2 करोड़ के सोलर प्रोजेक्ट से रोज तैयार होगी 1500 यूनिट बिजली, गौशाला बनेगी पूरी तरह आत्मनिर्भर

मध्य प्रदेश की एक गौशाला में सोलर और बायो-सीएनजी का अनोखा मॉडल तैयार हो रहा है. 400 किलोवॉट सोलर प्लांट से बिजली बनाकर खर्च कम किया जाएगा. इससे हर महीने लाखों रुपये की बचत होगी और गौशाला आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगी. यह मॉडल पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद माना जा रहा है.

नोएडा | Updated On: 21 Mar, 2026 | 06:41 PM

Dairy Farming: मध्य प्रदेश में अब गौशालाएं सिर्फ पशुओं की देखभाल तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही हैं. मध्य प्रदेश पशुपालन विभाग के अनुसार, प्रदेश की आदर्श लाल टिपारा गौशाला में ऐसा ही एक अनोखा प्रोजेक्ट शुरू हुआ है, जहां गोबर से बायो-सीएनजी बनाने के साथ अब सोलर से बिजली भी तैयार की जाएगी. इससे न सिर्फ खर्च कम होगा, बल्कि पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा.

400 किलोवॉट सोलर प्लांट से बदलेगी तस्वीर

मध्य प्रदेश पशुपालन विभाग के अनुसा, लाल टिपारा गौशाला में 400 किलोवॉट क्षमता का सोलर पावर प्लांट  लगाया जा रहा है. इस प्लांट का काम तेजी से चल रहा है और उम्मीद है कि अप्रैल के अंत तक यहां बिजली बनना शुरू हो जाएगी. अभी तक गौशाला में चल रहे बायो-सीएनजी प्लांट को चलाने के लिए काफी बिजली खर्च होती थी. लेकिन अब सोलर प्लांट लगने से आधी से ज्यादा बिजली खुद ही तैयार हो जाएगी. इससे गौशाला की पूरी व्यवस्था और भी मजबूत और सस्ती हो जाएगी.

8 लाख से घटकर 3.20 लाख होगा बिजली बिल

इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा बिजली खर्च में कमी है. अभी नगर निगम को हर महीने करीब 8 लाख रुपये का बिजली बिल देना पड़ता है. लेकिन जैसे ही सोलर प्लांट चालू होगा, यह खर्च घटकर करीब 3.20 लाख रुपये रह जाएगा. यानी हर महीने करीब 4.80 लाख रुपये की सीधी बचत होगी. यह बचत सालभर में लाखों रुपये तक पहुंच जाएगी, जिससे निगम को आर्थिक राहत  मिलेगी.

गोबर से गैस और अब सोलर से बिजली

इस गौशाला की खास बात यह है कि यहां पहले से ही गायों के गोबर से बायो-सीएनजी  बनाई जा रही है. अब उसी प्लांट को सोलर एनर्जी से चलाने की तैयारी हो रही है. इसका मतलब है कि यहां एक साथ दो तरह की हरित ऊर्जा का इस्तेमाल होगा-एक गोबर से गैस और दूसरा सूरज की रोशनी से बिजली. इससे प्रदूषण कम होगा और ऊर्जा के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भरता भी घटेगी.

2 करोड़ का प्रोजेक्ट, 5 साल तक फ्री मेंटेनेंस

इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 2 करोड़ रुपये का खर्च आ रहा है. अच्छी बात यह है कि अगले 5 साल तक इस सोलर प्लांट का रखरखाव कंपनी खुद करेगी. इससे नगर निगम को अलग से मेंटेनेंस की चिंता नहीं करनी पड़ेगी. किसी भी तकनीकी खराबी को कंपनी ही ठीक करेगी, जिससे काम बिना रुकावट चलता रहेगा. इसके साथ ही यह प्लांट रोज करीब 1500 यूनिट बिजली बनाएगा, जो गौशाला की जरूरतों  को काफी हद तक पूरा करेगा.

Published: 21 Mar, 2026 | 07:30 PM

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