तालाब की मछलियां हो रही हैं सुस्त? कहीं ये व्हाइट स्पॉट तो नहीं है कारण, करें ये उपाय

बिहार मत्स्य निदेशालय ने मछलियों में फैलने वाले व्हाइट स्पॉट रोग के प्रति किसानों को सचेत किया है. प्रोटोजोवन परजीवी से होने वाली इस बीमारी में मछलियों के शरीर पर सफेद धब्बे पड़ जाते हैं. उचित साफ-सफाई, ऑक्सीजन की सही मात्रा और समय पर तकनीकी सलाह लेकर इस जानलेवा संक्रमण से मछलियों को बचाया जा सकता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 24 Jan, 2026 | 09:30 PM

White Spot Disease Fish: बिहार के तालाबों में इन दिनों एक अदृश्य दुश्मन ने दस्तक दी है, जो मछलियों की सेहत और मछुआरों की कमाई, दोनों को चोट पहुंचा रहा है. बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग (मत्स्य निदेशालय) ने इस गंभीर खतरे की पहचान की है, जिसे आम भाषा में व्हाइट स्पॉट रोग या सफेद धब्बे वाली बीमारी कहा जाता है. अगर आप भी मछली पालन से जुड़े हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि जरा सी लापरवाही पूरे तालाब की मछलियों को खत्म कर सकती है.

क्या है यह व्हाइट स्पॉट और कैसे होता है हमला?

व्हाइट स्पॉट रोग कोई सामान्य चोट नहीं, बल्कि एक प्रोटोजोवन परजीवी (Parasite) के संक्रमण से होने  वाली बीमारी है. यह परजीवी इतना सूक्ष्म होता है कि आंखों से दिखाई नहीं देता, लेकिन जब यह मछली के शरीर पर हमला करता है, तो उसके शरीर पर सफेद रंग के छोटे-छोटे दाने या धब्बे उभरने लगते हैं. यह संक्रमण पानी के जरिए तेजी से फैलता है और एक मछली से दूसरी मछली को बीमार कर देता है.

इन लक्षणों को देखते ही हो जाएं सावधान

मछली निदेशालय के विशेषज्ञों के अनुसार, इस बीमारी को पहचानना बहुत सरल है. संक्रमित मछली के पंखों, गलफड़ों (Gills) और पूरी त्वचा पर नमक के दानों जैसे सफेद धब्बे दिखाई देने लगते हैं. बीमार मछली  सुस्त हो जाती है, पानी की सतह पर आकर बार-बार हवा लेने की कोशिश करती है और अक्सर तालाब के किनारों या पत्थरों से अपना शरीर रगड़ती है. अगर मछली खाना छोड़ दे और उसके शरीर की चमक फीकी पड़ने लगे, तो समझ लीजिए कि व्हाइट स्पॉट ने उसे घेर लिया है.

मत्स्य विभाग की सलाह

मत्स्य निदेशालय का कहना है कि पानी की गुणवत्ता में गिरावट और तालाब में जरूरत  से ज्यादा मछलियां होने पर यह रोग तेजी से पनपता है. इससे बचने के लिए तालाब के पानी को समय-समय पर साफ करते रहें और बाहरी गंदगी को पानी में न मिलने दें. मछलियों को डालने से पहले तालाब का उपचार चूने या लाल दवा (पोटैशियम परमैंगनेट) से करना फायदेमंद रहता है. साथ ही, तालाब में ऑक्सीजन की कमी न होने दें, क्योंकि कमजोर मछलियां इस परजीवी का शिकार जल्दी बनती हैं.

संक्रमण होने पर क्या करें पशुपालक?

अगर आपके तालाब में मछलियां बीमार  दिखने लगें, तो घबराएं नहीं बल्कि तुरंत नजदीकी मत्स्य प्रसार अधिकारी या सरकारी मत्स्य अस्पताल से संपर्क करें. शुरुआत में ही विशेषज्ञों की सलाह पर दवाओं का छिड़काव करने से संक्रमण को रोका जा सकता है. बीमार मछलियों को स्वस्थ मछलियों से अलग करने की कोशिश करें और नेट या जाल को इस्तेमाल के बाद अच्छी तरह कीटाणुमुक्त करें. याद रखें, समय पर लिया गया फैसला आपकी पूरी साल की मेहनत को डूबने से बचा सकता है.

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Published: 24 Jan, 2026 | 09:30 PM

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