कम जगह और कम खर्च में करें बकरी पालन, इन 5 नस्लों से किसानों को मिलेगा मोटा मुनाफा!

किसान अब खेती के साथ बकरी पालन से कमाई बढ़ा रहे हैं. सही नस्ल का चुनाव करने पर मांस और दूध दोनों से फायदा मिलता है. सिरोही, जमुनापारी, सानन, बरबरी और ओस्मानाबादी नस्लें खासतौर पर फायदे की हैं. कम जगह, कम खर्च और लगातार मांग के चलते यह काम छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी लाभकारी है.

नोएडा | Updated On: 2 Jan, 2026 | 06:53 PM

Goat Farming: खेती की बढ़ती लागत और अनिश्चित आमदनी के बीच किसान अब ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं, जिनसे जोखिम कम हो और कमाई पक्की रहे. इसी वजह से बकरी पालन तेजी से किसानों की पसंद बनता जा रहा है. कम जगह, कम खर्च और बाजार में लगातार मांग-इन तीन वजहों से बकरी पालन आज मुनाफे का मजबूत बिजनेस बन चुका है. अगर सही नस्ल का चुनाव कर लिया जाए, तो यही काम किसानों के लिए स्थायी आमदनी का जरिया बन सकता है.

खेती के साथ बकरी पालन क्यों बन रहा है फायदे का सौदा

आज के समय में बकरी पालन सिर्फ गांवों तक सीमित नहीं रहा. शहरों में भी बकरी के दूध और मांस की मांग तेजी से बढ़ी है. बकरी पालन  की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे छोटे स्तर से भी शुरू किया जा सकता है. चारे और देखभाल का खर्च गाय-भैंस के मुकाबले कम होता है और बीमारी का खतरा भी अपेक्षाकृत कम रहता है. यही वजह है कि छोटे और सीमांत किसान भी इस बिजनेस को अपनाकर अच्छी कमाई कर रहे हैं.

सही नस्ल का चुनाव ही मुनाफे की असली कुंजी

बकरी पालन में सबसे अहम फैसला होता है नस्ल का चुनाव. हर नस्ल की अपनी खासियत होती है-कोई मांस के लिए अच्छी होती है तो कोई दूध के लिए. कुछ नस्लें ऐसी भी हैं जो दोनों कामों में फायदेमंद साबित  होती हैं. अगर किसान अपने इलाके के मौसम और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर नस्ल चुनें, तो मुनाफा कई गुना बढ़ सकता है.

सिरोही, जमुनापारी और सानन नस्ल क्यों हैं खास

सिरोही नस्ल गर्म इलाकों के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है. यह तेजी से वजन बढ़ाती है और मांस उत्पादन के लिए शानदार है. जमुनापारी नस्ल अपनी ऊंचाई और दूध देने की क्षमता के लिए जानी जाती है. इसे दूध और ब्रीडिंग  दोनों के लिए पाला जाता है. वहीं सानन नस्ल दूध उत्पादन में आगे है और ठंडे क्षेत्रों में इसे डेयरी बकरी के रूप में अपनाया जाता है. सही देखभाल में यह नस्ल अच्छा रिटर्न देती है.

बरबरी और ओस्मानाबादी से भी होगी बढ़िया कमाई

बरबरी नस्ल आकार में छोटी होती है, लेकिन दूध और मांस दोनों के लिहाज से फायदेमंद है. कम चारा और कम जगह में इसका पालन आसान होता है. ओस्मानाबादी नस्ल खास तौर पर मांस उत्पादन के लिए जानी जाती है और गर्म इलाकों में अच्छी तरह ढल जाती है. इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जिससे नुकसान की आशंका कम रहती है.

Published: 2 Jan, 2026 | 07:30 PM

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