अब दूसरे राज्यों के चक्कर खत्म, मध्य प्रदेश में ही मिलेगी हरियाणा नस्ल की गाय

मध्य प्रदेश में पशुपालन करने वाले किसानों के लिए अब अच्छी नस्ल के पशु अपने ही राज्य में उपलब्ध होने की उम्मीद है. सरकार की इस नई पहल में उन्नत नस्ल के मवेशी तैयार करने की तैयारी चल रही है, जिससे पशुपालकों का खर्च कम होगा और डेयरी क्षेत्र को मजबूती मिल सकेगी. इसके साथ-ही पशुपालकों को दुधारू पशु को खरिदने के लिए अन्य राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा.

नोएडा | Published: 15 Feb, 2026 | 08:03 PM

Madhya Pradesh Breed Improvement: पशुपालन करने वाले किसानों के लिए अच्छी नस्ल के पशु हमेशा से सबसे बड़ी जरूरत रहे हैं. अब तक कई पशुपालकों को ज्यादा दूध देने वाली गाय-भैंस खरीदने के लिए दूसरे राज्यों तक जाना पड़ता था, जिससे समय और पैसा दोनों खर्च होते थे. लेकिन अब ये परेशानी कम होने वाली है. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) सरकार ने प्रदेश में ही उन्नत नस्ल के पशु तैयार करने की तैयारी शुरू हो गई है. इसके लिए एक नया सिस्टम बनाया जा रहा है, जिससे पशुपालकों को अपने ही राज्य में बेहतर नस्ल के मवेशी मिल सकेंगे.

बनेगा देश का पहला ब्रीड एसोसिएशन

डेयरी और पशुपालन विभाग मध्य प्रदेश में देश का पहला ब्रीड एसोसिएशन  बनाने की योजना पर काम कर रहा है. इस एसोसिएशन का उद्देश्य अलग-अलग नस्लों के पशुओं को पहचानकर उनकी संख्या बढ़ाना और उन्हें बड़े बाजार से जोड़ना है. मडिया रिपोर्ट के अनुसार, इसमें पशुपालक, पशु चिकित्सक, विभागीय विशेषज्ञ और नस्ल सुधार पर काम  करने वाली संस्थाएं सदस्य बनेंगी. शुरुआत में ऐसे पशुपालकों को शामिल किया जाएगा जिनके पास एक ही नस्ल के कम से कम 20 पशु हैं.

दूसरे राज्यों पर निर्भरता होगी कम

मध्य प्रदेश डेयरी और पशुपालन विभाग के अनुसार, अभी मध्य प्रदेश के पशुपालकों को अच्छी नस्ल के पशु खरीदने  के लिए कई राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है. उदाहरण के तौर पर, हरियाणा (Haryana) से साहिवाल गाय और मुर्रा भैंस, गुजरात से गिर नस्ल की गाय, उत्तर प्रदेश से भदावरी भैंस और राजस्थान से थारपारकर नस्ल के पशु लाए जाते हैं. इन पशुओं की खासियत उनकी ज्यादा दूध देने की क्षमता और बेहतर मानी जाती है. लेकिन दूसरे राज्यों से पशु लाने में परिवहन और देखभाल पर अतिरिक्त खर्च होता है. नए सिस्टम से यह खर्च कम होने की उम्मीद है.

जर्म प्लाज्म से तैयार होंगी उन्नत नस्लें

ब्रीड एसोसिएशन (Breed Association) पशुओं की नस्ल की पहचान करने के बाद जर्म प्लाज्म तैयार करेगा. जर्म प्लाज्म में पशु के वीर्य, भ्रूण और अंडाणु जैसे तत्व शामिल होते हैं, जिनसे उसकी नस्ल और उत्पादन क्षमता  आगे की पीढ़ियों तक पहुंचती है. इस प्रक्रिया के जरिए अच्छी नस्ल के पशु तैयार किए जाएंगे. इससे डेयरी क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने और पशुपालकों की आय में सुधार करने में मदद मिल सकती है.

प्रदेश में बड़ी पशुधन संख्या

मध्य प्रदेश में पशुधन की संख्या भी काफी बड़ी है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यहां लगभग 1.57 करोड़ गाय, 1.02 करोड़ भैंसें और करीब 1.9 करोड़ बकरियां मौजूद हैं. इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए नस्ल सुधार का यह प्रयास पशुपालन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर प्रदेश में ही अच्छी नस्ल के पशु तैयार होने लगेंगे, तो पशुपालकों को दूर-दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे उनका खर्च बचेगा और पशुपालन को बढ़ावा मिलेगा. ऐसे में ब्रीड एसोसिएशन की ये पहल पशुपालन क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है. इससे न केवल बेहतर नस्ल के पशु आसानी से उपलब्ध होंगे, बल्कि डेयरी उद्योग  को भी मजबूती मिलेगी और किसानों-पशुपालकों की आय बढ़ाने का रास्ता आसान होगा.

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