किंग कोबरा को कच्चा चबा जाती है ये बकरी, जानिए क्यों है दुनिया की सबसे खतरनाक नस्ल

मारखोर पाकिस्तान का राष्ट्रीय पशु है और वहां इसे ताकत, साहस और आजादी का प्रतीक माना जाता है. यहां तक कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के प्रतीक चिन्ह में भी मारखोर को दिखाया गया है. इसके बावजूद अवैध शिकार और आवास खत्म होने के कारण इसकी संख्या तेजी से घट रही है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 16 Jan, 2026 | 10:52 AM

Markhor goat: पहाड़ों में रहने वाले जीवों की अपनी एक अलग ही कहानी होती है. यहां की ठंडी हवाएं, खड़ी चट्टानें और दुर्गम रास्ते सिर्फ मजबूत जानवर ही झेल पाते हैं. ऐसे ही इलाकों में पाई जाने वाली एक बकरी है, जिसका नाम सुनते ही रौंगटे खड़े हो जाते हैं मारखोर. देखने में यह बकरी किसी जंगली जानवर से कम नहीं लगती. घुमावदार बड़े सींग, भारी शरीर और आंखों में अजीब सा आत्मविश्वास… यही वजह है कि इसे कई लोग “शेर सी दिखने वाली बकरी” भी कहते हैं.

मारखोर सिर्फ ताकत के लिए नहीं, बल्कि अपने स्वभाव को लेकर भी खूब चर्चा में रहती है. लोककथाओं में इसे सांपों का दुश्मन बताया जाता है. कहा जाता है कि यह बकरी सांपों को देखते ही हमला कर देती है और उन्हें अपने खुरों या सींगों से मार गिराती है. इसी कारण कई इलाकों में यह मान्यता है कि जहां मारखोर रहती है, वहां सांप ज्यादा दिखाई नहीं देते.

मारखोर नाम का मतलब और उससे जुड़ी कहानियां

मारखोर शब्द फारसी भाषा से आया है. इसका अर्थ होता है “सांप खाने वाला” या “सांप को मारने वाला.” पुराने समय से पहाड़ी इलाकों में यह धारणा चली आ रही है कि मारखोर न सिर्फ सांपों को मारती है, बल्कि कभी-कभी उन्हें चबा भी देती है. हालांकि वैज्ञानिक रूप से यह साबित नहीं हो पाया है कि मारखोर सांपों को अपना भोजन बनाती है, लेकिन इतना जरूर सच है कि यह बेहद आक्रामक तरीके से अपने इलाके की रक्षा करती है.

कई चरवाहों और स्थानीय लोगों का कहना है कि मारखोर जब किसी सांप को देखती है, तो पीछे नहीं हटती. वह अपने मजबूत खुरों से सांप को कुचल देती है या फिर अपने तेज और घुमावदार सींगों से उसे दूर फेंक देती है. इसी व्यवहार ने इसे सांपों का दुश्मन बना दिया है.

पहाड़ों की सबसे ताकतवर बकरी

मारखोर दुनिया की सबसे बड़ी जंगली बकरियों में गिनी जाती है. एक वयस्क नर मारखोर की ऊंचाई करीब छह फीट तक हो सकती है और वजन 100 से 110 किलो तक पहुंच जाता है. इसके सिर पर मौजूद सर्पिल आकार के सींग इसकी सबसे बड़ी पहचान हैं. ये सींग इतने मजबूत होते हैं कि लड़ाई के वक्त यह सामने वाले को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं.

इसके शरीर पर घनी ऊन और गर्दन से पेट तक लटकती लंबी दाढ़ी इसे और भी डरावना रूप देती है. यही वजह है कि इसे दूर से देखने पर यह किसी पहाड़ी शेर जैसा प्रतीत होता है.

कहां पाई जाती है मारखोर

मारखोर मुख्य रूप से मध्य और दक्षिण एशिया के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में पाई जाती है. भारत के जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कुछ हिस्सों, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के दुर्गम पहाड़ों में इसका प्राकृतिक आवास है. यह आमतौर पर 2,000 से लेकर 11,000 फीट की ऊंचाई पर रहती है, जहां सामान्य जानवरों का पहुंचना मुश्किल होता है.

स्वभाव और रहन-सहन

हालांकि मारखोर शाकाहारी होती है और घास, पत्तियां व झाड़ियां खाती है, लेकिन स्वभाव से यह बेहद लड़ाकू होती है. खासतौर पर प्रजनन के मौसम में नर मारखोर आपस में भयंकर लड़ाई करते हैं. सींगों की टक्कर इतनी तेज होती है कि उसकी आवाज दूर तक सुनाई देती है.

आमतौर पर मारखोर छोटे झुंड में रहती है, जिसमें मादाएं और बच्चे होते हैं. लेकिन खास मौसम में इनका झुंड बड़ा भी हो सकता है.

पाकिस्तान का राष्ट्रीय पशु और संरक्षण की जरूरत

मारखोर पाकिस्तान का राष्ट्रीय पशु है और वहां इसे ताकत, साहस और आजादी का प्रतीक माना जाता है. यहां तक कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के प्रतीक चिन्ह में भी मारखोर को दिखाया गया है. इसके बावजूद अवैध शिकार और आवास खत्म होने के कारण इसकी संख्या तेजी से घट रही है.

आज मारखोर को संरक्षित प्रजातियों में रखा गया है. यह बकरी सिर्फ एक जानवर नहीं, बल्कि पहाड़ों की जैव विविधता की अहम कड़ी है. इसकी रक्षा करना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस शेर जैसी बकरी को अपने प्राकृतिक वातावरण में देख सकें.

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