अक्सर घरों की दीवारों पर दिखने वाली छिपकली को लोग देखकर घबरा जाते हैं. मगर आपको यह जानकर हैरानी होगी कि विदेशों में छिपकली पालन एक कमाई का धंधा बन चुका है. हालांकि, भारत में छिपकली पालन नहीं किया जाता है. चीन, थाइलैंड समेत कई देशों में टोकाय गेको प्रजाति की छिपकलियां पाली जाती हैं और उन्हें बाजार में बेचा जाता है. यह कुछ लोगों की आमदनी का स्रोत बन रही हैं. लोग इन्हें पकड़कर या पालकर रोजाना हजारों रुपये तक कमा रहे हैं.
कहां-कहां होता है छिपकली पालन?
कैसे की जाती है छिपकलियों की पकड़?
छिपकलियों को पकड़ने के लिए लोगों के पास करीब 2 मीटर लंबी लकड़ी होती है, जिसकी नोक पर गोंद लगा होता है. रात के समय लोग इन लकड़ियों से दीवारों या छतों पर बैठी छिपकलियों को पकड़ते हैं. जब छिपकली गोंद से चिपक जाती है, तो उसे सावधानी से हटाकर एक डिब्बे में रख दिया जाता है.
- बारिश के मौसम में छिपकलियों की संख्या बढ़ जाती है.
- एक रात में 400–450 छिपकलियां पकड़ी जा सकती हैं.
- इन छिपकलियों को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण में रखा जाता है.
एक रात में 5 हजार रुपये तक की कमाई
जो लोग छिपकली पालन या पकड़ने का काम करते हैं, वे एक रात में 2000 से 5000 रुपये तक कमा लेते हैं. खासतौर पर यदि उनके पास टोकाय गेको जैसी दुर्लभ प्रजाति की छिपकली हो, तो उसकी कीमत 50 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक मिल सकती है. यह व्यवसाय अब कई लोगों के लिए आजीविका का बड़ा स्रोत बन चुका है. इसके जरिए लोग अपनी आर्थिक स्थिति सुधार रहे हैं और आत्मनिर्भर बन रहे हैं. विदेशों में इन छिपकलियों की जबरदस्त मांग है, जिससे लगातार इसका बाजार भी तेजी से बढ़ रहा है.
छिपकलियों का उपयोग कहां-कहां होता है?
टोकाय गेको और अन्य प्रजातियों की छिपकलियों का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा, औषधि और खाने के रूप में किया जाता है-
- चीन की दवा इंडस्ट्री में छिपकलियों का विशेष उपयोग होता है.
- अस्थमा, गठिया और त्वचा रोगों की दवाएं बनाने में काम आती हैं.
- कुछ देशों में इनका मांस खाया जाता है, जिसमें भरपूर प्रोटीन और पोषक तत्व होते हैं.