खुरपका-मुंहपका से बचाव के लिए 15 फरवरी तक 5.22 लाख पशुओं का टीकाकरण, आप भी लगवाएं वैक्सीन

सर्दियों में पशुओं को खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियों से बचाने के लिए जनवरी 2026 से बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू हो रहा है. इस दौरान गाय, भैंस और बकरियों को टीका लगाया जाएगा. मध्य प्रदेश पशुपालन विभाग के अनुसार, टीकाकरण से दूध पर कोई असर नहीं पड़ता और पशु स्वस्थ रहते हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Updated On: 5 Jan, 2026 | 01:59 PM

Madhya Pradesh Animal Husbandry : सर्दी का मौसम आते ही पशुओं में बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. खासकर खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारी दुधारू पशुओं के लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकती है. इसी खतरे को देखते हुए पशुपालकों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है. मध्य प्रदेश पशुपालन विभाग ने 1 जनवरी 2026 से खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव के लिए बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान शुरू किया है. इस अभियान का मकसद गाय, भैंस और बकरियों को इस खतरनाक वायरल बीमारी से सुरक्षित रखना है, ताकि दूध उत्पादन और पशुओं की सेहत दोनों सुरक्षित रह सकें.

1 जनवरी से 15 फरवरी तक चलेगा वैक्सीनेशन अभियान

मध्य प्रदेश के रायगढ़ जिले के ब्यावरा गांव की पशु चिकित्सक सहायक डा. श्रुति सुमन ने बताया कि, भारत सरकार की एनएडीसीपी योजना (NADCP Scheme) के तहत यह टीकाकरण अभियान  15 फरवरी 2026 तक चलाया जाएगा. इस दौरान जिले में गाय, भैंस और बकरियों समेत कुल करीब 5.22 लाख पशुओं को खुरपका-मुंहपका का टीका लगाया जाएगा. यह इस अभियान का 7वां चरण है. इससे पहले जुलाई 2025 में 6वां चरण चलाया गया था. विभाग का लक्ष्य है कि ज्यादा से ज्यादा पशुओं को समय पर टीका लगाकर बीमारी की चेन को तोड़ा जाए.

दूध कम होने का डर सिर्फ भ्रम, टीकाकरण पूरी तरह सुरक्षित

कई पशुपालकों के मन में यह गलतफहमी रहती है कि टीकाकरण कराने से दुधारू पशुओं का दूध कम हो जाता है. इसी डर की वजह से कई लोग अपने पशुओं को टीका नहीं लगवाते. लेकिन पशुपालन विभाग साफ तौर पर कहता है कि टीकाकरण से दूध पर कोई असर नहीं पड़ता. यह टीका केवल पशुओं को बीमारी  से बचाने के लिए होता है. उल्टा, बीमार होने पर दूध ज्यादा घटता है और इलाज में खर्च भी बढ़ता है. इसलिए समय पर टीका लगवाना ही समझदारी है.

4 से 6 माह में पहला टीका, फिर हर 6 महीने जरूरी

खुरपका-मुंहपका एक तेजी से फैलने वाला वायरल रोग है, जो खुर वाले पशुओं को अपनी चपेट में ले लेता है. इससे बचाव का सबसे असरदार तरीका टीकाकरण ही है. विभाग के अनुसार, 4 से 6 महीने की उम्र में पहला टीका लगवाना जरूरी है. इसके बाद हर 6 महीने में बूस्टर डोज देना चाहिए. इस बार खास बात यह है कि घरों में बंधे पशुओं के साथ-साथ लगभग 70 हजार बेसहारा गोवंश को भी टीकाकरण के दायरे में लाया जा रहा है. इससे बीमारी के फैलने  की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी.

समय पर टीका लगवाकर बचाएं पशु और आमदनी

अगर पशुपालक समय रहते अपने पशुओं का टीकाकरण करा लेते हैं, तो वे बड़े नुकसान से बच सकते हैं. पशुपालक नजदीकी पशु अस्पताल जाकर फ्री में टीकाकरण करा सकते हैं. स्वस्थ पशु ही ज्यादा दूध देते हैं और यही पशुपालकों की आमदनी का आधार है. विभाग की अपील है कि सभी पशुपालक आगे आकर अपने गाय, भैंस और बकरियों का टीकाकरण  जरूर कराएं, ताकि खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारी से पशुधन पूरी तरह सुरक्षित रह सके.

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Published: 5 Jan, 2026 | 01:53 PM

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