Success Story: उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के एक छोटे से गांव से एक बड़ी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है. बाग सिंह सिकरवार (Bagh Singh Sikarwar ) ने अपनी मेहनत और नई सोच से न सिर्फ खुद की खेती को बदला, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी एक नई राह खोल दी है. फतेहपुर सीकरी ब्लॉक के गांव दौरेठा में रहने वाले बाग सिंह अब गाय के गोबर से केंचुआ खाद (Vermicompost) बनाकर और ऑर्गेनिक बीज तैयार कर अच्छी कमाई कर रहे हैं.
रासायनिक खेती से परेशान किसान, नहीं मिल रहा सही दाम
आज के समय में ज्यादातर किसान रासायनिक खाद और कीटनाशकों का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन इसका नुकसान अब साफ दिखने लगा है. बाग सिंह सिकरवार उर्वरक विभाग से बात करते हुए बताते हैं कि ज्यादा यूरिया, कीटनाशक और रसायन इस्तेमाल करने से फसल की गुणवत्ता खराब हो जाती है. इसी वजह से किसानों को अपनी उपज का सही दाम नहीं मिल पाता. उन्होंने उर्वरक विभाग से बातचीत में कहा कि अगर फसल की गुणवत्ता अच्छी हो और वह निर्यात (एक्सपोर्ट) के लायक बने, तो किसानों की आमदनी अपने आप बढ़ सकती है. हमारे देश के किसान मेहनती हैं, बस उन्हें सही तरीका अपनाने की जरूरत है.
गोबर से बना रहे खाद
बाग सिंह सिकरवार अब गाय के गोबर से वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार कर रहे हैं, जो पूरी तरह जैविक है. इसके साथ ही वे ऑर्गेनिक बीज भी बना रहे हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता बेहतर हो रही है. इस काम से उन्हें अच्छा मुनाफा मिल रहा है और आसपास के किसान भी उनसे सीखकर जैविक खेती की ओर बढ़ रहे हैं. उनका कहना है कि अगर किसान रसायनों की जगह जैविक खाद का इस्तेमाल करें, तो खेती सस्ती भी होगी और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होगी.

जैविक खेती अपनाई, गोबर से बढ़ी पैदावार और कमाई.
जमीन की सेहत सुधरी, पानी भी नहीं रुकता खेत में
बाग सिंह ने अपने खेत में एक ट्रायल पिट भी बनाया है, जिसमें उन्होंने जैविक खाद का इस्तेमाल किया है. उन्होंने बताया कि लगातार कई दिनों की बारिश के बाद भी उनके खेत में पानी जमा नहीं होता, बल्कि जमीन के अंदर चला जाता है. इसके पीछे वजह है जैविक खाद, जो मिट्टी को मुलायम बनाती है और उसमें पानी सोखने की क्षमता बढ़ाती है. वहीं, जिन खेतों में ज्यादा रासायनिक खाद डाली जाती है, वहां जमीन के नीचे एक सख्त परत बन जाती है, जिससे पानी अंदर नहीं जा पाता और खेत में ही जमा हो जाता है. इससे जमीन की उर्वरता भी कम हो जाती है.
जैविक बीज और खाद से बदलेगी खेती की तस्वीर
बाग सिंह सिकरवार का मानना है कि खेती की असली ताकत अच्छे बीज और स्वस्थ मिट्टी में होती है. वे कहते हैं, बीज चाहे जैसा भी हो, वह उगता जरूर है, लेकिन अगर बीज और मिट्टी दोनों अच्छे हों, तो फसल की गुणवत्ता और कीमत दोनों बढ़ जाती है. उनकी यह सोच अब दूसरे किसानों को भी प्रेरित कर रही है. आज के समय में जब खेती की लागत बढ़ रही है और मुनाफा कम हो रहा है, ऐसे में जैविक खेती एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आ रही है.