महंगे कीटनाशकों को कहें बाय-बाय! खेती का ये 8 रुपये वाला देसी जुगाड़ देख आप भी रह जाएंगे हैरान
खेती में बढ़ती लागत को कम करने के लिए एक अनोखा पीला कार्ड तकनीक चर्चा में है. यह छोटा सा यंत्र बिना किसी जहरीले रसायन के फसल को कीड़ों से सुरक्षित रखता है. मात्र 8 रुपये की लागत वाला यह जुगाड़ छोटे और बड़े दोनों तरह के किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है.
Yellow Sticky Trap : आज के दौर में खेती में बढ़ती लागत और कीटनाशकों के हानिकारक प्रभावों को देखते हुए, एक नया देसी जुगाड़ किसानों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. फसलों को कीड़ों और मक्खियों से बचाने के लिए अब महंगे रसायनों की जरूरत नहीं है. मात्र 8 रुपये की लागत वाला एक पीला कार्ड (Yellow Sticky Trap) फसल के लिए सुरक्षा कवच साबित हो रहा है. यह तकनीक न केवल जेब पर हल्की है, बल्कि पूरी तरह से जैविक और सुरक्षित भी है. आइए जानते हैं कि यह छोटा सा यंत्र कैसे बड़े-बड़े कीटों का सफाया कर देता है.
कैसे काम करता है पीला कार्ड?
अक्सर देखा जाता है कि उड़ने वाले कीट, जैसे सफेद मक्खी और एफिड्स, पीले रंग की ओर बहुत जल्दी आकर्षित होते हैं. इसी प्राकृतिक व्यवहार का उपयोग इस तकनीक में किया गया है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह एक साधारण पीला कार्ड होता है जिस पर बेहद चिपचिपा केमिकल लगा होता है. जब इसे खेत में लगाया जाता है, तो कीड़े फसल को छोड़ सीधे कार्ड की ओर खिंचे चले आते हैं और उस पर बैठते ही चिपक जाते हैं, जिससे उनकी मौत हो जाती है.
लागत मात्र 8 रुपये, बचत हजारों की
किसानों के लिए सबसे राहत की बात इसकी कीमत है. एक पीला कार्ड बाजार में या ऑनलाइन लगभग 8 रुपये में आसानी से उपलब्ध है. छिड़काव वाली महंगी दवाइयों की तुलना में यह खर्च न के बराबर है. जो किसान रसायनों पर हज़ारों रुपये खर्च करते थे, वे अब इस छोटे से जुगाड़ से अपनी फसल को सुरक्षित रख रहे हैं. इसे घर पर भी पीले कागज और चिपचिपे पदार्थ की मदद से बेहद कम खर्च में तैयार किया जा सकता है.
हर मौसम और हर फसल के लिए उपयोगी
यह जुगाड़ू यंत्र केवल एक फसल तक सीमित नहीं है. स्ट्रॉबेरी, टमाटर, पपीता, मिर्च और फूलों की खेती करने वाले किसान इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फसल में फूल और फल लगने के समय जब कीड़ों का हमला सबसे तेज होता है, तब यह कार्ड सबसे ज्यादा प्रभावी साबित होता है. इससे फसल की चमक बनी रहती है और पैदावार की गुणवत्ता भी बेहतर होती है.
पर्यावरण के अनुकूल और आसान प्रबंधन
आजकल जीरो बजट और केमिकल फ्री खेती पर जोर दिया जा रहा है, जिसमें यह तकनीक पूरी तरह फिट बैठती है. इसमें किसी जहरीली गैस या ज़हर का इस्तेमाल नहीं होता, इसलिए यह मिट्टी और पर्यावरण के लिए पूरी तरह सुरक्षित है. इसे खेत में डंडों के सहारे लटकाना बहुत आसान है और इसके लिए किसी विशेष ट्रेनिंग की जरूरत नहीं पड़ती. कम लागत में फसल सुरक्षा का यह मॉडल छोटे और बड़े, दोनों तरह के किसानों के लिए क्रांतिकारी साबित हो रहा है.