Bijnor News: दबिश पड़ते ही गंगा में कूद गईं 125 भैंसें, पूरी रात दो जिलों की टीमें करती रहीं तलाश, पढ़ें पूरा मामला

Buffalo Missing: उत्तर प्रदेश बिजनौर के खादर क्षेत्र में वन विभाग की कार्रवाई के दौरान बड़ा हड़कंप मच गया, जब 125 से ज्यादा भैंसें गंगा पार तैरकर दूसरी ओर निकल गईं. घटना के बाद बिजनौर और मुजफ्फरनगर की टीमें लगातार तलाश में जुटी हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Updated On: 12 Apr, 2026 | 02:52 PM

Uttar Pradesh Bijnor News: उत्तर प्रदेश बिजनौर के खादर इलाके से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई. आधी रात के समय घुमंतू जनजाति वन गुर्जर के कुछ लोग करीब 300 भैंसों के साथ गंगा किनारे डेरा डालने पहुंचे थे. जैसे ही वन विभाग को इसकी सूचना मिली, टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई. टीम ने टॉर्च लेकर दबिश दी और वन गुर्जरों को वहां से हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी. इसी दौरान भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और डरी हुई भैंसों का बड़ा झुंड गंगा नदी में उतर गया. देखते ही देखते सवा सौ यानी 125 से ज्यादा भैंसें तैरकर नदी के दूसरी ओर पहुंच गईं. अब बिजनौर और मुजफ्फरनगर के वन विभाग की टीमें इन भैंसों की तलाश में अभियान चला रही हैं.

बता दें कि वन गुर्जर हिमालय की तलहटी (उत्तराखंड, यूपी, हिमाचल) में रहने वाला एक पारंपरिक मुस्लिम पशुपालक (Nomadic) समुदाय है. ये खानाबदोश होते हैं, जो गर्मियों में ऊंचे पहाड़ों और सर्दियों में मैदानी जंगलों में अपनी भैंसों के साथ प्रवास करते हैं.

आधी रात को वन विभाग की दबिश, मचा हड़कंप

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड के हरिद्वार के गैंडीखाता क्षेत्र से कुछ वन गुर्जर रावली तटबंध के पास लगभग 300 भैंस लेकर पहुंचे थे. वन विभाग को पहले से आशंका थी कि खादर क्षेत्र में फिर से डेरा डालने की कोशिश हो सकती है. सूचना मिलते ही क्षेत्रीय वनाधिकारी महेशचंद्र गौतम के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुंची. वन विभाग की टीम  ने जैसे ही दबिश दी, वहां अफरा-तफरी मच गई. कुछ वन गुर्जरों ने अपनी भैंसों को बचाने के लिए उन्हें गंगा की धारा की तरफ मोड़ दिया. भैंसें पहले से ही शोर और टॉर्च की रोशनी से डरी हुई थीं. ऐसे में एक के पीछे एक कई भैंसें नदी में उतरती चली गईं. गंगा की धारा उस जगह करीब 100 मीटर से ज्यादा चौड़ी बताई जा रही है, लेकिन भैंसों ने बिना रुके तैरकर दूसरी तरफ पहुंचने का रास्ता बना लिया.

125 से ज्यादा भैंसें लापता, पांच लोग पकड़े गए

इस पूरी कार्रवाई के दौरान वन विभाग ने पांच वन गुर्जरों को पकड़ लिया. पकड़े गए लोगों के नाम मोहम्मद ईशा, गामा, शमशेर, अशरफ और शराफत बताए गए हैं. बाद में उन्हें निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया. बाकी वन गुर्जरों को उनकी बची हुई भैंसों के साथ गैंडीखाता  की तरफ वापस भेज दिया गया. सबसे बड़ी चिंता उन 125 से ज्यादा भैंसों की है जो गंगा पार कर दूसरी ओर निकल गईं. रात का अंधेरा होने की वजह से उनका सही लोकेशन पता नहीं चल पाया. अब वन विभाग की टीम खादर के बड़े इलाके में लगातार तलाश कर रही है. यह इलाका हजारों बीघा में फैला हुआ है, इसलिए सर्च ऑपरेशन आसान नहीं है.

पौधारोपण बचाने के लिए सख्ती

वन विभाग के अनुसार खादर क्षेत्र में लगातार बड़े स्तर पर पौधारोपण किया  जा रहा है. वन गुर्जर जब अपने सैकड़ों मवेशियों के साथ यहां डेरा डालते हैं तो ये जानवर छोटे पौधों को खा जाते हैं. इससे विभाग की मेहनत खराब हो जाती है और हरियाली बढ़ाने की योजना पर असर पड़ता है. इसी वजह से विभाग ने अब खादर क्षेत्र में वन गुर्जरों को डेरा डालने से रोकने का फैसला किया है. कुछ दिन पहले भी करीब 600 भैंसों के साथ आए वन गुर्जरों को रावली खादर से वापस भेजा गया था. इस बार भी विभाग ने वही सख्ती दिखाई, लेकिन मामला तब अलग हो गया जब बड़ी संख्या में भैंसें गंगा में उतर गईं.

ऐसे तैरती हैं गाय-भैंस, जानकारों ने बताया तरीका

जानकार बताते हैं कि गाय, भैंस और दूसरे चौपाए जानवर प्राकृतिक रूप से अच्छे तैराक होते हैं. खासकर खादर और बाढ़ वाले इलाकों में रहने वाले मवेशी पानी में आसानी से रास्ता  बना लेते हैं. जब बाढ़ आती है, तब इन्हें सुरक्षित निकालने के लिए एनडीआरएफ की टीम भी खास तरीका अपनाती है. छोटे बच्चों को नाव में बैठा लिया जाता है, जबकि उनकी मां और बाकी झुंड नाव के पीछे-पीछे तैरते हुए बाहर आ जाते हैं. यही वजह है कि इस घटना में भी भैंसों ने तेज धारा के बावजूद गंगा पार कर ली.

वनाधिकारी महेशचंद्र गौतम ने मीडिया से बताया कि बिजनौर और मुजफ्फरनगर की संयुक्त टीम लगातार भैंसों की तलाश कर रही है. उम्मीद है कि जल्द ही सभी भैंसों को ढूंढ़कर गंगा के इस ओर लाया जाएगा और वन गुर्जरों को सौंप दिया जाएगा. फिलहाल अभी तक एक भी भैंस बरामद नहीं हो सकी है.

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Published: 12 Apr, 2026 | 02:51 PM
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