Poultry Winter Management : चूजों के लिए काल बन सकती है सर्दी! बचाव के लिए अपनाएं ये देसी जुगाड़

सर्दियों के दौरान पोल्ट्री फार्म में चूजों को बचाना एक बड़ी चुनौती है. गिरते तापमान के कारण चूजों की मृत्यु दर बढ़ जाती है, जिससे किसानों को भारी नुकसान होता है. गैस ब्रूडर का सही इस्तेमाल, शेड का वेंटिलेशन और गुनगुना पानी ऐसे कारगर उपाय हैं जो न केवल चूजों की जान बचाते हैं, बल्कि उनके विकास को भी तेज करते हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 17 Jan, 2026 | 01:01 PM

Poultry Winter Management : सर्दियों की ठंडी हवाएं जहां हमें रजाई में दुबकने पर मजबूर कर देती हैं, वहीं पोल्ट्री फार्मिंग से जुड़े किसानों के लिए यह मौसम किसी इम्तिहान से कम नहीं होता. नए चूजे नाजुक होते हैं. उनके छोटे से शरीर में ठंड सहने की ताकत नहीं होती. थोड़ी सी लापरवाही और गिरता तापमान रातों-रात पूरे फार्म को खाली कर सकता है. अक्सर किसान बिजली के बल्बों के भरोसे रहते हैं, लेकिन पावर कट होते ही चूजे एक-दूसरे के ऊपर चढ़कर दम तोड़ देते हैं. अगर आप इस कड़ाके की ठंड में अपने चूजों को मां जैसी गर्माहट देने का इंतजाम कर लें, तो न केवल उनकी जान बचेगी, बल्कि आपका मुनाफा भी दोगुना हो जाएगा. आइए जानते हैं सर्दी के इस मौसम में कैसे रखें अपने चूजों का ख्याल.

बिजली जाए या रहे, चूजे रहेंगे एकदम फिट

सर्दियों में चूजों  की मौत की सबसे बड़ी वजह तापमान में उतार-चढ़ाव है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चूजों को शुरुआती दिनों में 32 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है. यहां गैस ब्रूडर एक लाइफ-सेवर बनकर सामने आता है. बिजली वाले हीटर अक्सर वोल्टेज कम होने या लाइट कटने पर धोखा दे जाते हैं, लेकिन गैस ब्रूडर बिना रुके एक समान गर्मी देता है. यह चूजों को चारों तरफ से घेरकर गर्म रखता है, जिससे उनका विकास तेजी से होता है और ठंड लगने का डर खत्म हो जाता है.

न आए ठंडी हवा, न रुके ताजी हवा

मुर्गी फार्म के शेड  को सर्दियों में चारों तरफ से प्लास्टिक शीट या मोटे तिरपाल से ढंकना बहुत जरूरी है. लेकिन यहां एक बारीक बात समझना जरूरी है-शेड को पूरी तरह सील न करें. अगर ताजी हवा नहीं आएगी, तो अंदर चूजों की बीट से ‘अमोनिया गैस’ बनने लगेगी, जो उनके फेफड़ों को खराब  कर सकती है. इसलिए तिरपाल को इस तरह लगाएं कि ऊपर से थोड़ी जगह खुली रहे ताकि नमी और खराब गैस बाहर निकल सके. यह संतुलन ही चूजों को बीमारियों से बचाता है.

गीलापन है चूजों का सबसे बड़ा दुश्मन

फार्म के फर्श पर बिछाई जाने वाली धान की भूसी या लकड़ी का बुरादा (लिटर) चूजों के लिए गद्दे का काम करता है. सर्दियों में अगर  यह बिछावन गीला हो जाए, तो वह बर्फ जैसा ठंडा हो जाता है. इससे चूजों को निमोनिया होने का खतरा रहता है. कोशिश करें कि बिछावन हमेशा सूखा और भुरभुरा रहे. समय-समय पर इसे ऊपर-नीचे करते रहें और अगर कहीं से गीला दिखे, तो तुरंत बदल दें. सूखी जगह पर बैठने से चूजे खुद को गर्म महसूस करते हैं और तनाव मुक्त रहते हैं.

गुनगुना पानी और तगड़ी डाइट

कड़कड़ाती ठंड में चूजों को शरीर गर्म रखने के लिए ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके दाने में प्रोटीन और विटामिन की मात्रा थोड़ी बढ़ा देनी चाहिए. सबसे जरूरी बात-चूजों को कभी भी बर्फ जैसा ठंडा पानी न दें. उन्हें हल्का गुनगुना पानी पिलाएं. ठंडा पानी पीने से चूजों का शरीर का तापमान गिर जाता है और वे सुस्त होकर मरने लगते हैं. अगर आप उनके खान-पान और पानी के तापमान का ध्यान रखते हैं, तो उनकी इम्युनिटी इतनी मजबूत हो जाएगी कि सर्दी उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी.

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