Thanela Rog: गाय-भैंस को तो नहीं हुआ थनैला, दूध घटने से पहले जान लें बचाव के तरीके

Mastitis Treatment Cow Buffalo: डेयरी पशुओं में थनैला बीमारी एक आम लेकिन गंभीर समस्या है, जो दूध उत्पादन और पशु स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित करती है. समय पर लक्षण पहचानना, साफ-सफाई रखना और सही देखभाल करना इस संक्रमण से बचाव का सबसे आसान और असरदार तरीका माना जाता है. इससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान से बचने में मदद मिलती.

नोएडा | Updated On: 13 Feb, 2026 | 08:23 PM

Mastitis Disease Prevention Methods:  डेयरी व्यवसाय में पशुओं का स्वस्थ रहना सबसे जरूरी होता है. अगर गाय या भैंस बीमार हो जाए, तो इसका सीधा असर दूध उत्पादन और कमाई पर पड़ता है. मवेशियों में होने वाली थनैला बीमारी ऐसी ही एक समस्या है, जो धीरे-धीरे पूरे डेयरी काम को नुकसान पहुंचा सकती है. अच्छी बात यह है कि समय रहते इसके लक्षण पहचानकर और साफ-सफाई का ध्यान रखकर इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है. कुछ आसान घरेलू उपाय भी इसमें काफी मददगार साबित होते हैं.

थन में सूजन दिखे तो तुरंत सावधान

पशु विशेषज्ञों के अनुसार, थनैला बीमारी  की शुरुआत अक्सर छोटे-छोटे लक्षणों से होती है. जैसे थन में सूजन आना, सख्त होना या लाल दिखाई देना. कई बार दूध निकालते समय पशु दर्द महसूस करता है और दूध की मात्रा कम होने लगती है. यही संकेत बताते हैं कि संक्रमण शुरू हो सकता है. अगर इन लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए, तो बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है. लेकिन लापरवाही करने पर संक्रमण बढ़ सकता है और पशु की सेहत के साथ-साथ दूध उत्पादन पर भी बुरा असर पड़ सकता है.

घरेलू देखभाल से मिल सकती है राहत

शुरुआती सूजन को कम करने के लिए गर्म सिकाई करना फायदेमंद माना जाता है. गर्म पानी में अजवाइन डालकर उबालने के बाद उससे थन की सिकाई करने से सूजन कम हो सकती है. दिन में कई बार हल्की सिकाई करने से संक्रमण का असर  धीरे-धीरे कम होने लगता है. यह तरीका आसान होने के साथ-साथ कम खर्च वाला भी है. हालांकि अगर समस्या ज्यादा बढ़ जाए, तो पशु चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी होता है ताकि पशु को सही इलाज  मिल सके.

दूध निकालने के बाद न करें यह गलती

पशु विशेषज्ञों के अनुसार, कई पशुपालक दूध निकालने के तुरंत बाद पशु को बैठने देते हैं. यह आदत संक्रमण फैलने का बड़ा कारण बन सकती है. दूध निकालने के बाद थन के छिद्र खुले रहते हैं और उस समय गंदगी या जीवाणु आसानी से अंदर जा सकते हैं. इसलिए दूध निकालने के बाद पशु  को कम से कम आधे घंटे तक खड़ा रखना चाहिए. इस दौरान चारा या पानी देने से पशु खड़ा रहता है और संक्रमण का खतरा कम हो जाता है.

सफाई और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव

थनैला बीमारी से बचने के लिए साफ-सफाई सबसे जरूरी है. दूध निकालने से पहले और बाद में थन को साफ पानी या दवा मिले घोल से पोंछना चाहिए. पशु के बैठने की जगह भी साफ और सूखी होनी चाहिए. अगर पशुपालक नियमित रूप से यह आदत बना लें, तो इस बीमारी से काफी हद तक बचा जा सकता है. छोटी-छोटी सावधानियां पशुओं को स्वस्थ रखती हैं और डेयरी व्यवसाय को नुकसान से बचाती हैं. थनैला बीमारी  कोई असाध्य समस्या नहीं है. सही समय पर पहचान, साफ-सफाई और थोड़ी अतिरिक्त देखभाल से पशुओं को स्वस्थ रखा जा सकता है. इससे दूध उत्पादन बना रहता है और पशुपालकों की कमाई भी सुरक्षित रहती है.

Published: 13 Feb, 2026 | 11:30 PM

Topics: