कम खर्च में पौष्टिक हरा चारा चाहिए तो लोबिया अपनाएं, पशुओं की सेहत और खेत दोनों रहेंगे शानदार

पशुपालन में अच्छा चारा सबसे जरूरी होता है और लोबिया इस जरूरत को शानदार तरीके से पूरा करता है. यह प्रोटीन से भरपूर हरा चारा पशुओं की सेहत, दूध उत्पादन और खेत की उर्वरता तीनों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है. सही समय पर कटाई करने से इसकी गुणवत्ता और पोषण और बेहतर हो जाता है.

नोएडा | Updated On: 6 Apr, 2026 | 08:11 PM

Cowpea Fodder: गांवों में पशुपालन करने वाले किसानों के लिए अच्छा चारा हमेशा सबसे बड़ी जरूरत होता है. अगर चारा पौष्टिक हो, जल्दी तैयार हो जाए और खेत की मिट्टी को भी फायदा पहुंचाए, तो इससे बेहतर क्या हो सकता है. पशुपालन और डेयरी विभाग के अनुसार, ऐसी ही एक शानदार दलहनी फसल है लोबिया, जो आजकल पशुपालकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. प्रोटीन से भरपूर यह हरा चारा पशुओं की सेहत, दूध उत्पादन और खेत की उर्वरता-तीनों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है. खास बात यह है कि इसकी खेती आसान है और सही समय पर कटाई करके किसान बेहतरीन गुणवत्ता का चारा पा सकते हैं.

लोबिया क्यों है पशुओं के लिए खास

पशुपालन और डेयरी विभाग के अनुसार, लोबिया को प्रोटीन युक्त दलहनी हरा चारा  माना जाता है. पशुओं के संतुलित आहार में इसका बड़ा योगदान है. खासकर दुधारू गाय और भैंस के लिए यह काफी उपयोगी माना जाता है. इसमें प्रोटीन, फाइबर और जरूरी पोषक तत्व अच्छी मात्रा में मिलते हैं, जिससे पशु स्वस्थ रहते हैं और दूध देने की क्षमता बेहतर हो सकती है. गर्मी और बरसात के मौसम में जब हरे चारे की कमी होने लगती है, तब लोबिया किसानों के लिए अच्छा विकल्प बनकर सामने आता है. इसे पशु आसानी से खाते हैं और यह पाचन में भी हल्का माना जाता है. यही वजह है कि कई किसान इसे दूसरे हरे चारे के साथ मिलाकर भी खिलाते हैं, ताकि पोषण संतुलित बना रहे.

मिट्टी की ताकत बढ़ाने में भी मददगार

लोबिया सिर्फ पशुओं  के लिए ही नहीं, बल्कि खेत के लिए भी फायदेमंद फसल है. यह दलहनी फसल होने की वजह से मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाने में मदद करती है. आसान भाषा में कहें तो जहां लोबिया की खेती होती है, वहां अगली फसल को भी अच्छा फायदा मिल सकता है. किसानों का मानना है कि लोबिया लगाने से मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है. इससे खेत की सेहत सुधरती है और रासायनिक खाद पर खर्च भी कुछ हद तक कम हो सकता है. यही कारण है कि पशुपालन के साथ खेती  करने वाले किसान इसे दोहरे फायदे वाली फसल मान रहे हैं.

सही समय पर कटाई से मिलेगा बेहतर चारा

लोबिया चारे की सबसे बड़ी खासियत इसकी गुणवत्ता है, लेकिन यह तभी मिलती है जब इसकी कटाई सही समय पर की जाए. कृषि जानकारों के अनुसार, लोबिया की कटाई फूल आने की शुरुआती अवस्था में करना सबसे अच्छा माना जाता है. इसी समय इसमें पोषण सबसे बेहतर  रहता है. अगर कटाई बहुत देर से की जाए तो डंठल सख्त होने लगता है और पशु उसे कम पसंद करते हैं. वहीं जल्दी कटाई करने पर उत्पादन कम मिल सकता है. इसलिए सही समय पर कटाई करना बहुत जरूरी है. इससे चारे की मात्रा भी अच्छी मिलती है और गुणवत्ता भी बनी रहती है.

कम लागत में बढ़िया मुनाफे का मौका

आज के समय में पशुपालक कम लागत में अच्छा चारा तैयार करना चाहते हैं. लोबिया इस जरूरत को काफी हद तक पूरा करती है. इसकी खेती ज्यादा महंगी नहीं होती और कम समय में अच्छी हरी बायोमास दे देती है. अगर किसान इसे मक्का, ज्वार या बाजरा  जैसे चारे के साथ मिलाकर उगाएं, तो और भी अच्छा परिणाम मिल सकता है. इससे पशुओं को ऊर्जा और प्रोटीन दोनों मिलते हैं. पशुपालन विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित चारे से पशुओं की सेहत सुधरती है, दूध उत्पादन बढ़ता है और पशु लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं. यही वजह है कि लोबिया अब सिर्फ एक चारा फसल नहीं, बल्कि पशुपालकों के लिए कम खर्च में ज्यादा फायदा देने वाला स्मार्ट विकल्प बनती जा रही है. सही खेती, समय पर कटाई और संतुलित उपयोग से किसान पशुपालन में बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं.

Published: 6 Apr, 2026 | 11:30 PM

Topics: