अप्रैल में पशुपालक जरूर करें ये काम, बढे़गा पशुओं का दूध उत्पादन और मुनाफा, जानें एक्सपर्ट की पूरी योजना

Dairy Farming Tips: अप्रैल के शुरूआती हफ्तों में पशुपालकों के लिए सही योजना और तैयारी बेहद जरूरी है. तापमान बढ़ने के साथ हरे चारे की कमी होने पर दूध उत्पादन घटने लगता है, जिससे आर्थिक नुकसान हो सकता है. विशेषज्ञ डॉ. आयुषी पांडे के अनुसार, किसान अप्रैल के पहले सप्ताह तक मक्का, ज्वार, सूडान घास और सरगम जैसी फसलों की बुवाई कर दें, ताकि अप्रैल के अंतिम सप्ताह तक खेतों में पर्याप्त हरा चारा उपलब्ध हो.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 30 Mar, 2026 | 11:28 AM

Animal Husbandry: मार्च के समाप्त होते ही अप्रैल की शुरुआत होती है और पशुपालक किसानों के लिए यह समय विशेष सावधानी और योजना का मांग करता है. अगर इस समय पशुपालन को वैज्ञानिक तरीके से नहीं संभाला गया, तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार सही समय पर उचित योजना बनाकर पशुपालन को लाभदायक बनाया जा सकता है.

तापमान का प्रभाव और तैयारी की जरूरत

कुंवर घनश्याम के अनुसार , अप्रैल के पहले सप्ताह से तापमान में बढ़ोतरी शुरू हो जाती है. इस समय हरे चारे की कमी होने पर पशुओं का दूध उत्पादन घटने लगता है. इससे न केवल किसानों की आय पर असर पड़ता है, बल्कि पशुओं की सेहत भी प्रभावित होती है. इसलिए अप्रैल की शुरुआत में ही सतर्क रहना और तैयारी करना जरूरी हो जाता है.

समय पर बुवाई और चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने से इस समस्या से बचा जा सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि 28 मार्च को हुई बारिश से खेतों में नमी बनी हुई है, जो फसलों के विकास के लिए पर्याप्त हो सकती है, इसलिए अतिरिक्त सिंचाई की आवश्यकता कम हो जाएगी.

किन फसलों की करें बुवाई

हरे चारे की सही बुवाई से न केवल पशुओं का पोषण बेहतर होता है, बल्कि दूध की गुणवत्ता और उत्पादन भी बढ़ता है.  अप्रैल के पहले सप्ताह तक किसानों को मक्का, ज्वार, सूडान घास और सरगम जैसी फसलों की बुवाई कर देनी चाहिए. इससे अप्रैल के अंतिम सप्ताह तक खेतों में पर्याप्त हरा चारा उपलब्ध होने लगता है. जब किसान का अपना चारा तैयार होता है, तो वे बाजार में चारे की कमी से होने वाले नुकसान से बच जाते हैं.

तैयार चारा मिलने से पशुओं का पोषण बेहतर होता है, जिससे उनकी सेहत सुधरती है और दूध का फैट व SNF (सॉलिड नॉन-फैट) स्तर भी बेहतर होता है. इससे पशुपालक को अधिक कीमत मिलती है और उनका मुनाफा बढ़ता है.

पशुपालकों के लिए जरूरी सलाह

अप्रैल के पहले सप्ताह में अगर पशु हीट में आते हैं, तो उन्हें 50 से 100 ग्राम मिनरल मिक्सचर देना चाहिए. रीवा वेटरनरी कॉलेज की एक्सपर्ट डॉ. आयुषी पांडे के अनुसार, समय पर टीकाकरण कराना भी जरूरी है, ताकि पशु स्वस्थ रहें और उनकी प्रजनन क्षमता पर सकारात्मक असर पड़े. थोड़ी सी योजना और सही समय पर की गई तैयारी से पशुपालक गर्मी के मौसम में भी दूध उत्पादन बनाए रख सकते हैं और बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं.

अप्रैल में पशुपालन के लिए योजना और तैयारी ही सफलता की कुंजी है. सही समय पर हरे चारे की बुवाई, पशुओं का संतुलित आहार और टीकाकरण सुनिश्चित करने से किसान अपने पशुओं का दूध उत्पादन बनाए रख सकते हैं और गर्मी के मौसम में भी मुनाफा कमा सकते हैं.

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