Maharashtra News: महाराष्ट्र के पुणे जिले के इंदापुर तालुका के पश्चिमी हिस्से में पानी की कमी के कारण हजारों एकड़ में खड़ी गन्ना और अन्य फसलें सूख गई हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है. किसानों का आरोप है कि खड़कवासला सिंचाई विभाग की खराब और अव्यवस्थित जल प्रबंधन व्यवस्था के कारण यह स्थिति पैदा हुई है. फसलों के नुकसान से परेशान किसानों ने सरकार से तुरंत सर्वे कराने और नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग की है. उनका कहना है कि इस संकट से उन्हें करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है.
इंदापुर तालुका के कई गांवों के किसान पिछले कई दिनों से सिंचाई के लिए अपने हिस्से का पानी छोड़ने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि पानी की आपूर्ति में देरी और सिंचाई चक्र के समय पर पूरा न होने से खड़ी गन्ने की फसल को भारी नुकसान हुआ है. इसके साथ ही पशुओं के लिए चारे का भी गंभीर संकट पैदा हो गया है.
अपनी फसल नहीं बचा सके किसान
कई किसानों ने ‘चीनी मंडी’ को बताया कि उन्होंने गन्ने की खेती में भारी निवेश किया था, लेकिन सिंचाई विभाग की कमजोर योजना और लापरवाही के कारण वे अपनी फसल नहीं बचा सके. किसानों का कहना है कि यदि समय पर पानी उपलब्ध कराया जाता तो इस नुकसान से बचा जा सकता था. उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों की लापरवाही ने उनकी आजीविका पर गंभीर असर डाला है और कई किसान परिवार आर्थिक संकट में फंस गए हैं.
50,000 रुपये की आर्थिक सहायता
फसल खराब होने के कारण किसानों के सामने अब सहकारी समितियों और बैंकों से लिए गए कर्ज चुकाने की भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. प्रभावित किसानों का कहना है कि बढ़ते आर्थिक दबाव के बीच उनकी स्थिति लगातार कठिन होती जा रही है और उन्हें सरकार से तत्काल मदद की जरूरत है. किसानों ने कृषि और राजस्व विभाग से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों का जल्द सर्वे कराया जाए और नुकसान का आकलन किया जाए. साथ ही उन्होंने खराब हुई फसलों के लिए प्रति एकड़ 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग भी की है.
चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य तय करने की मांग
बता दें कि हाल ही में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर राज्य के चीनी उद्योग और प्याज किसानों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि गन्ने की बढ़ती खरीद लागत के कारण चीनी मिलों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है. इसी वजह से उन्होंने चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 31 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 41 रुपये प्रति किलो करने की मांग की.अमित शाह ने फडणवीस के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार चीनी मिलों को राहत देने के लिए जरूरी कदम उठाएगी. उन्होंने कहा कि मिलों के विस्तार के लिए लिए गए बकाया कर्ज का पुनर्गठन किया जाएगा, जिससे उनका वित्तीय बोझ कम हो सके.