गर्मी में दुधारू पशुओं की इस तरह करें देखभाल, नहीं घटेगा दूध उत्पादन.. जानें पशु चिकित्सक की सलाह
Dairy Farming: गर्मियों में तेज गर्मी और लू का असर दुधारू पशुओं पर साफ दिखने लगता है, जिससे दूध उत्पादन घट सकता है. ऐसे में सही देखभाल बेहद जरूरी है. ठंडी छांव, साफ पानी, संतुलित आहार और नहलाने जैसे आसान उपाय अपनाकर पशुओं को स्वस्थ रखा जा सकता है और दूध उत्पादन को बेहतर बनाए रखा जा सकता है.
Animal Care: गर्मियों की तेज धूप, गर्म हवा और बढ़ता तापमान सिर्फ इंसानों को ही नहीं, बल्कि दुधारू पशुओं को भी बुरी तरह प्रभावित करता है. कई बार पशुपालक छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका सीधा असर पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन पर दिखने लगता है. गर्मी से पशु सुस्त हो जाते हैं, जिससे चारा कम खाते हैं. ऐसे में दूध उत्पादन कम हो जाता है. ऐसे मौसम में थोड़ी सी समझदारी और सही देखभाल से पशुओं को गर्मी से बचाया जा सकता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, गर्मियों में पशुओं के रहने की जगह, पानी, चारा और नहलाने की व्यवस्था पर खास ध्यान देना बेहद जरूरी है. अगर समय रहते सही उपाय अपनाए जाएं तो पशु स्वस्थ रहते हैं और दूध उत्पादन भी अच्छा बना रहता है.
रहने की जगह ठंडी और हवादार रखें
पशु चिकित्सक घनश्याम के अनुसार, गर्मी के दिनों में सबसे पहले पशुओं के बाड़े पर ध्यान देना जरूरी है. जहां पशु बंधे हों, वह जगह सूखी, साफ और हवादार होनी चाहिए. बंद और गर्म जगह में पशु जल्दी हीट स्ट्रेस का शिकार हो जाते हैं. कोशिश करें कि पशुओं को सीधे धूप में न बांधा जाए. उनके लिए छांव की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए. अगर बाड़े में ज्यादा गर्मी महसूस हो रही हो तो वहां गीले बोरे, गीले पर्दे या टाट टांगे जा सकते हैं. इससे आसपास का तापमान थोड़ा कम हो जाता है और पशुओं को राहत मिलती है. छत पर फूस, घास या सफेद कपड़ा डालने से भी गर्मी कम लगती है. नीचे की जमीन ज्यादा गर्म न हो, इसके लिए बोरी, टाट या सूखी बिछावन जरूर रखें. इससे पशु आराम से बैठते हैं और शरीर में गर्मी कम चढ़ती है.
साफ और ठंडा पानी है सबसे जरूरी
गर्मियों में पशुओं के लिए पानी किसी दवा से कम नहीं होता. कुंवर घनश्याम के अनुसार, दुधारू पशुओं को दिन में कम से कम 3 से 4 बार साफ और ठंडा पानी जरूर देना चाहिए. पानी गंदा, गर्म या कई घंटों से रखा हुआ नहीं होना चाहिए. ऐसा पानी पशुओं में पेट की दिक्कत, कमजोरी और दूध कम होने की वजह बन सकता है. भैंस और ज्यादा दूध देने वाली गायों को पानी की जरूरत और बढ़ जाती है. इसलिए पानी की टंकी या टब हमेशा भरा रखें. अगर संभव हो तो दिन के सबसे गर्म समय में पशुओं के शरीर पर हल्का पानी डालें. इससे उनके शरीर का तापमान कंट्रोल रहता है. खासकर भैंस को दिन में दो से तीन बार नहलाना बहुत फायदेमंद माना जाता है.
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चारे में करें छोटा बदलाव, दूध रहेगा बेहतर
गर्मी के मौसम में पशुओं के खाने का तरीका भी बदलना पड़ता है. इस समय ज्यादा सूखा चारा देने से शरीर में गर्मी बढ़ सकती है. इसलिए सूखे चारे को हल्का पानी छिड़ककर या भिगोकर खिलाना बेहतर रहता है. इसके साथ हरा चारा जरूर शामिल करें, क्योंकि इसमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है और यह शरीर को ठंडक देता है. आहार में गेहूं का चोकर, जौ और एजोला जैसी चीजें शामिल करने से पोषण संतुलित रहता है. दुधारू पशुओं के लिए मिनरल मिक्सचर और नमक भी जरूरी है, ताकि गर्मी में शरीर कमजोर न पड़े. ध्यान रखें कि पशुओं को धूप में खड़ा करके चारा न खिलाएं. सुबह जल्दी या शाम के समय चारा देना ज्यादा अच्छा रहता है. इससे पशु आराम से खाते हैं और पाचन भी सही रहता है.
कमजोर पशुओं की करें अलग देखभाल
गर्मियों में सुबह और शाम पशुओं को नहलाना बहुत लाभकारी होता है. इससे उनके शरीर की गर्मी निकलती है और वे ताजगी महसूस करते हैं. अगर सुविधा हो तो बाड़े में हल्का शावर या स्प्रिंकलर सिस्टम लगाया जा सकता है, जिससे समय-समय पर पानी की फुहार मिलती रहे. चराई के लिए भी समय बदलना जरूरी है. तेज धूप में पशुओं को बाहर भेजने से बचें. उन्हें सुबह जल्दी और शाम ढलने के बाद चराई के लिए भेजना सबसे सही रहता है. छोटे बछड़ों, बूढ़े पशुओं और दूध देने वाली गाय-भैंस पर गर्मी का असर सबसे ज्यादा पड़ता है. इसलिए इनकी देखभाल अलग से करनी चाहिए.
कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, अगर पशु बार-बार हांफ रहा हो, चारा कम खा रहा हो, ज्यादा पानी पी रहा हो या दूध अचानक कम हो जाए, तो यह गर्मी के असर का संकेत हो सकता है. ऐसे में तुरंत देखभाल बढ़ानी चाहिए. गर्मी में पशुओं की सही देखभाल सिर्फ बीमारी से बचाने के लिए ही नहीं, बल्कि दूध उत्पादन बनाए रखने के लिए भी बेहद जरूरी है. थोड़ी सी सावधानी, ठंडी छांव, साफ पानी और संतुलित आहार से पशुपालक अपने पशुओं को पूरी गर्मी स्वस्थ रख सकते हैं. यही छोटी-छोटी बातें आगे चलकर अच्छी कमाई का बड़ा आधार बनती हैं.