India-Seychelles Fisheries Cooperation: भारत और सेशेल्स ने समुद्र से जुड़े कारोबार और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को लेकर सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है. दोनों देशों के बीच 25 अगस्त को नई दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई. इसमें मछली पालन, जलीय कृषि और ब्लू इकोनॉमी को आगे बढ़ाने के साथ-साथ समुद्री संसाधनों के टिकाऊ इस्तेमाल पर चर्चा हुई. बैठक में सेशेल्स के मत्स्य, कृषि और ब्लू इकोनॉमी मंत्री वॉलेस कॉसग्रो ने अपने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया. भारत की ओर से मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी बैठक में शामिल हुए.
मछली पालन से रोजगार और खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा
बैठक में दोनों देशों ने माना कि मछली पालन सिर्फ कारोबार का जरिया नहीं है, बल्कि इससे रोजगार और खाद्य सुरक्षा को भी मजबूती मिलती है. खासकर तटीय और ग्रामीण इलाकों में मछली पालन से बड़ी संख्या में लोगों को आजीविका मिलती है. भारत ने इस दौरान अपने मत्स्य क्षेत्र की प्रगति भी साझा की. देश में मछली उत्पादन बढ़कर करीब 197 लाख टन यानी 19.7 मिलियन टन तक पहुंच गया है. वहीं, समुद्री खाद्य पदार्थों का निर्यात करीब 8.46 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. ऐसे में भारत के अनुभव से सेशेल्स को भी फायदा मिल सकता है.
टूना फिशरीज और मरीन एक्वाकल्चर पर खास ध्यान
दोनों देशों के बीच समुद्र में मछली पालन से जुड़ी तकनीकों को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई. इसमें मरीन एक्वाकल्चर यानी समुद्र में मछली और अन्य जलीय जीवों के पालन, आधुनिक हैचरी और टूना फिशरीज जैसे क्षेत्र शामिल हैं. इसके साथ ही मछलियों के भंडार का आकलन, मछली पकड़ने के बाद उसे सुरक्षित रखने और प्रोसेसिंग की बेहतर तकनीक पर भी मिलकर काम करने की बात हुई. इसका मकसद समुद्री संसाधनों का इस्तेमाल इस तरह करना है कि भविष्य में भी इनका संतुलन बना रहे.
India–Seychelles Bilateral Meeting to Deepen Cooperation in Fisheries and Blue Economy
A high-level delegation led by H.E. Mr. Wallace Cosgrow, Minister for Fisheries, Agriculture and Blue Economy, Seychelles, had a bilateral meeting with the Indian delegation led by Dr.… pic.twitter.com/NPBY1TEP7y
— Department of Fisheries, Min of FAH&D (@FisheriesGoI) August 25, 2026
AI और डिजिटल तकनीक से बदलेगा मछली पालन
मछली पालन के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी. दोनों देश डेटा सिस्टम को बेहतर बनाने, समुद्री गतिविधियों की निगरानी और सर्विलांस व्यवस्था मजबूत करने पर काम कर सकते हैं. इसके अलावा टूना मछली की प्रोसेसिंग, उससे नए उत्पाद तैयार करने और मछली से निकलने वाले कचरे का सही तरीके से इस्तेमाल करने पर भी सहयोग की संभावनाएं देखी गईं. इससे मछली पालन में नुकसान कम करने और कमाई के नए रास्ते बनाने में मदद मिल सकती है.
ट्रेनिंग और रिसर्च पर भी साथ आएंगे दोनों देश
भारत और सेशेल्स के बीच सहयोग सिर्फ तकनीक साझा करने तक नहीं रहेगा. दोनों देश मिलकर वैज्ञानिक रिसर्च, तकनीकी ट्रेनिंग और विशेषज्ञों के अनुभव साझा करने पर भी काम करेंगे. इसके लिए हर साल एक साझा योजना बनाई जाएगी. इसमें दोनों देशों के वैज्ञानिक, रिसर्च करने वाले लोग और तकनीकी विशेषज्ञ एक-दूसरे के संपर्क में रहेंगे. वे एक-दूसरे के यहां जाकर नई तकनीक सीख सकेंगे, काम करने के तरीके समझेंगे और जरूरी ट्रेनिंग भी ले सकेंगे.
MoU से सहयोग को मिलेगी स्थायी दिशा
सेशेल्स ने मछली पालन और जलीय कृषि के क्षेत्र में भारत के साथ द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन यानी MoU करने में रुचि दिखाई है. अगर यह समझौता आगे बढ़ता है, तो दोनों देशों के बीच सहयोग को एक तय ढांचे में काम करने का मौका मिलेगा. इससे अधिकारियों, वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच लगातार बातचीत और संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाना आसान होगा.
हिंद महासागर में बढ़ेगा सहयोग
भारत और सेशेल्स के बीच यह पहल हिंद महासागर क्षेत्र के लिए भी अहम मानी जा रही है. संयुक्त रिसर्च, आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण के जरिए दोनों देश टिकाऊ मछली पालन को बढ़ावा दे सकते हैं. साथ ही समुद्री संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल से ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की उम्मीद है.