Today’s Insights : भैंसों को नहलाने का सही समय क्या है? जानिए सही तरीका
भैंसों को नहलाने का सही समय और तरीका उनके स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर सीधा असर डालता है. गर्मियों में लू से बचाव और दूध निकालने से पहले स्वच्छता के लिए नहलाना जरूरी है. सही साबुन का चुनाव और सर्दियों में विशेष सावधानी बरतकर आप अपने पशुओं को बीमारियों से बचा सकते हैं.
Buffalo Bathing Guide : पशुपालन में भैंस को काला सोना कहा जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस सोने की चमक और उसकी दूध देने की क्षमता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि आप उसे नहलाते कैसे हैं? अक्सर हम अपनी सुविधा के अनुसार भैंस को कभी भी नहला देते हैं, पर विज्ञान कहता है कि पशु को नहलाने का भी एक सही वक्त और सलीका होता है. अगर सही तरीके से नहलाया जाए, तो भैंस न केवल बीमारियों से बची रहती है, बल्कि वह खुशी-खुशी ज्यादा दूध भी देती है. आइए जानते हैं, पशुपालकों के लिए नहलाने का वो सीक्रेट फॉर्मूला जो आपके डेयरी के मुनाफे को बढ़ा सकता है.
मौसम का मिजाज देखकर उठाएं बाल्टी
भैंस की त्वचा काली और मोटी होती है, इसलिए उसे गर्मी ज्यादा लगती है. गर्मियों के दिनों में दोपहर की तपिश से बचाने के लिए दिन में 2 से 3 बार नहलाना सबसे अच्छा रहता है. इससे पशु का हीट स्ट्रेस (गर्मी का तनाव) कम होता है और वह चारा अच्छे से खाता है. वहीं, सर्दियों में गलती से भी भैंस को सुबह-सुबह ठंडे पानी से न नहलाएं. ठंड के मौसम में तभी नहलाएं जब बहुत जरूरी हो और हो सके तो गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें. याद रखें, सर्दियों में नहलाने के बाद पशु को तुरंत धूप में बांधना या हवा से बचाना बहुत जरूरी है, वरना उसे निमोनिया हो सकता है.
दूध निकालने से पहले नहलाने के फायदे
क्या आप दूध निकालने से ठीक पहले अपनी भैंस को नहलाते हैं? अगर नहीं, तो आज से ही शुरू कर दें. दूध निकालने से पहले नहलाने से भैंस शांत और सुस्त के बजाय चुस्त हो जाती है. सबसे जरूरी बात यह है कि इससे भैंस के थन और शरीर की गंदगी साफ हो जाती है, जिससे दूध में कीटाणु नहीं जाते और दूध लंबे समय तक खराब नहीं होता. थनों को हल्के गुनगुने पानी से धोने से पशु को मैस्टाइटिस (थनैला) जैसी खतरनाक बीमारी होने का खतरा भी काफी कम हो जाता है.
इंसान वाला साबुन? बिल्कुल नहीं
अक्सर हम घर में बचा हुआ पुराना साबुन या कपड़े धोने वाला साबुन भैंस पर रगड़ देते हैं, जो कि बिल्कुल गलत है. इंसानों के साबुन में ऐसे केमिकल होते हैं जो भैंस की सख्त दिखने वाली लेकिन संवेदनशील खाल को नुकसान पहुंचा सकते हैं. पशुओं के लिए बने खास साबुन का ही इस्तेमाल करें. ये साबुन न केवल खाल को साफ रखते हैं, बल्कि जुएं और चिचड़ी जैसे परजीवियों को भी दूर रखते हैं. नहलाते समय ब्रश से रगड़कर सफाई (ग्रूमिंग) करना भी बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे भैंस के शरीर में खून का दौरा बढ़ता है.
नहलाने के बाद इन बातों का रखें ख्याल
नहलाने का काम खत्म होते ही जिम्मेदारी पूरी नहीं होती. नहलाने के बाद भैंस को किसी साफ और हवादार जगह पर खड़ा करें. सर्दियों में पशु को सूखे तौलिए या बोरे से पोंछना एक अच्छा आइडिया है. एक और जरूरी बात, दूध निकालने के करीब आधा घंटा पहले और बाद में पशु को साफ और ताजा पानी जरूर पिलाएं. इससे दूध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों बेहतर बनी रहती है. पशु की नियमित सफाई उसे मानसिक रूप से भी खुश रखती है, जिसका सीधा असर आपके दूध उत्पादन पर पड़ता है.