अप्रैल में अभी कर लें ये तैयारी…गर्मी में भी नहीं घटेगा दूध, हरे चारे से पशुपालकों को होगा बड़ा फायदा
अप्रैल में हरे चारे की समय पर बुआई, संतुलित आहार, मिनरल मिक्सचर और टीकाकरण से पशुओं का दूध उत्पादन गर्मी में भी स्थिर रखा जा सकता है. सही तैयारी से पशु स्वस्थ रहते हैं, दूध का फैट बेहतर होता है और पशुपालकों को बाजार में अच्छी कीमत के साथ ज्यादा मुनाफा मिलता है.
Animal Husbandry: गर्मी शुरू होते ही पशुपालकों की सबसे बड़ी चिंता होती है-दूध कम होना और चारे की कमी. अप्रैल का महीना इसी तैयारी का सही समय माना जाता है. अगर इस समय थोड़ी समझदारी से योजना बना ली जाए, तो मई-जून की तेज गर्मी में भी पशुओं का दूध उत्पादन अच्छा बना रह सकता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, समय पर हरे चारे की बुआई, संतुलित आहार, मिनरल मिक्सचर और टीकाकरण से पशु स्वस्थ रहते हैं और उत्पादन में गिरावट नहीं आती. यही छोटी तैयारी आगे चलकर पशुपालकों को बड़े नुकसान से बचाती है.
अप्रैल का पहला हफ्ता सबसे जरूरी, तुरंत करें हरे चारे की बुआई
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, अप्रैल की शुरुआत होते ही तापमान तेजी से बढ़ने लगता है. ऐसे में आने वाले हफ्तों के लिए हरे चारे की तैयारी अभी से करना बहुत जरूरी है. पशु विशेषज्ञों के अनुसार, मक्का, ज्वार, सूडान घास और सरगम जैसे चारे की बुआई अप्रैल के पहले सप्ताह तक कर देनी चाहिए. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि महीने के आखिर तक खेतों में हरा चारा तैयार होने लगता है. जब बाजार में हरे चारे की कमी होती है, तब अपने खेत का चारा पशुपालकों के लिए राहत बन जाता है. इससे बाहर से महंगा चारा खरीदने की जरूरत कम पड़ती है और लागत भी बचती है. अगर खेत में पहले से नमी बनी हुई है, तो शुरुआती सिंचाई का खर्च भी कम हो सकता है. इसलिए अप्रैल की यह तैयारी गर्मी के पूरे सीजन में फायदा देती है.
हरा चारा बढ़ाएगा दूध, फैट और पशु की ताकत
गर्मी में सूखा चारा ज्यादा खिलाने से पशुओं की भूख कम होती है, जिसका सीधा असर दूध पर पड़ता है. लेकिन अगर हरा चारा पर्याप्त मात्रा में मिलता रहे, तो पशु ज्यादा स्वस्थ रहते हैं. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, हरा चारा पशुओं के पाचन को बेहतर बनाता है और शरीर में पानी की कमी भी नहीं होने देता. इससे दूध उत्पादन गिरने की बजाय स्थिर रहता है. साथ ही दूध में फैट और SNF का स्तर भी बेहतर होता है, जिससे डेयरी या बाजार में अच्छी कीमत मिलती है. ऐसे में हरा चारा सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि दूध बढ़ाने का सबसे सस्ता और असरदार तरीका है. जिन पशुपालकों के पास अपना हरा चारा रहता है, उन्हें गर्मी में कम नुकसान उठाना पड़ता है.
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मिनरल मिक्सचर और संतुलित आहार से मिलेगा डबल फायदा
गर्मी के मौसम में सिर्फ हरा चारा काफी नहीं होता. पशुओं को संतुलित आहार देना भी उतना ही जरूरी है. अगर पशु इस समय हीट में आते हैं, तो उनके खानपान पर खास ध्यान देना चाहिए. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पशुओं को 50 से 100 ग्राम मिनरल मिक्सचर जरूर देना चाहिए. इससे शरीर में जरूरी खनिज तत्वों की कमी पूरी होती है. इसका असर दूध उत्पादन के साथ-साथ प्रजनन क्षमता पर भी अच्छा पड़ता है. जो पशु संतुलित आहार लेते हैं, वे दूसरे पशुओं की तुलना में ज्यादा दूध देते हैं और जल्दी कमजोर नहीं पड़ते. यही वजह है कि पशुपालकों को दाना, भूसा, हरा चारा और मिनरल मिक्सचर का सही संतुलन बनाकर रखना चाहिए.
समय पर टीकाकरण और गर्मी से बचाव भी जरूरी
अप्रैल से ही गर्म हवाएं शुरू हो जाती हैं, इसलिए पशुओं को बीमारियों से बचाना भी बहुत जरूरी है. गर्मी में कई बार पशु सुस्त हो जाते हैं, खाना कम कर देते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, समय पर टीकाकरण कराने से पशु स्वस्थ रहते हैं और उनकी दूध देने की क्षमता पर अच्छा असर पड़ता है. साथ ही पशुओं को छायादार जगह, साफ पानी और दिन में कई बार पानी पिलाने की व्यवस्था करनी चाहिए. अगर पशुपालक अप्रैल में ही चारा, पोषण और स्वास्थ्य की यह तैयारी कर लेते हैं, तो गर्मी के पूरे मौसम में दूध उत्पादन आसानी से संभाला जा सकता है. सीधी बात यह है कि अप्रैल की सही योजना ही गर्मी में मुनाफे की गारंटी है. अभी की गई थोड़ी मेहनत आगे दूध, सेहत और कमाई तीनों को मजबूत बना सकती है.