हिमाचल प्रदेश में लगातार बारिश और प्राकृतिक आपदा के बीच पशुपालकों के लिए राहत की खबर है. आपदा के कारण पशुओं और गौशालाओं को होने वाले नुकसान पर अब पहले से ज्यादा मुआवजा मिलेगा. सरकार ने पशुधन नुकसान के लिए मिलने वाली सहायता राशि में बढ़ोतरी की है. बड़े दुधारू पशु की मौत होने पर अब पशुपालक को अधिकतम 55 हजार रुपये तक की मदद मिल सकेगी. वहीं, बकरी, भेड़, सूअर और मेमने की मौत पर भी मुआवजे की राशि बढ़ाई गई है.
गौशाला टूटने पर अब मिलेंगे 50 हजार रुपये
बारिश, भूस्खलन और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं के कारण कई बार पशुपालकों की गौशालाओं को भारी नुकसान पहुंचता है. ऐसे समय में पशुओं को सुरक्षित रखना किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है. सरकार ने पशुपालकों की इस परेशानी को देखते हुए गौशाला के नुकसान पर मिलने वाले मुआवजे में बड़ा बदलाव किया है. पहले गौशाला को नुकसान होने पर अधिकतम 10 हजार रुपये तक का मुआवजा मिलता था. अब इसे बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया है. इससे आपदा में गौशाला क्षतिग्रस्त होने वाले पशुपालकों को दोबारा व्यवस्था खड़ी करने में आर्थिक मदद मिलेगी.
बड़े दुधारू पशु की मौत पर 55 हजार की मदद
प्राकृतिक आपदा के दौरान पशुओं की मौत होने से पशुपालकों को सीधा आर्थिक नुकसान होता है. खासकर गाय और भैंस जैसे दुधारू पशु किसान की कमाई का बड़ा जरिया होते हैं. ऐसे पशु की मौत होने पर परिवार की आमदनी पर भी असर पड़ता है. इसी को देखते हुए बड़े दुधारू पशु की हानि पर मिलने वाले मुआवजे को 37,500 रुपये से बढ़ाकर 55,000 रुपये प्रति पशु कर दिया गया है. यानी अब एक बड़े दुधारू पशु के नुकसान पर पशुपालक को पहले की तुलना में 17,500 रुपये ज्यादा सहायता मिलेगी.
✅ पशुपालकों को राहत
📍 हिमाचल प्रदेश pic.twitter.com/Z3xHnoFCjA
— Congress (@INCIndia) September 4, 2026
बकरी, भेड़ और सूअर के नुकसान पर भी बढ़ी राशि
सिर्फ बड़े पशुओं के लिए ही नहीं, छोटे पशुओं के नुकसान पर मिलने वाले मुआवजे में भी बढ़ोतरी की गई है. बकरी, भेड़, सूअर या मेमने की मौत होने पर अब पशुपालक को 9,000 रुपये प्रति पशु तक मुआवजा मिलेगा. पहले इन पशुओं के नुकसान पर सिर्फ 4,000 रुपये प्रति पशु की सहायता मिलती थी. नई व्यवस्था के तहत अब पशुपालकों को 5,000 रुपये अधिक मिलेंगे. इससे छोटे पशु पालने वाले किसानों को भी आपदा के बाद आर्थिक सहारा मिलेगा.
आपदा में पशुपालकों को मिलेगी बड़ी राहत
हिमाचल प्रदेश में बारिश और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान खेती के साथ पशुपालन को भी काफी नुकसान उठाना पड़ता है. पशुओं की मौत और गौशाला के टूटने से किसानों पर अचानक आर्थिक बोझ बढ़ जाता है. ऐसे में मुआवजे की बढ़ी हुई राशि पशुपालकों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है. सरकार के इस फैसले से प्रभावित पशुपालकों को नुकसान की भरपाई करने और पशुपालन का काम दोबारा शुरू करने में मदद मिलेगी. खासकर छोटे और सीमांत पशुपालकों के लिए यह सहायता काफी महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि पशुधन उनके परिवार की आय का अहम हिस्सा होता है.