मुंहपका-खुरपका से पशुओं को बचाने का आसान तरीका, गांव के देसी नुस्खे से मिलेगा राहत और बढ़ेगा दूध
गर्मी के मौसम में पशुओं में खुरपका और मुंहपका जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. समय रहते लक्षण पहचानकर देसी उपाय अपनाने से बीमारी पर काबू पाया जा सकता है. सही देखभाल, साफ-सफाई और घरेलू नुस्खों से पशु स्वस्थ रहते हैं और दूध उत्पादन भी प्रभावित नहीं होता.
Animal Husbandry: गर्मी का मौसम शुरू होते ही पशुओं पर बीमारी का खतरा भी बढ़ने लगता है. कई बार किसान छोटे लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर भारी नुकसान का कारण बनती है. अगर समय रहते सही पहचान और देसी उपाय अपनाए जाएं, तो पशुओं को गंभीर बीमारी से बचाया जा सकता है और दूध उत्पादन भी लगातार बना रहता है.
खतरनाक लक्षणों को हल्के में न लें
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार गर्मियों में खुरपका और मुंहपका जैसी संक्रामक बीमारियां तेजी से फैलती हैं. इस बीमारी की शुरुआत छोटे-छोटे लक्षणों से होती है, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. पशु के मुंह में छाले पड़ना, ज्यादा लार गिरना, खुर में घाव या सड़न होना इसके मुख्य संकेत हैं. कई बार पशु खाना-पीना छोड़ देता है और सुस्त हो जाता है. अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह बीमारी तेजी से दूसरे पशुओं में फैल सकती है और पूरे झुंड को प्रभावित कर सकती है.
देसी नुस्खों से मिल सकता है बड़ा फायदा
गांव-देहात में आज भी पुराने घरेलू उपाय काफी कारगर माने जाते हैं. विशेषज्ञ बताते हैं कि फिटकरी का हल्का घोल बनाकर दिन में दो बार पशु के मुंह और खुर धोने से संक्रमण कम होता है. इसके अलावा नीम और पीपल के काढ़े से खुर साफ करने से भी आराम मिलता है. अगर खुर में घाव हो जाए तो नारियल तेल में थोड़ा बोरिक एसिड या कत्था मिलाकर लगाने से सूजन कम होती है और घाव जल्दी भरने लगता है. ये उपाय सस्ते भी हैं और आसानी से हर गांव में उपलब्ध हो जाते हैं, जिससे किसानों को महंगे इलाज से राहत मिलती है.
साफ-सफाई और देखभाल सबसे जरूरी
बीमार पशु को तुरंत बाकी पशुओं से अलग रखना बेहद जरूरी है, ताकि संक्रमण न फैले. पशु के रहने की जगह को साफ और सूखा रखना चाहिए. बाड़े में समय-समय पर चूना और फिनाइल का छिड़काव करने से कीटाणु खत्म होते हैं. साथ ही मक्खियों से बचाव के लिए हल्दी और नीम तेल का उपयोग किया जा सकता है. पशु को नरम और पौष्टिक आहार देना चाहिए, ताकि वह आसानी से खा सके और उसकी ताकत बनी रहे. मुंह की सफाई के लिए नमक पानी या फिटकरी के घोल का इस्तेमाल करना भी फायदेमंद होता है.
कब जरूरी है डॉक्टर की सलाह
अगर घरेलू उपाय करने के बाद भी पशु की हालत में सुधार नहीं होता है, तो देरी करना नुकसानदायक हो सकता है. ऐसे में तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. इसके अलावा पशुओं को साल में दो बार कीड़े की दवा देना और समय-समय पर टीकाकरण कराना बेहद जरूरी है. सही समय पर टीकाकरण से कई गंभीर बीमारियों से बचाव किया जा सकता है. जागरूकता और सही देखभाल से न सिर्फ पशु स्वस्थ रहेंगे, बल्कि किसानों की आमदनी भी सुरक्षित रहेगी और दूध उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी होगी.