Poultry Disease: सर्दियों की गुलाबी ठंड जहां हमें सुहानी लगती है, वहीं पोल्ट्री फार्म चलाने वाले हमारे किसान भाइयों के लिए यह मौसम किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है. मध्य प्रदेश के सीधी जिले समेत कई इलाकों में इन दिनों मुर्गीपालकों की रातों की नींद उड़ी हुई है. वजह है–मुर्गियों में तेजी से फैलने वाली ईकोलाई और कोली– सेप्टिसीमिया जैसी खतरनाक बीमारियां. कल्पना कीजिए, एक किसान जो दिन-रात एक करके अपने चूजों को पालता है और अचानक एक सुबह उसे शेड में दर्जनों मुर्गियां मरी हुई मिलती हैं. यह सिर्फ पक्षियों की मौत नहीं, बल्कि एक गरीब किसान के सपनों और उसकी मेहनत की कमाई का डूबना है.
कैसे पहचानें कि आपकी मुर्गी मुसीबत में है?
बीमारी को हराने का पहला तरीका है उसे वक्त रहते पहचान लेना. अगर आपके शेड में मुर्गियां सुस्त दिखाई दे रही हैं, उनके पंख खड़े हो गए हैं या उन्होंने दाना-पानी कम कर दिया है, तो समझ लीजिए खतरा दरवाजे पर है. ईकोलाई से पीड़ित मुर्गियों को सांस लेने में तकलीफ होती है और वे खूनी दस्त करने लगती हैं. छोटे चूजों के लिए तो यह बीमारी काल के समान है. अगर मुर्गी की गर्दन लटक जाए और वह कोने में दुबक कर बैठने लगे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं.
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गंदगी है सबसे बड़ी दुश्मन
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञ का मानना है कि यह बीमारी अक्सर दूषित पानी और खराब चारे के जरिए फार्म में घुसती है. सर्दियों में शेड के अंदर नमी बढ़ जाती है, जो बैक्टीरिया के पनपने के लिए सबसे अच्छी जगह है. बचाव का सबसे सरल तरीका है बायो-सिक्योरिट यानी, अपने फार्म को किसी किले की तरह सुरक्षित रखें. बाहर के लोगों को अंदर न आने दें. जो व्यक्ति देखभाल कर रहा है, वह अलग जूते और कपड़े पहने. शेड के दरवाजे पर चूना या कीटाणुनाशक जरूर डालें ताकि पैरों के जरिए बीमारी अंदर न जाए.
शेड का सही रखरखाव
मुर्गी पालन में शेड की बनावट आपके मुनाफे को तय करती है. आपका शेड हमेशा ऊंचाई पर होना चाहिए ताकि बारिश या ओस का पानी अंदर न भरे. आसपास कोई गंदा नाला या दलदल न हो, क्योंकि वहीं से कीटाणु हमला करते हैं. साथ ही, पक्षियों को हमेशा ताजा और साफ पानी दें. अगर चारे में हल्की सी भी फफूंद (Fungus) लगी है, तो उसे तुरंत हटा दें. याद रखें, मुर्गियों की सेहत उनके खान-पान और आपके बाड़े की सफाई पर टिकी है.
नुकसान से बचना है तो टीकाकरण जरूरी
अक्सर किसान खुद ही डॉक्टर बनने की कोशिश करते हैं और दुकान से कोई भी एंटीबायोटिक लाकर मुर्गियों को दे देते हैं. यह तरीका फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकता है. सही समय पर टीकाकरण (Vaccination) और पशु चिकित्सक की सलाह ही आपके फार्म को बचा सकती है. अगर कोई पक्षी मर जाए, तो उसे खुले में फेंकने की गलती कभी न करें. उसे गहरे गड्ढे में दबाएं या जला दें, वरना यह छूत की बीमारी पूरे गांव के पोल्ट्री फार्मों को अपनी चपेट में ले लेगी.