डेयरी बिजनेस में होना है मालामाल? पालें भैंस की ये दो शानदार नस्लें, कम खर्चे में मिलेगा रिकॉर्ड तोड़ दूध!
दूध के कारोबार में सफलता का सबसे बड़ा राज सही पशु का चुनाव है. विशेषज्ञों के अनुसार, मुर्रा और भदावरी जैसी नस्लें छोटे किसानों के लिए सबसे भरोसेमंद विकल्प हैं. इन पशुओं की बनावट, थनों की शुद्धता और व्यवहार को समझकर आप घाटे के जोखिम को खत्म कर सकते हैं और अपनी आमदनी को दोगुना कर सकते हैं.
Murrah Buffalo : खेती-किसानी के साथ अगर पशुपालन सही तरीके से किया जाए, तो यह किसी पक्की सरकारी नौकरी से कम नहीं है. पशुपालन की दुनिया में भैंस को ब्लैक गोल्ड यानी काला सोना कहा जाता है, लेकिन यह सोना तभी चमकता है जब आपकी पसंद सही हो. अक्सर पशुपालक इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि कौन सी भैंस खरीदी जाए जो कम खर्चे में ज्यादा मुनाफा दे. विशेषज्ञों के अनुसार, दो ऐसी खास नस्लें हैं जो आज के दौर में डेयरी बिजनेस की रीढ़ मानी जाती हैं. अगर आप भी दूध का कारोबार शुरू करने या बढ़ाने की सोच रहे हैं, तो इन दो नस्लों और उन्हें चुनने के सही तरीके को समझना बेहद जरूरी है.
दूध के कारोबार की पक्की गारंटी
पशुपालन विशेषज्ञों की मानें तो दूध के कारोबार के लिए मुर्रा और भदावरी भैंस सबसे भरोसेमंद साथी हैं. मुर्रा भैंस को उसकी दूध देने की अद्भुत क्षमता के लिए जाना जाता है. इसकी पहचान इसका गहरा काला रंग और छोटे, मुड़े हुए सींग हैं. इसके दूध की बाजार में बहुत मांग रहती है. वहीं दूसरी ओर, भदावरी भैंस छोटे किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. तांबे जैसे रंग वाली यह भैंस कम चारा खाकर भी अच्छा दूध देती है. सबसे खास बात यह है कि भदावरी के दूध में फैट (मलाई) की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जिससे घी और खोया बनाने वालों को जबरदस्त मुनाफा होता है.
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चेहरा V शेप और आंखें चमकदार
भैंस खरीदते समय सिर्फ उसकी सुंदरता पर न जाएं, बल्कि उसकी बनावट को बारीकी से देखें. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अच्छी भैंस का मुंह हमेशा सामने से देखने पर V आकार का होना चाहिए. उसकी आंखें बिल्कुल साफ और चमकदार हों, जो उसकी अच्छी सेहत की निशानी हैं. गर्दन मजबूत और छाती चौड़ी होनी चाहिए. जब भैंस चले, तो उसकी चाल में फुर्ती होनी चाहिए. अगर पशु सुस्त खड़ा है, तो समझ लीजिए कि वह अंदर से कमजोर या बीमार हो सकता है. एक संतुलित शरीर वाली भैंस ही लंबे समय तक आपका साथ निभाती है.
थनों की बनावट में छिपा है दूध का राज
पशु खरीदते समय सबसे ज्यादा ध्यान उसके आयन यानी थनों पर देना चाहिए. थन चारों तरफ से बराबर होने चाहिए और नीचे की ओर ठीक से लटके हुए दिखने चाहिए. अगर थन ऊंचे–नीचे या असमान हैं, तो भविष्य में दूध निकालते समय आपको और पशु दोनों को परेशानी हो सकती है. थनों के बीच की जगह और उनकी कोमलता यह बताती है कि भैंस दूध देने में कितनी आरामदायक होगी. गलत थनों वाली भैंस खरीदने से न केवल दूध कम मिलता है, बल्कि बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है.
मुनाफे की तीसरी कड़ी
सही नस्ल चुनना तो सिर्फ आधी जीत है, बाकी आधी जीत आपकी देखभाल पर निर्भर करती है. भैंस खरीदने से पहले उसके टीकाकरण (Vaccination) का रिकॉर्ड जरूर चेक करें. देखें कि उसकी नाक से पानी तो नहीं गिर रहा या उसे सांस लेने में कोई तकलीफ तो नहीं है. एक बार घर लाने के बाद उसे समय पर पौष्टिक चारा, साफ पानी और तनावमुक्त माहौल दें. अगर आप इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखते हैं, तो आपकी भैंस न केवल स्वस्थ रहेगी, बल्कि आपके घर में दूध और पैसों की बरकत भी बनी रहेगी.