Monsoon Animal Disease: मानसून में 48 घंटे में पशुओं की जान ले लेती है ये बीमारी, जान लें बचाव के तरीके
मानसून के दौरान गलघोंटू बीमारी पशुओं के लिए बड़ा खतरा बन जाती है. यह संक्रमण तेजी से फैलता है और गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. विशेषज्ञ पशुपालकों को समय पर टीकाकरण, साफ-सफाई और पशुओं की नियमित निगरानी की सलाह दे रहे हैं, ताकि बीमारी से बचाव हो सके और पशुधन सुरक्षित रहे.
Monsoon Animal Disease: मानसून की बारिश किसानों के लिए राहत लेकर आती है, लेकिन पशुपालकों के लिए यह मौसम कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है. इन्हीं बीमारियों में गलघोंटू (हेमरेजिक सेप्टीसीमिया) सबसे खतरनाक मानी जाती है. ये बीमारी मुख्य रूप से गाय और भैंसों को प्रभावित करती है और कई बार बहुत कम समय में पशु की मौत का कारण बन सकती है. पशु विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर टीकाकरण और उचित देखभाल से इस बीमारी से होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है.
मानसून में क्यों बढ़ जाता है बीमारी का खतरा?
बारिश शुरू होते ही वातावरण में नमी बढ़ जाती है, जिससे बैक्टीरिया और अन्य रोगजनक जीव तेजी से फैलने लगते हैं. ऐसे मौसम में पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो सकती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. गलघोंटू बीमारी भी इसी तरह तेजी से फैलने वाला जीवाणुजनित रोग है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, मानसून के दौरान पशुपालकों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए. यह बीमारी एक पशु से दूसरे पशु में तेजी से फैल सकती है और यदि समय रहते उपचार न मिले तो 24 से 48 घंटे के भीतर पशु की मौत भी हो सकती है. इसलिए बारिश शुरू होने से पहले ही बचाव के उपाय अपनाना जरूरी है.
क्या हैं गलघोंटू बीमारी के प्रमुख लक्षण?
गलघोंटू से संक्रमित पशुओं में कई स्पष्ट लक्षण दिखाई देते हैं. शुरुआत में पशु को तेज बुखार आता है और उसकी भूख कम हो जाती है. इसके बाद सांस लेने में परेशानी, मुंह और नाक से पानी निकलना तथा गले और गर्दन के आसपास सूजन जैसी समस्याएं दिखाई देती हैं. बीमारी बढ़ने पर पशु अत्यधिक कमजोर और सुस्त हो जाता है. भैंसों में इस रोग का खतरा अपेक्षाकृत अधिक देखा जाता है, हालांकि गाय और बछड़े भी इसकी चपेट में आ सकते हैं. कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले और कुपोषित पशुओं में संक्रमण का जोखिम अधिक रहता है.
टीकाकरण है सबसे प्रभावी बचाव
विशेषज्ञों का मानना है कि गलघोंटू बीमारी से बचाव का सबसे कारगर तरीका समय पर टीकाकरण है. मानसून शुरू होने से पहले गाय और भैंसों को गलघोंटू का टीका लगवाना बेहद जरूरी माना जाता है. टीकाकरण पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और संक्रमण के खतरे को काफी कम कर देता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, प्रत्येक पशुपालक को अपने पशुओं का नियमित टीकाकरण कराना चाहिए. साथ ही किसी भी प्रकार के असामान्य लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए ताकि बीमारी को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित किया जा सके.
साफ-सफाई और सावधानी से टाला जा सकता है नुकसान
टीकाकरण के साथ-साथ पशुशाला की स्वच्छता बनाए रखना भी बेहद जरूरी है. पशुओं के रहने वाले स्थान पर पानी जमा नहीं होने देना चाहिए और उन्हें सूखी तथा हवादार जगह पर रखना चाहिए. चारे और पीने के पानी की साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखना आवश्यक है.
यदि कोई पशु बीमार दिखाई दे तो उसे तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग कर देना चाहिए ताकि संक्रमण फैलने से रोका जा सके. विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता, समय पर टीकाकरण और बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन के जरिए मानसून के दौरान पशुओं को गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सकता है. इससे न केवल पशुओं की जान बचाई जा सकेगी, बल्कि दूध उत्पादन और पशुपालकों की आय पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को भी कम किया जा सकेगा.