अब बेकार नहीं जाएगा गाय का गोबर, मछलियां खाएंगी ये खास आहार और गोशालाएं बनेंगी मालामाल

पशुपालन के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव आने वाला है. अब गाय का गोबर सिर्फ खाद नहीं, बल्कि मछलियों का मुख्य भोजन बनेगा. वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक खोजी है जिससे गोबर के इस्तेमाल से मछलियां तेजी से बढ़ेंगी. इस योजना से जहां गोशालाओं की कमाई बढ़ेगी, वहीं मछली पालकों को बहुत सस्ता और बढ़िया चारा मिल सकेगा.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 27 Jan, 2026 | 11:30 PM

Cow Dung Fish Feed : अब तक हमने सुना था कि गाय का गोबर सिर्फ खाद या उपले बनाने के काम आता है, लेकिन अब यह मछलियों का पसंदीदा पकवान बनने जा रहा है. जी हां, पशुपालन विभाग एक ऐसी अनोखी योजना पर काम कर रहा है जिसमें गोशालाओं से निकलने वाला गोबर अब सीधे मछली पालकों के पास जाएगा. वैज्ञानिकों की नई रिसर्च ने यह साबित कर दिया है कि जो गोबर अब तक बेकार समझा जाता था, वह मछलियों की सेहत और वजन सुधारने के लिए किसी सुपरफूड से कम नहीं है. इस पहल से न केवल गोशालाएं आत्मनिर्भर बनेंगी, बल्कि मछली पालन के कारोबार में भी भारी मुनाफा देखने को मिलेगा.

गोबर बनेगा कमाई का जरिया

आमतौर पर गोशालाओं में गोबर  के निपटारे को लेकर बड़ी समस्या रहती थी और इससे कोई खास आमदनी भी नहीं होती थी. लेकिन सरकार की नई योजना के तहत अब एक-एक किलो गोबर का हिसाब रखा जाएगा. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विभाग अब बड़ी कंपनियों और मछली पालन फर्मों के साथ हाथ मिलाने जा रहा है. तय योजना के मुताबिक, गोशालाओं से सीधे गोबर खरीदकर उसे मछली के चारे के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा. इससे गोशालाओं को लाखों रुपये की अतिरिक्त कमाई होगी, जिससे गायों के चारे  और रखरखाव का खर्च आसानी से निकल सकेगा.

गोबर से ऐसे बढ़ेगा मछलियों का वजन

इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (ICAR) के वैज्ञानिकों ने अपने शोध में पाया है कि गाय के गोबर में नाइट्रोजन की भरपूर मात्रा होती है. जब इस गोबर को पानी में डाला जाता है, तो यह पानी के साथ मिलकर प्लैंकटन (Plankton) पैदा करता है. प्लैंकटन वह प्राकृतिक भोजन है जिसे खाकर मछलियां बहुत तेजी से बड़ी होती हैं. बाजार में मिलने वाले महंगे और केमिकल युक्त चारे के मुकाबले यह प्राकृतिक आहार मछलियों के वजन  को कई गुना तेजी से बढ़ाता है, जिससे मछली पालकों की लागत भी कम हो जाती है.

छोटे मछली पालकों को मिलेगा बड़ा सहारा

इस योजना का सबसे खूबसूरत हिस्सा यह है कि यह गरीब और छोटे मछली पालकों के लिए वरदान साबित होगी. अक्सर छोटे किसान महंगा मछली आहार  नहीं खरीद पाते, जिससे उनकी मछलियां कमजोर रह जाती हैं. अब विभाग गोबर से बने इस खास पोषण आहार को गोशालाओं और खाद की दुकानों पर उपलब्ध कराएगा. मात्र कुछ रुपयों में मिलने वाला यह देसी चारा मछली पालन के व्यवसाय को हर घर तक पहुँचाने का काम करेगा. इससे गांव के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे.

एक तीर से दो निशाने

सरकार का मुख्य उद्देश्य गोशालाओं को अपने पैरों पर खड़ा करना है. अभी तक सरकार प्रति गोवंश के लिए एक निश्चित राशि खर्च करती है, लेकिन इस नए मॉडल से गोशालाएं खुद पैसा कमाना शुरू कर देंगी. वहीं दूसरी ओर, मछली पालन उद्योग को एक सस्ता और जैविक विकल्प मिल जाएगा. जब मछलियां गोबर से बना प्राकृतिक आहार  खाएंगी, तो उनकी गुणवत्ता भी बेहतर होगी और बाजार में उनके अच्छे दाम मिलेंगे. यह योजना आने वाले समय में खेती और पशुपालन के मेल का सबसे सफल उदाहरण बनने वाली है.

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Published: 27 Jan, 2026 | 11:30 PM

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