. पौधों पर फल खूब आते हैं, लेकिन कई बार पकते ही टमाटर फटने लगते हैं. यही समस्या किसानों की मेहनत पर पानी फेर देती है. फटे हुए टमाटर बाजार में सही दाम नहीं दिला पाते और कई बार पूरी फसल नुकसान में चली जाती है. खेती के जानकारों का कहना है कि थोड़ी सी समझदारी और सही देखभाल से फ्रूट क्रैकिंग की समस्या को आसानी से रोका जा सकता है.
क्या है फ्रूट क्रैकिंग और क्यों होती है परेशानी
फ्रूट क्रैकिंग का मतलब है टमाटर का पकने के दौरान फटना. इसमें फल की बाहरी परत टूट जाती है और दरारें पड़ जाती हैं. ऐसे टमाटर जल्दी खराब हो जाते हैं और ग्राहक भी इन्हें खरीदने से कतराते हैं. इस वजह से किसानों को कम दाम मिलते हैं या कई बार फसल खेत में ही खराब हो जाती है. यह समस्या खासतौर पर ठंड के मौसम में ज्यादा देखने को मिलती है.
इन वजहों से फटने लगते हैं टमाटर
खेती से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, फ्रूट क्रैकिंग के पीछे कई कारण होते हैं. सबसे बड़ा कारण है पोषक तत्वों की कमी, खासकर बोरॉन की कमी. इसके अलावा, खेत में नमी का संतुलन बिगड़ना भी बड़ा कारण है. अगर लंबे समय तक सिंचाई न हो और फिर अचानक ज्यादा पानी दे दिया जाए, तो फल तेजी से बढ़ता है और उसका छिलका फट जाता है. तापमान में अचानक बदलाव और ठंड बढ़ने पर भी यह समस्या सामने आती है.
इन लक्षणों से पहचानें समस्या की शुरुआत
फ्रूट क्रैकिंग अचानक नहीं होती, बल्कि पहले इसके संकेत दिखने लगते हैं. शुरुआत में पौधों की पत्तियां मुड़ने लगती हैं. पत्तियों पर छोटे-छोटे दाग नजर आते हैं. इसके बाद धीरे-धीरे फलों पर दरारें पड़ने लगती हैं. अगर किसान इन शुरुआती लक्षणों को समय पर पहचान लें, तो आगे होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है.
सही देखभाल से मिलेगा चमकदार और मजबूत टमाटर
जानकारों का कहना है कि इस समस्या से बचने के लिए खेत में नमी को बराबर बनाए रखना बहुत जरूरी है. सिंचाई नियमित करें और अचानक ज्यादा पानी देने से बचें. मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी न होने दें. जरूरत पड़ने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह से बोरॉन जैसे पोषक तत्वों का छिड़काव किया जा सकता है. सही देखभाल से टमाटर न सिर्फ फटने से बचते हैं, बल्कि आकार में अच्छे, चमकदार और बाजार में ज्यादा दाम दिलाने वाले बनते हैं.