Goat Development Scheme: गांव में अगर कोई ऐसा काम हो जिसमें कम लागत, जल्दी बढ़ने वाला कारोबार और सरकारी मदद-तीनों एक साथ मिल जाएं, तो उससे बेहतर मौका क्या हो सकता है. झारखंड में इन दिनों बकरा विकास योजना पशुपालकों के लिए ऐसा ही सुनहरा अवसर बनकर सामने आई है. सरकार इस योजना के तहत 75 फीसदी से 90 फीसदी तक अनुदान दे रही है, जिससे छोटे किसान, महिलाएं, विधवा और दिव्यांग लाभार्थी भी आसानी से बकरी पालन शुरू कर सकते हैं. सही देखभाल और संतुलित आहार के साथ यह योजना कुछ ही सालों में परिवारों की आय को कई गुना तक बढ़ाने का दम रखती है.
10 बकरियों की यूनिट से शुरू होगी कमाई
इस योजना के तहत लाभार्थी को कुल 10 बकरियों की यूनिट दी जाती है, जिसमें 8 मादा और 2 नर बकरे शामिल होते हैं. यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है, क्योंकि बकरियां तेजी से प्रजनन करती हैं और कम समय में संख्या बढ़ जाती है. अगर पहले साल सही देखभाल की जाए, तो 8 मादा बकरियों से 8 से 16 बच्चे आसानी से मिल सकते हैं. दूसरे साल यही संख्या और तेजी से बढ़ती है. कुछ ही समय में पशुपालक के पास 25 से 30 या उससे ज्यादा बकरियां हो सकती हैं, जिन्हें बाजार में अच्छे दाम पर बेचकर शानदार कमाई की जा सकती है. यही वजह है कि इसे गांवों में लखपति योजना के तौर पर भी देखा जा रहा है.
90 फीसदी तक सब्सिडी और पूरा बीमा
इस योजना की सबसे खास बात है इसका भारी अनुदान. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, विधवा और दिव्यांग लाभार्थियों को 90 फीसदी तक सब्सिडी दी जाती है, जबकि अन्य वर्ग के पशुपालकों को 75 फीसदी तक अनुदान मिलता है. इससे शुरुआत का खर्च बहुत कम हो जाता है और छोटे किसान भी आसानी से बकरी पालन शुरू कर पाते हैं. सरकार सभी बकरियों को टैग करके बीमा भी कराती है. साथ ही समय-समय पर मुफ्त टीकाकरण कराया जाता है, जिससे बीमारी और अचानक नुकसान का खतरा कम हो जाता है. इससे पशुपालक बिना डर के अपना यूनिट बढ़ा सकते हैं.
ऐसे करें आवेदन और लें योजना का लाभ
योजना का लाभ लेने के लिए झारखंड का स्थायी निवासी होना जरूरी है. इसमें महिला-पुरुष, बीपीएल-एपीएल परिवार, स्वयं सहायता समूह, विधवा और दिव्यांग सभी आवेदन कर सकते हैं. आवेदन के लिए अपने ब्लॉक के पशु चिकित्सक कार्यालय से फॉर्म लेना होगा. फॉर्म भरते समय आधार कार्ड, बैंक पासबुक, राशन कार्ड और जाति प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेज लगाने होंगे. इसके बाद फॉर्म उसी कार्यालय में जमा करना होगा. विभाग की जांच और अनुमोदन के बाद चयन किया जाता है. योजना की राशि सीधे DBT के जरिए बैंक खाते में आती है, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहती है.
सही देखभाल से तेजी से बढ़ेगी आय
ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि बकरी पालन में सही प्रबंधन सबसे जरूरी है. बकरियों को हरा चारा, सूखा चारा और संतुलित आहार देना चाहिए. साथ ही उन्हें खुले, साफ और हवादार स्थान में रखना बेहतर माना जाता है. समय पर टीकाकरण और बीमारी दिखने पर तुरंत इलाज कराने से मृत्यु दर कम रहती है. बकरी पालन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बाजार में बकरे और बच्चों की मांग हमेशा बनी रहती है. त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में इनके दाम और ज्यादा मिलते हैं. यही वजह है कि झारखंड की यह योजना छोटे किसानों, महिलाओं और ग्रामीण युवाओं के लिए कम खर्च में बड़ा बिजनेस मॉडल बनती जा रही है. अगर सही तरीके से इसे अपनाया जाए, तो सच में कुछ सालों में लखपति बनने का सपना पूरा हो सकता है.