हरा चारा खिलाने से पहले रहें सावधान, अफरा रोग से हर साल कई पशुपालकों को होता नुकसान

बरसात के मौसम में पशुओं में पेट फूलने की समस्या तेजी से बढ़ सकती है. समय पर पहचान और सही देखभाल न होने पर यह गंभीर रूप ले सकती है. विशेषज्ञ पशुपालकों को खानपान पर विशेष ध्यान देने और शुरुआती लक्षण दिखते ही सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं, ताकि बड़े नुकसान से बचा जा सके.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 13 Jun, 2026 | 05:00 PM

Livestock Health: बरसात का मौसम जहां पशुओं के लिए भरपूर हरे चारे का समय माना जाता है, वहीं यही मौसम एक खतरनाक बीमारी का जोखिम भी बढ़ा देता है. पशु चिकित्सक घनश्याम कुंवर (KVK Noida) के अनुसार इस दौरान पेट फूलने या अफरा रोग के मामले तेजी से बढ़ते हैं. ये ऐसी स्थिति है जिसमें पशु के पेट में गैस और झाग जमा हो जाते हैं और समय पर उपचार न मिलने पर उसकी जान तक जा सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी और सही खानपान से इस गंभीर समस्या से बचा जा सकता है.

हरा चारा बन सकता है परेशानी की वजह

पशु चिकित्सक घनश्याम कुंवर के अनुसार, बरसात में पशुओं को हरा  और रसीला चारा अधिक मात्रा में उपलब्ध होता है. हालांकि बिना संतुलन के दिया गया गीला चारा कई बार परेशानी का कारण बन जाता है. विशेष रूप से ओस या बारिश से भीगा हुआ चारा तेजी से पचता है और पेट में गैस बनने लगती है. यदि पशु को अचानक अधिक मात्रा में हरा चारा या दाना खिला दिया जाए तो अफरा रोग का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. यही कारण है कि विशेषज्ञ हमेशा सूखे और हरे चारे का संतुलित मिश्रण देने की सलाह देते हैं.

ये संकेत दिखें तो तुरंत हो जाएं सतर्क

अफरा रोग  की शुरुआत में पशु बेचैन दिखाई देता है. धीरे-धीरे उसका पेट, खासकर बाईं ओर का हिस्सा, असामान्य रूप से फूलने लगता है. पशु खाना-पीना छोड़ देता है और जुगाली भी बंद कर देता है. कई बार उसे सांस लेने में परेशानी होने लगती है और वह बार-बार उठने-बैठने लगता है. यदि समय रहते इन लक्षणों को पहचान लिया जाए तो बड़ी समस्या को टाला जा सकता है. पशुपालकों को रोजाना अपने पशुओं के व्यवहार पर नजर रखने की सलाह दी जाती है.

छोटी लापरवाही से बढ़ सकता है खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार कई बार पशु पॉलीथिन, प्लास्टिक या अन्य अपशिष्ट पदार्थ खा लेते हैं. इससे पाचन तंत्र प्रभावित होता है और गैस बाहर नहीं निकल पाती. खराब या सड़ा हुआ भोजन भी पेट संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकता है. इसलिए पशुओं के रहने और खाने की जगह को साफ रखना बेहद जरूरी है. स्वच्छता और संतुलित आहार  अफरा रोग से बचाव की पहली शर्त मानी जाती है.

समय पर उपचार से बच सकती है जान

पशु का पेट फूलने  पर तुरंत कदम उठाना जरूरी होता है. शुरुआती स्थिति में कुछ घरेलू उपाय राहत दे सकते हैं, लेकिन गंभीर हालत में पशु चिकित्सक की मदद लेना अनिवार्य है. विशेषज्ञ बताते हैं कि अधिक गैस बनने या सांस लेने में दिक्कत होने पर देरी करना खतरनाक साबित हो सकता है. इसलिए पशुपालकों को सलाह दी जाती है कि बरसात के मौसम में पशुओं के खानपान पर विशेष ध्यान दें और किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें. समय पर उपचार से पशु की जान बचाई जा सकती है और आर्थिक नुकसान से भी बचाव संभव है.

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Published: 13 Jun, 2026 | 05:00 PM

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