खुरपका-मुंहपका से हो सकता है बड़ा नुकसान, समय पर टीका और सही देखभाल से बचेंगे आपके पशु

गर्मी और बरसात से पहले पशुओं में खुरपका-मुंहपका और गलघोंटू जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. पशुपालन विभाग के अनुसार समय पर टीकाकरण, साफ-सफाई और संतुलित आहार देने से पशुओं को सुरक्षित रखा जा सकता है. सही देखभाल से दूध उत्पादन भी बना रहता है और पशुपालकों को नुकसान से बचाव मिलता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Updated On: 8 Mar, 2026 | 12:07 PM

Animal Health: गर्मी और बरसात से पहले का मौसम पशुपालकों के लिए थोड़ा मुश्किल माना जाता है, क्योंकि इस समय पशुओं में कई तरह की बीमारियां फैलने लगती हैं. पशुपालन और डेयरी विभाग के अनुसार अगर समय रहते पशुओं को टीका लगवा दिया जाए और सही खानपान दिया जाए तो ज्यादातर बीमारियों से बचाव किया जा सकता है. सही देखभाल से पशु स्वस्थ रहते हैं और दूध देने की क्षमता भी बनी रहती है. कई बार पशुपालक बीमारी आने के बाद इलाज कराते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पहले से बचाव करना ज्यादा जरूरी है. इससे नुकसान भी कम होता है और पशु जल्दी बीमार नहीं पड़ते.

खतरनाक बीमारी गलघोंटू क्या है

पशुपालन और डेयरी विभाग के अनुसार, पशुओं में होने वाली गलघोंटू बीमारी  को हेमोरेजिक सेप्टिसीमिया भी कहा जाता है. यह बीमारी गाय और भैंस में ज्यादा देखी जाती है. इसमें पशु को तेज बुखार आता है और गले में सूजन हो जाती है. कई बार इलाज न मिलने पर एक से दो दिन में पशु की मौत भी हो सकती है. यह बीमारी खासकर बरसात के मौसम में ज्यादा फैलती है और पशुपालकों को भारी नुकसान पहुंचाती है. इसलिए इस बीमारी से बचने के लिए पहले से टीकाकरण बहुत जरूरी माना जाता है. अगर किसी पशु में बुखार या सूजन दिखाई दे तो तुरंत इलाज कराना चाहिए, क्योंकि शुरुआती समय में दवा ज्यादा असर करती है.

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सही देखभाल से पशुओं को बीमारियों से बचाएं आसानी से.

खुरपका-मुंहपका बीमारी से सावधान

पशुओं में सबसे ज्यादा खुरपका-मुंहपका बीमारी देखने को मिलती है. यह एक वायरल बीमारी  है, जिसमें पशु के मुंह और पैरों में घाव हो जाते हैं. पशु को तेज बुखार आता है और वह चारा खाना कम कर देता है. इस बीमारी में पशु का बुखार 104 से 105 डिग्री तक पहुंच सकता है. दूध देने वाले पशुओं में दूध कम हो जाता है, जिससे पशुपालकों को नुकसान होता है. पशुपालन विभाग के अनुसार इस बीमारी से बचने के लिए साल में दो बार टीका जरूर लगवाना चाहिए. समय पर इलाज मिलने पर कई मामलों में कुछ दिनों में पशु ठीक हो जाते हैं.

टीकाकरण से मिलेगा पूरा बचाव

सरकार की योजनाओं के तहत पशुओं में कई बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण किया जाता है. पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत गाय, भैंस, भेड़, बकरी और सूअर जैसे पशुओं को टीका लगाया जाता है. इस कार्यक्रम का उद्देश्य पशुओं को स्वस्थ रखना और बीमारी को फैलने से रोकना है. खासकर खुरपका-मुंहपका, ब्रुसेलोसिस और अन्य संक्रामक बीमारियों  से बचाने के लिए टीकाकरण जरूरी बताया गया है. बीमार पशुओं को अलग रखना और उनकी आवाजाही कम करना भी जरूरी है. इससे बीमारी दूसरे पशुओं में फैलने से बच सकती है.

सही खानपान से बढ़ेगी ताकत

विशेषज्ञों के अनुसार पशुओं की ताकत अच्छी होगी तो बीमारी जल्दी नहीं लगेगी. इसलिए पशुओं को संतुलित आहार देना बहुत जरूरी है. पशुओं की डाइट  में कैल्शियम, विटामिन-ई और सेलेनियम जैसे पोषक तत्व जरूर शामिल करने चाहिए. इससे पशुओं की रोग से लड़ने की ताकत बढ़ती है. हरा चारा, साफ पानी और संतुलित दाना देने से पशु स्वस्थ रहते हैं. साफ-सफाई का ध्यान रखना भी जरूरी है. पशुपालन और डेयरी विभाग का कहना है कि अगर पशुपालक टीकाकरण, सही आहार और साफ-सफाई पर ध्यान दें तो पशुओं को बीमारियों से बचाया जा सकता है और दूध उत्पादन  भी अच्छा बना रहता है.

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Published: 8 Mar, 2026 | 12:06 PM

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