ना इंजेक्शन ना दवा..डायबिटीज से लेकर गठिया के इलाज में मददगार बना ऊंटनी का दूध

ऊंटनी का दूध अब सिर्फ पारंपरिक पेय नहीं, बल्कि एक औषधीय गुणों से भरपूर ड्रिंक बन चुका है, जो डायबिटीज, गठिया और एलर्जी जैसी समस्याओं में लाभकारी साबित हो रहा है.

धीरज पांडेय
नोएडा | Updated On: 4 May, 2025 | 01:53 PM

राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में सदियों से ऊंटनी का दूध पिया जाता रहा है. पहले इसे केवल एक पारंपरिक खानपान माना जाता था, लेकिन अब इसे एक औषधीय गुणों से भरपूर पेय के रूप में देखा जा रहा है. ऊंटनी के दूध में मौजूद पोषक तत्व न केवल शरीर को मजबूती प्रदान करते हैं, बल्कि यह कई स्वास्थ्य समस्याओं में भी मददगार साबित हो रहा है. विशेष रूप से डायबिटीज, गठिया, एलर्जी जैसी समस्याओं में इसका सेवन लाभकारी साबित हो रहा है. यही वजह है कि ऊंटनी का दूध अब हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने वालों की पसंद बनता जा रहा है.

डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद

ऊंटनी के दूध में ऐसा प्रोटीन पाया जाता है, जो इंसुलिन जैसा काम करता है. यही वजह है कि ये ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करता है. डॉक्टरों की सलाह पर कुछ लोग इसे अपने रोजाना खाने में शामिल कर रहे हैं ताकि इंसुलिन इंजेक्शन की जरूरत न पड़े. खास बात यह है कि इसमें फैट बहुत कम होता है, जिससे दिल की सेहत भी बनी रहती है.

दूध से एलर्जी हो तो ये है बेहतर विकल्प

कई दफा आप देखते होंगे की कई लोगों को गाय या भैंस के दूध से एलर्जी होती है. उनके लिए ऊंटनी का दूध एक अच्छा विकल्प बनकर उभरा है. हेल्थ एर्सपर्टों की माने तों इसमें ऐसा प्रोटीन होता है जो शरीर में एलर्जी पैदा नहीं करता. यही कारण है कि छोटे बच्चों से लेकर बड़े लोगों तक, जो मिल्क एलर्जी से परेशान हैं, वे इसे आराम से पी सकते हैं.

ऑटिज्म से जूझ रहे बच्चों के लिए मददगार

ऑटिज्म एक ऐसा न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जो बच्चों की समझ और सामाजिक व्यवहार को प्रभावित करती है. हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो ऊंटनी के दूध में मौजूद विटामिन A, C और E जैसे एंटीऑक्सीडेंट मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं, जिससे बच्चों के व्यवहार में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल सकता है.

कैल्शियम और प्रोटीन की भरपूर मात्रा

ऊंटनी के दूध को अब सिर्फ पारंपरिक खानपान नहीं, बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर पोषण का स्रोत माना जाता है. इसमें आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो खून की कमी यानी एनीमिया से लड़ने में मदद करता है. ऊंटनी के दूध में आयरन की मात्रा अधिक होती है, जिससे यह एनीमिया जैसी स्थितियों में सहायक माना जाता है. वहीं कुछ शोधों के अनुसार, इसका सेवन बेहतर हीमोग्लोबिन स्तर से जुड़ा हो सकता है.

हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल ऊंटनी का दूध पीने से संसाधन-वंचित क्षेत्रों में एनीमिया की समस्या पूरी तरह नहीं सुलझ सकती है. लेकिन एनीमिया का कारण केवल आयरन की कमी नहीं, बल्कि कई कारकों का परिणाम होता है. इसलिए दूध की खपत और हीमोग्लोबिन स्तर के संबंध को पूरी तरह समझने के लिए और वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है.

Disclaimer- यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है. कृपया चिकित्सक या एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.

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Published: 4 May, 2025 | 01:53 PM
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