Heatwave Impac: अप्रैल और मई की तेज गर्मी सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि पशुओं के लिए भी बड़ी चुनौती बन जाती है. इस मौसम में हीट वेव का असर बढ़ने से दुधारू पशुओं की सेहत बिगड़ने लगती है और दूध उत्पादन में गिरावट आ जाती है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK नोएडा) के अनुसार, अगर समय रहते सही देखभाल न की जाए, तो पशु हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और पेट फूलने जैसी समस्याओं का शिकार हो सकते हैं.
गर्मी में क्यों घटता है दूध उत्पादन
गर्मी के मौसम में तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, जिससे पशुओं के शरीर पर सीधा असर पड़ता है. तेज धूप और लू के कारण पशु तनाव में आ जाते हैं, उनका खान-पान कम हो जाता है और शरीर में पानी की कमी होने लगती है. इसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है. कई बार दूध अचानक कम हो जाता है या पूरी तरह घट जाता है, जिससे पशुपालकों को नुकसान उठाना पड़ता है.
हीट वेव से बढ़ता है बीमारियों का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, अप्रैल-मई में पशुओं में हीट स्ट्रोक (लू लगना), डिहाइड्रेशन और ब्लोट (पेट फूलना) जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं. हीट स्ट्रोक होने पर पशु तेजी से सांस लेने लगता है, शरीर बहुत गर्म हो जाता है और आंखें लाल दिखाई देती हैं. वहीं पानी की कमी होने पर पशु कमजोर पड़ जाता है और उसकी कार्यक्षमता घट जाती है. अगर समय पर इलाज न मिले, तो स्थिति गंभीर भी हो सकती है.
ऐसे करें पशुओं की सही देखभाल
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम बताते हैं कि गर्मी में पशुओं को सीधे धूप से बचाना सबसे जरूरी है. उन्हें दिन के समय खासकर 11 बजे से 4 बजे तक छायादार और हवादार जगह पर रखें. पशुओं को दिन में कम से कम 2 से 3 बार साफ और ठंडा पानी जरूर दें. इसके अलावा, दिन में दो से तीन बार हल्का स्नान कराना भी जरूरी है, जिससे उनके शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है. ध्यान रखें कि स्नान हमेशा छाया में ही कराएं, धूप में नहीं.
आहार और पानी का रखें खास ध्यान
गर्मी के मौसम में पशुओं के आहार में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है. उन्हें हरा चारा, सूखा चारा और दाना सही मात्रा में दें. साथ ही आहार में नमक और मिनरल मिक्सचर जरूर मिलाएं, ताकि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी न हो. पानी की पर्याप्त मात्रा देने से शरीर हाइड्रेट रहता है और बीमारियों का खतरा कम हो जाता है. ऐसे में गर्मी के इन दो महीनों में थोड़ी सी सावधानी और सही देखभाल से पशुओं को स्वस्थ रखा जा सकता है और दूध उत्पादन को भी बनाए रखा जा सकता है. पशुपालकों को सलाह दी जाती है कि वे इस मौसम में विशेष ध्यान दें, ताकि किसी तरह का नुकसान न हो और उनकी आय सुरक्षित रहे.