चिकन हुआ महंगा: गर्मी, बीमारी और कम उत्पादन ने बढ़ाई कीमतें, 340 रुपये प्रति किलो तक पहुंचे दाम

जहां आम दिनों में एक मुर्गे का वजन 2.5 से 3 किलो तक होता है, वहीं गर्मी के मौसम में यह घटकर 1.5 से 1.75 किलो तक रह जाता है. इसका सीधा असर उत्पादन और कीमत दोनों पर पड़ता है. कम वजन का मतलब है कम सप्लाई, जिससे बाजार में कीमतें बढ़ जाती हैं.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 21 Mar, 2026 | 07:44 AM

Chicken price hike: देशभर में बढ़ती गर्मी का असर अब लोगों की थाली तक पहुंच गया है. चिकन की कीमतों में अचानक तेज उछाल देखने को मिल रहा है, जिससे आम लोगों का बजट बिगड़ने लगा है. कई शहरों में खुदरा बाजार में चिकन 270 से 340 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है.

यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब अंडे की कीमतों में गिरावट आई है, लेकिन चिकन महंगा होता जा रहा है. इसके पीछे कई कारण सामने आए हैं, जिनमें सबसे बड़ा कारण गर्मी और पक्षियों की बढ़ती मृत्यु दर है.

गर्मी का सीधा असर: वजन घटा, उत्पादन कम

बिजनेसलाइन की खबर के अनुसार, विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते तापमान के कारण मुर्गियों के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ रहा है. तेलंगाना पोल्ट्री फेडरेशन के अध्यक्ष के. मोहन रेड्डी के अनुसार, गर्मियों में पक्षियों का वजन सामान्य से काफी कम हो जाता है.

जहां आम दिनों में एक मुर्गे का वजन 2.5 से 3 किलो तक होता है, वहीं गर्मी के मौसम में यह घटकर 1.5 से 1.75 किलो तक रह जाता है. इसका सीधा असर उत्पादन और कीमत दोनों पर पड़ता है. कम वजन का मतलब है कम सप्लाई, जिससे बाजार में कीमतें बढ़ जाती हैं.

उत्पादन में गिरावट से बढ़ी परेशानी

पोल्ट्री उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में किसानों को भारी नुकसान हुआ था. अप्रैल से नवंबर के बीच कई बार चिकन की कीमत उत्पादन लागत से भी नीचे चली गई थी. कर्नाटक पोल्ट्री फार्मर्स एंड ब्रीडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन पसुपार्थी के अनुसार, इसी वजह से कई पोल्ट्री फार्मर्स ने उत्पादन कम कर दिया. अब जब मांग बढ़ी है, तो सप्लाई उतनी नहीं है, जिससे कीमतों में तेजी आई है.

हर हफ्ते बढ़ रहे दाम

महाराष्ट्र पोल्ट्री फार्मर्स एंड ब्रीडर्स एसोसिएशन के अधिकारियों का कहना है कि राज्य में चिकन की कीमतें हर हफ्ते 20 से 30 रुपये तक बढ़ रही हैं.

बेंगलुरु के आसपास फार्मगेट पर जिंदा मुर्गे की कीमत करीब 146 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है, जबकि नवंबर में यह सिर्फ 90 रुपये प्रति किलो थी. यह बढ़ोतरी साफ दिखाती है कि बाजार में मांग ज्यादा और सप्लाई कम है.

केरल में भी कीमतों में उछाल

केरल में भी चिकन के दाम तेजी से बढ़े हैं. पोल्ट्री फार्मर्स एंड ट्रेडर्स समिति के अध्यक्ष प्रमोद टी.के. के अनुसार, पिछले दो महीनों में कीमतों में बड़ा उछाल आया है. यहां खुदरा बाजार में चिकन 171 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जबकि फार्मगेट कीमत 126 रुपये प्रति किलो के आसपास है. उन्होंने बताया कि तेज गर्मी और कुछ इलाकों में वायरल बीमारियों के कारण पक्षियों की मौत बढ़ी है, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ है.

मांग में कमी नहीं, रमजान का भी असर

दिलचस्प बात यह है कि कीमतें बढ़ने के बावजूद चिकन की मांग में कोई खास कमी नहीं आई है. रमजान के चलते कई राज्यों में चिकन की खपत बढ़ी हुई है. केरल में हर हफ्ते करीब 2.25 करोड़ मुर्गों की खपत होती है, जो यह दिखाता है कि बाजार में मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है.

इनपुट लागत भी बनी वजह

चिकन की कीमत बढ़ने के पीछे सिर्फ उत्पादन ही नहीं, बल्कि लागत भी एक बड़ा कारण है. पोल्ट्री फीड और ट्रांसपोर्ट जैसी लागतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे किसानों और व्यापारियों पर दबाव बढ़ रहा है. इन बढ़ती लागतों का असर आखिरकार ग्राहकों तक पहुंचता है, जिससे चिकन महंगा हो जाता है.

आगे क्या हो सकते हैं हालात

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर गर्मी और बीमारियों का असर जारी रहा, तो आने वाले दिनों में चिकन की कीमतें और बढ़ सकती हैं. हालांकि, यदि मौसम में सुधार हुआ या मांग में कमी आई, तो कीमतों में थोड़ी स्थिरता आ सकती है.

आम आदमी की थाली पर असर

चिकन की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की थाली को भी प्रभावित किया है. जो लोग नियमित रूप से चिकन का सेवन करते हैं, उनके लिए यह अब महंगा विकल्प बनता जा रहा है. वहीं गर्मी, कम उत्पादन और बढ़ती लागत के कारण चिकन बाजार में असंतुलन पैदा हो गया है, जिसका असर आने वाले समय में और भी देखने को मिल सकता है.

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