अभी 5 दिनों तक पड़ेगी कड़ाके की ठंड, गाय-भैंस के लिए एडवाइजरी.. खिलाएं ये दाना 10 किलो देंगी दूध

पंजाब के लुधियाना में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे से खेती और डेयरी सेक्टर पर संकट बढ़ गया है. विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है. पशुओं के लिए सुरक्षित आश्रय, संतुलित आहार और सही देखभाल अपनाकर नुकसान से बचा जा सकता है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 9 Jan, 2026 | 11:48 AM

Animal Husbandry: पंजाब के लुधियाना जिले में बीते चार- पांच दिनों से कड़ाके की ठंड और घना कोहरा छाया हुआ है, जिससे खेती और डेयरी सेक्टर पर खतरा बढ़ गया है. मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में तापमान और गिर सकता है. पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी और गुरु अंगद देव वेटरनरी एवं एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है और कहा है कि यह मौसम फसलों के साथ-साथ पशुओं के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है.

वहीं पशुपालन विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक ठंड से दूध उत्पादन घट सकता है और पशुओं के स्वास्थ्य  पर भी बुरा असर पड़ता है. विशेषज्ञों ने सर्दियों में पशुओं की देखभाल के लिए तीन बातों पर खास जोर दिया है. बेहतर और सुरक्षित आश्रय, संतुलित पोषण और समय पर स्वास्थ्य देखभाल.

ठंड से बचाने के लिए करें ये काम

उन्होंने किसानों को सलाह दी कि खुले शेडों में ठंडी हवाओं से बचाव के लिए तिरपाल, बांस, पुआल या जूट से बने परदे लगाएं. शेड के आसपास लगे घने और छायादार पेड़ों की छंटाई करने से धूप अंदर तक पहुंचती है, जिससे प्राकृतिक गर्माहट मिलती है और सूरज की पराबैंगनी किरणें पशुशालाओं को कीटाणुरहित भी करती हैं. विशेषज्ञों के अनुसार दिन के समय पशुओं को खुले बाड़ों में धूप  में जरूर रखें. शेड और फर्श को हमेशा सूखा रखना चाहिए, ताकि निमोनिया, दस्त और कॉक्सीडियोसिस जैसी बीमारियों से बचाव हो सके. ठंड में पशुओं के शरीर से गर्मी का नुकसान कम करने के लिए सही बिछावन बेहद जरूरी है.

सर्दी में पशुओं को दें ये आहार

बड़े पशुओं के लिए करीब छह इंच और छोटे पशुओं के लिए कम से कम दो इंच मोटा बिछावन होना चाहिए. इसके लिए धान या गेहूं का भूसा, आरी की बुरादे या चावल की भूसी का उपयोग किया जा सकता है. बड़े पशुओं को ठंड से बचाने के लिए टाट के बोरे से बने कंबल भी ओढ़ाए जा सकते हैं. पोषण प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है. सर्दियों में आसानी से मिलने वाला बरसीम चारा प्रोटीन और नमी से भरपूर होता है, जो दूध देने वाले और बढ़ते पशुओं के लिए फायदेमंद है.

बढ़ जाएगा दूध उत्पादन

सस्ते और पौष्टिक आहार के लिए सरसों, कपास बीज, मूंगफली और सोयाबीन  खली जैसी प्रोटीनयुक्त खल का इस्तेमाल किया जा सकता है. चारे की कमी होने पर 25- 30 किलो दलहनी हरा चारा, 5-10 किलो गेहूं का भूसा और करीब 3 किलो संतुलित दाना मिलाकर देने से पशुओं का शरीर तापमान बना रहता है. वहीं अगर चारा पर्याप्त हो, तो 40-50 किलो अच्छी गुणवत्ता का हरा चारा देने से गाय-भैंस में 10 लीटर तक दूध उत्पादन संभव है.

ठंडे पानी से नहलाने से बचें

विशेषज्ञों ने किसानों को यह भी याद दिलाया कि दाने में दो प्रतिशत मिनरल मिक्सचर और एक प्रतिशत नमक जरूर मिलाएं. पशुओं को साफ और गुनगुना पानी पिलाएं, नियमित सफाई रखें, ठंडे पानी से नहलाने से बचें और शेड में उचित हवा का आवागमन बनाए रखें.

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Published: 9 Jan, 2026 | 11:41 AM

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