पशुओं का किशमिश कहलाता है महुआ, रोज सिर्फ 100 ग्राम खिलाने से बढ़ सकता है दूध उत्पादन

पशुपालकों के लिए महुआ एक सस्ता और आसानी से उपलब्ध प्राकृतिक आहार माना जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार इसका संतुलित सेवन पशुओं को ऊर्जा देने, स्वास्थ्य सुधारने और दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद कर सकता है. हालांकि, बेहतर परिणाम के लिए इसे सही मात्रा और मौसम के अनुसार ही पशुओं को खिलाना चाहिए.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 2 Aug, 2026 | 11:30 PM

Mahua For Cattle: पशुपालन में दूध उत्पादन बढ़ाने और पशुओं को स्वस्थ रखने के लिए किसान कई तरह के आहार और सप्लीमेंट का उपयोग करते हैं. लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से मिलने वाला महुआ एक ऐसा खाद्य पदार्थ है, जिसे पशुओं के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, महुआ में मौजूद पोषक तत्व पशुओं को ऊर्जा देने, उनकी सेहत सुधारने और दूध उत्पादन को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं. हालांकि, इसका उपयोग हमेशा संतुलित मात्रा में ही किया जाना चाहिए.

महुआ में छिपा है पोषण का खजाना

महुआ में प्राकृतिक शर्करा, विटामिन, खनिज और कई आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं. यही कारण है कि इसे पशुओं के लिए प्राकृतिक  ऊर्जा स्रोत माना जाता है. यह पशुओं की शारीरिक क्षमता को बनाए रखने में मदद करता है और उन्हें अतिरिक्त ताकत प्रदान करता है. विशेष रूप से दुधारू पशुओं के लिए यह एक उपयोगी पूरक आहार साबित हो सकता है.

दूध उत्पादन बढ़ाने में मिल सकती है मदद

पशु चिकित्सक के अनुसार, यदि महुआ को सही मात्रा में पशुओं के आहार में शामिल किया जाए तो इसका सकारात्मक असर दूध उत्पादन  पर देखा जा सकता है. यह पशुओं को अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान करता है, जिससे उनके शरीर की कार्यक्षमता बेहतर होती है. हालांकि, केवल महुआ पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार, स्वच्छ पानी और उचित देखभाल भी जरूरी है. महुआ को पानी में भिगोकर खिलाने से यह आसानी से पच जाता है और इसके पोषक तत्व शरीर में बेहतर तरीके से अवशोषित होते हैं.

पाचन तंत्र को रखता है बेहतर

महुआ का नियंत्रित सेवन पशुओं के पाचन  तंत्र को मजबूत बनाने में भी सहायक माना जाता है. यह भोजन के पाचन को बेहतर बनाता है और पेट से जुड़ी सामान्य समस्याओं को कम करने में मदद कर सकता है. नियमित और सीमित मात्रा में इसका उपयोग पशुओं की भूख बढ़ाने और शरीर को सक्रिय बनाए रखने में भी लाभदायक माना जाता है.

मौसम के अनुसार बरतें सावधानी

विशेषज्ञों का कहना है कि महुआ की तासीर गर्म होती है, इसलिए इसे मौसम को ध्यान  में रखकर ही खिलाना चाहिए. गर्मियों में अधिक मात्रा में सेवन पशुओं के लिए परेशानी का कारण बन सकता है. वहीं सर्दियों में सीमित मात्रा में दिया गया महुआ शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा और गर्माहट प्रदान कर सकता है. इसलिए पशुपालकों को पशु की उम्र, वजन और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार ही इसकी मात्रा तय करनी चाहिए. संतुलित उपयोग से महुआ पशुओं की सेहत और उत्पादन क्षमता दोनों को बेहतर बनाने में सहायक साबित हो सकता है.

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Published: 2 Aug, 2026 | 11:30 PM

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