पशुओं के लिए वरदान है रसोई का यह मीठा सोडा, बढ़ाएगा दूध और फैट.. बीमारियां भी रहेंगी कोसों दूर
पशुपालन में मुनाफे के लिए मवेशियों का पाचन सही होना बेहद जरूरी है. अक्सर खान-पान में बदलाव से गाय-भैंस को एसिडिटी और अफारा जैसी समस्याएं हो जाती हैं. ऐसे में रसोई में मिलने वाला 'मीठा सोडा' एक जादू की तरह काम करता है. यह न केवल पशुओं की भूख बढ़ाता है, बल्कि दूध उत्पादन और फैट में भी जबरदस्त सुधार लाता है.
Cattle Health: खेती-किसानी और पशुपालन केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि एक जज्बा है. एक पशुपालक के लिए उसकी गाय या भैंस परिवार के सदस्य जैसी होती है. लेकिन जब वही लाली गाय चारा छोड़ दे या उसका पेट फूलने लगे, तो मालिक की रातों की नींद उड़ जाती है. क्या आप जानते हैं कि आपकी रसोई में मौजूद मात्र 5-10 रुपये का मीठा सोडा आपके पशुओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है? आइए जानते हैं कैसे यह छोटी सी चीज आपके डेयरी फॉर्म की किस्मत बदल सकती है.
पेट की एसीडिटी का पक्का इलाज
इंसानों की तरह पशुओं को भी पेट में जलन और गैस (एसिडिटी) होती है. जब हम पशुओं को ज्यादा अनाज, खल या साइलेज खिलाते हैं, तो उनके पेट (रूमेन) में तेजाब बनने लगता है. इसे वैज्ञानिक भाषा में ‘एसिडोसिस’ कहते हैं. मीठा सोडा (सोडियम बाइकार्बोनेट) एक कुदरती एंटासिड का काम करता है. यह पेट के पीएच लेवल को संतुलित करता है, जिससे पशु को खट्टी डकारें और पेट फूलने (अफारा) जैसी तकलीफों से तुरंत राहत मिलती है.
भूख खुलेगी, तो दूध खुद-ब-खुद बढ़ेगा
अक्सर देखा गया है कि पाचन बिगड़ने के कारण पशु चारा कम कर देते हैं. जब पेट अंदर से शांत और स्वस्थ रहता है, तो पशु जमकर जुगाली करता है. अच्छी जुगाली का सीधा मतलब है बेहतर पाचन. जितना बेहतर पाचन होगा, पशु उतना ही चाव से चारा खाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि सही पाचन तंत्र वाले पशुओं में दूध देने की क्षमता 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ जाती है.
दूध में बढ़ाएं फैट का प्रतिशत
डेयरी चलाने वाले किसान की सबसे बड़ी शिकायत दूध में कम फैट की होती है. कम फैट मतलब कम दाम. जब पशु के पेट में अम्लता (Acid) ज्यादा होती है, तो दूध में फैट की मात्रा गिरने लगती है. मीठा सोडा रूमेन के वातावरण को स्थिर रखता है, जिससे दूध की गुणवत्ता में सुधार होता है और फैट का स्तर बढ़ने लगता है. यानी कम खर्चे में ज्यादा मुनाफा!
कब और कितनी मात्रा में दें?
मीठा सोडा देने का सही तरीका और मात्रा जानना बहुत जरूरी है:-
- रोजाना खुराक: एक सामान्य गाय या भैंस को आप रोजाना 30 से 50 ग्राम मीठा सोडा उनके दाने या बांट में मिलाकर दे सकते हैं.
- ज्यादा दूध देने वाले पशु: अगर आपकी गाय 15-20 लीटर दूध देती है, तो इसे 80-100 ग्राम तक दिया जा सकता है.
- आपातकालीन स्थिति: अगर पशु का पेट फूल गया है या वह बहुत बेचैन है, तो 100 ग्राम सोडा गुनगुने पानी या सरसों के तेल में मिलाकर देने से तुरंत आराम मिलता है.
फायदे के लालच में न करें ये गलतियां
मीठा सोडा पशुओं के लिए फायदेमंद जरूर है, लेकिन इसे इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतना भी उतना ही जरूरी है. कहते हैं कि अति हर चीज की बुरी होती है, इसलिए मीठे सोडे को आहार के बजाय एक औषधि या दवा की तरह ही देखें. इसे कभी भी लगातार कई महीनों तक न दें. बीच-बीच में अंतराल देना जरूरी है ताकि पशु के शरीर को इसकी आदत न पड़े. यदि आपका पशु बीमार है या गाभिन है, तो इसे देने से पहले एक बार पशु चिकित्सक की सलाह अवश्य लें. साथ ही, मीठा सोडा देते समय चारे में नमक और खनिज मिश्रण का सही संतुलन बनाए रखना चाहिए ताकि पशु को संपूर्ण पोषण मिले और उसका स्वास्थ्य बिगड़े नहीं.