Dalhan Kharid 2026: किसानों को उनकी फसल का सही दाम दिलाने के लिए सरकार अब बड़े स्तर पर कदम उठा रही है. सरकार ने अहम फैसला लेते हुए बिहार में पहली बार संगठित तरीके से दलहन (दाल) की खरीद शुरू की गई है, वहीं छत्तीसगढ़ में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद को और मजबूत किया गया है. खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार, नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NCCF) और नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NAFED) इस पूरे अभियान में अहम भूमिका निभा रहे हैं. इससे किसानों को सीधा फायदा मिल रहा है और उनकी आय बढ़ने की उम्मीद है.
बिहार में पहली बार शुरू हुई दाल की संगठित खरीद
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार, बिहार में पहली बार मसूर दाल की खरीद को एक संगठित रूप दिया गया है. यह कदम आत्मनिर्भर दलहन मिशन के तहत उठाया गया है, जिससे देश में दालों के उत्पादन और भंडारण को बढ़ावा मिल सके. अब तक राज्य में 100 मीट्रिक टन से ज्यादा मसूर की खरीद हो चुकी है. इसके लिए 16 PACS और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को जोड़ा गया है और 59 किसानों ने इसमें हिस्सा लिया है. सरकार ने 32,000 मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा है. खास बात यह है कि भंडारण के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाए जा रहे हैं, जिससे फसल खराब न हो और किसानों को सही समय पर भुगतान मिल सके.
खरीद की स्थिति (22 अप्रैल 2026 तक)
| राज्य | फसल | लक्ष्य (MT) | खरीदी गई मात्रा (MT) | लाभान्वित किसान |
|---|---|---|---|---|
| बिहार | मसूर | 32,000 | 100.4 | 59 |
| छत्तीसगढ़ (NCCF) | चना | 63,325 | 9,032 | 6,129 |
| छत्तीसगढ़ (NCCF) | मसूर | 5,360 | 7.98 | 28 |
| छत्तीसगढ़ (NAFED) | चना | – | 3,850 | 2,645 |
| छत्तीसगढ़ (NAFED) | मसूर | – | 109 | 281 |
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार
छत्तीसगढ़ में MSP खरीद का दायरा तेजी से बढ़ा
मंत्रालय के अनुसार, छत्तीसगढ़ में पहले से ही MSP पर खरीद हो रही थी, लेकिन अब इसे और बड़े स्तर पर बढ़ाया गया है. यहां 85 PACS केंद्रों के जरिए चना और मसूर की खरीद की जा रही है. कई जिलों में यह काम चल रहा है और जल्द ही इसे और जिलों तक बढ़ाया जाएगा. डिजिटल प्लेटफॉर्म ई-संयुक्ति के जरिए किसानों को जोड़ा जा रहा है, जिससे प्रक्रिया आसान और पारदर्शी बनी है. सरकार के प्रयासों से यहां खरीद का आंकड़ा 12,000 मीट्रिक टन के पार पहुंच चुका है, जो एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है.
डिजिटल प्लेटफॉर्म और सहकारी समितियों से बढ़ी भागीदारी
इस बार सबसे बड़ा बदलाव यह है कि खरीद प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है. किसान अब ऑनलाइन पंजीकरण कर रहे हैं और सीधे अपनी फसल बेच पा रहे हैं. सहकारी समितियों और PACS नेटवर्क के जरिए गांव-गांव तक पहुंच बनाई जा रही है, जिससे ज्यादा से ज्यादा किसान जुड़ रहे हैं. इसके अलावा जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं, जिससे किसानों को MSP और सरकारी योजनाओं की जानकारी मिल रही है. इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि किसानों का भरोसा भी मजबूत हुआ है.
किसानों को सीधा फायदा, आय बढ़ने की उम्मीद
इन पहलों का सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिल रहा है. MSP पर खरीद होने से उन्हें बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम झेलना पड़ता है और फसल का तय दाम मिल जाता है. चना और मसूर जैसी फसलों की खरीद बढ़ने से दलहन उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे देश आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा. सरकार का कहना है कि आगे भी इस तरह की योजनाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इसका लाभ उठा सकें और उनकी आय में सुधार हो.