दुनियाभर को पसंद आ रहे भारतीय फल, पंजाब की लीची और हिमाचल की चेरी, प्लम की पहली खेप भेजी गई

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि पंजाब के होशियारपुर स्थित उम्मत एग्री एलाइड कोऑपरेटिव सोसायटी की ताजी लीची पहली बार निर्यात की गई है. हिमाचल की चेरी और प्लम की पहली खेप रवाना की गई है. उत्तराखंड और असम से भी फल निर्यात किया गया है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 2 Jul, 2026 | 08:15 PM

खाड़ी देशों को भारतीय फल खूब पसंद आ रहे हैं. आम के साथ ही लीची, चेरी और प्लम के निर्यात में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. पंजाब की लीची पहली बार ओमान को सप्लाई की गई. जबकि, हिमाचल प्रदेश की चेरी और प्लम की पहली खेप भी ओमान को निर्यात की गई है. खास बात यह है कि सहकार से समृद्धि की दिशा में यह फल एफपीओ और स्वयं सहायता समूहों के जरिए की जा रही खेती से हासिल किए जा रहे हैं. इन समूहों से महिला किसान भी जुड़ी हैं, सामूहिक खेती से महिलाओं भी अच्छी कमाई हो रही है.

पंजाब की लीची पहली बार निर्यात की गई

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को बताया कि पंजाब के होशियारपुर स्थित उम्मत एग्री एलाइड कोऑपरेटिव सोसायटी की ताजी लीची पहली बार ओमान को निर्यात की गई है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत – ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के तहत मिले बाजार अवसरों का लाभ उठाते हुए यह निर्यात किया गया है. उन्होंने कहा कि यह पहल किसानों की आय बढ़ाने, कृषि निर्यात को गति देने और भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने इस उपलब्धि के लिए कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के प्रयासों की भी सराहना की.

भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले महीने उत्तराखंड की प्रसिद्ध देहरादून लीची के पहली बार इटली निर्यात होने का भी स्वागत किया था. उन्होंने कहा था कि इससे भारतीय कृषि उत्पादों के लिए यूरोपीय बाजारों के नए दरवाजे खुलेंगे. उन्होंने कहा देवभूमि की लीची अब इटली की पसंद बन गई है. एपिडा के सहयोग से उत्तराखंड की प्रसिद्ध देहरादून लीची का पहली बार इटली को निर्यात किया गया है. गोयल ने कहा था कि भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है और किसानों को बेहतर आय के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं.

उत्तराखंड और असम की लीची भी विदेशी बाजारों की रौनक बनी

देहरादून की लीची अपनी प्राकृतिक मिठास, आकर्षक लाल रंग, मनमोहक खुशबू और बेहतरीन गूदे के लिए जानी जाती है. यहां रोज सेंटेड, कलकत्तिया और बेदाना जैसी प्रसिद्ध किस्मों की खेती होती है. इससे पहले असम की प्रसिद्ध तेजपुर लीची का पहला निर्यात दुबई भेजा गया था, जिसने पूर्वोत्तर भारत के फल उत्पादकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार के नए अवसर खोले. तेजपुर लीची को वर्ष 2014 में भौगोलिक संकेतक जीआई टैग भी मिला था.

हिमाचल की चेरी और प्लम की पहली खेप ओमान पहुंची

हिमाचल प्रदेश से पहली बार ताजी चेरी और प्लम की खेप सफलतापूर्वक ओमान को निर्यात की गई है. यह प्रदेश के बागवानी क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने 400 किलोग्राम ताजी चेरी तथा 400 किलोग्राम ताजे प्लम की पहली खेप को रवाना किया. विदेशी खरीदारों ने हिमाचल प्रदेश के फलों की उत्कृष्ट गुणवत्ता और स्वाद की सराहना की और उपभोक्ताओं से उत्साहजनक प्रतिक्रियाएं मिल रही है. सरकार बागवानी क्षेत्र को विस्तार प्रदान करने तथा राज्य के उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने को सर्वोच्च प्राथमिकता दे कर रही है.

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