Sheep Farming: कम खर्च में बड़ा मुनाफा, देसी भेड़ पालन का ऐसा फॉर्मूला जो बदल देगा आपकी सोच

भेड़पालन अब किसानों के लिए कमाई का भरोसेमंद जरिया बनता जा रहा है. सही नस्ल और नियमित देखभाल से घर बैठे अच्छी आमदनी संभव है. बिना मंडी गए बिक्री, कम खर्च और सालभर चलने वाला यह धंधा ग्रामीण किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 28 Dec, 2025 | 01:23 PM

Sheep Farming : आज के दौर में खेती के साथ-साथ पशुपालन किसानों की आय बढ़ाने का भरोसेमंद जरिया बनता जा रहा है. बढ़ती लागत और मौसम के बीच भेड़पालन ऐसा विकल्प है, जिसमें कम जमीन और सीमित खर्च के साथ अच्छी कमाई की संभावना रहती है. सही नस्ल का चयन, नियमित देखभाल और बाजार की समझ हो, तो भेड़पालन को धीरे-धीरे फायदे के व्यवसाय में बदला जा सकता है. यही वजह है कि अब गांवों में कई किसान इसे अपनाकर घर बैठे सालभर की आमदनी सुनिश्चित कर रहे हैं.

धीरे-धीरे बनता है मुनाफे का कारोबार

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भेड़पालन की शुरुआत  छोटे स्तर से भी की जा सकती है. शुरुआत में कुछ ही भेड़ों से काम शुरू होता है और धीरे-धीरे उनकी संख्या बढ़ती जाती है. सही देखभाल और समय पर बिक्री से कुछ ही सालों में दर्जनों भेड़ें हो जाती हैं. अच्छी बात यह है कि भेड़ और उनके बच्चे बेचने के लिए मंडी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, कई बार खरीदार खुद गांव तक पहुंच जाते हैं. इससे समय, मेहनत और खर्च तीनों की बचत होती है.

देसी नस्ल की भेड़ में कम खर्च, ज्यादा फायदा

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि भेड़पालन में देसी नस्ल  सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित होती है. देसी नस्ल की भेड़ें मौसम के अनुसार जल्दी ढल जाती हैं और बीमार भी कम पड़ती हैं. इनके पालन में दवाइयों पर ज्यादा खर्च नहीं आता. ये स्थानीय चारे पर ही अच्छे से पल जाती हैं, जिससे लागत काफी कम रहती है. यही वजह है कि ग्रामीण इलाकों में देसी नस्ल की भेड़ें किसानों की पहली पसंद बन रही हैं.

सही देखभाल से रहती हैं भेड़ें स्वस्थ

भेड़ों के लिए साफ और खुली जगह बहुत जरूरी मानी जाती है. दिन में भेड़ों को चरने  के लिए बाहर ले जाया जाता है और शाम को सुरक्षित बाड़े में रखा जाता है. चारे में हरा चारा, सूखा भूसा और जरूरत के अनुसार दाना दिया जाता है. साफ पानी हर समय उपलब्ध रहना जरूरी है. सर्दियों में भेड़ों को ठंडी हवा से बचाने के लिए बाड़े को ढककर रखा जाता है और सूखी पराली का बिछावन बिछाया जाता है. खासकर छोटे मेमनों पर ज्यादा ध्यान देना जरूरी होता है.

सालभर चलने वाला धंधा, नियमित आमदनी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आमतौर पर 10 से 12 महीने में भेड़ या उसका बच्चा बेचने लायक हो जाता है. अच्छी देखभाल से भेड़ों का वजन बढ़ता है और बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं. एक अच्छी देसी भेड़ हजारों रुपये में बिक जाती है. हर छह महीने में कुछ भेड़ों की बिक्री  होने से सालभर आमदनी बनी रहती है. यही वजह है कि भेड़पालन अब सिर्फ सहायक काम नहीं, बल्कि किसानों के लिए पूरा व्यवसाय बनता जा रहा है. कुल मिलाकर, भेड़पालन उन किसानों के लिए बेहतरीन विकल्प है, जो कम खर्च में स्थायी आमदनी चाहते हैं. सही नस्ल, नियमित देखभाल और थोड़ी मेहनत से यह धंधा घर बैठे रोजगार और अच्छी कमाई का जरिया बन सकता है. भेड़पालन अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था  को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है.

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