अब समुद्र में नहीं खोएंगे मछुआरे, नाव से सीधे जुड़ेगा कंट्रोल सिस्टम और तुरंत पहुंचेगी मदद हर समय

Fishermen Safety: सरकार ने मछुआरों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए नई तकनीक शुरू करने की योजना बनाई है. इस सिस्टम से समुद्र में नावों से संपर्क बना रहेगा और जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद मिल सकेगी. मौसम और खतरे की जानकारी समय पर मिलने से मछुआरे ज्यादा सुरक्षित तरीके से काम कर पाएंगे.

नोएडा | Published: 1 Mar, 2026 | 02:22 PM

Fisheries Technology: समुद्र में मछली पकड़ने वाले मछुआरे अक्सर कई तरह के खतरे झेलते हैं. खराब मौसम, रास्ता भटकने का डर और अचानक आने वाली मुश्किलें उनके काम को जोखिम भरा बना देती हैं. अब इन समस्याओं को कम करने के लिए मत्स्य पालन विभाग, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने नई तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया है. सरकार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत देशी अंतरिक्ष तकनीक की मदद से मछुआरों की सुरक्षा और काम को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है. इस नई योजना से मछुआरों को समुद्र में सुरक्षित रहने और सही जानकारी पाने में मदद मिलेगी.

नई तकनीक से मछुआरों को मिलेगा सहारा

मत्स्य पालन विभाग के अनुसार अब मछली पकड़ने  वाली नावों में खास संचार प्रणाली लगाई जाएगी, जिसे वेसल कम्युनिकेशन एंड सपोर्ट सिस्टम कहा जाता है. इस तकनीक की मदद से समुद्र में मौजूद नावों से लगातार संपर्क बनाए रखा जा सकेगा. अगर कोई नाव रास्ता भटक जाए या किसी परेशानी में फंस जाए तो तुरंत जानकारी मिल सकेगी. इससे बचाव कार्य जल्दी शुरू किया जा सकेगा और मछुआरों की जान बचाने में मदद मिलेगी. यह तकनीक खास तौर पर उन मछुआरों के लिए फायदेमंद होगी जो दूर समुद्र में जाकर मछली पकड़ते हैं.

अर्थ स्टेशन से मिलेगी सही जानकारी

इस योजना के तहत एक खास अर्थ स्टेशन भी बनाया जाएगा. यह स्टेशन समुद्र में चल रही नावों से संपर्क बनाए रखेगा और जरूरी जानकारी भेजेगा. मछुआरों को मौसम की जानकारी,  समुद्र की स्थिति और खतरे की चेतावनी समय पर मिल सकेगी. इससे मछुआरे पहले से तैयारी कर सकेंगे और नुकसान से बच सकेंगे. सही जानकारी मिलने से मछुआरों का भरोसा भी बढ़ेगा और वे ज्यादा सुरक्षित तरीके से काम कर पाएंगे.

सुरक्षित और टिकाऊ मत्स्य पालन की दिशा में कदम

सरकार का मानना है कि नई तकनीक से मत्स्य पालन  को ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ बनाया जा सकता है. अगर मछुआरे सही जानकारी के साथ समुद्र में जाएंगे तो संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकेंगे. इससे मछलियों की संख्या को संतुलित रखने में भी मदद मिलेगी. वैज्ञानिक तरीके से मछली पकड़ने से भविष्य में भी मछुआरों को फायदा मिलता रहेगा. इस योजना का मकसद सिर्फ सुरक्षा ही नहीं बल्कि मत्स्य पालन को आधुनिक बनाना भी है.

आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ता कदम

मत्स्य पालन विभाग के अनुसार इस योजना में देशी अंतरिक्ष तकनीक  का उपयोग किया जा रहा है. इससे भारत की तकनीकी ताकत भी बढ़ेगी और देश आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा. सरकार का लक्ष्य है कि साल 2047 तक भारत को विकसित देश बनाया जाए. मछुआरों को नई तकनीक से जोड़ना इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. इससे रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे और ग्रामीण तथा तटीय क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.

मछुआरों के जीवन में आएगा बदलाव

विशेषज्ञों का मानना है कि नई संचार प्रणाली लागू होने के बाद मछुआरों का काम आसान हो जाएगा. उन्हें समुद्र में डर कम लगेगा और वे ज्यादा भरोसे के साथ काम कर सकेंगे. समय पर मदद मिलने से दुर्घटनाओं का खतरा भी घटेगा. मत्स्य पालन विभाग  का कहना है कि आने वाले समय में ज्यादा से ज्यादा नावों को इस तकनीक से जोड़ा जाएगा. इससे देश के लाखों मछुआरों को फायदा मिलेगा और उनका जीवन पहले से ज्यादा सुरक्षित और बेहतर बन सकेगा.

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