बंजर जमीन को उपजाऊ बनाकर चर्चा में आए किसान धनराज, अब खेत में लहलहा रही सरसों और जीरा की फसल
Dhaincha Convert Barren Land in to Fertile: किसान धनराज ने कहा कि मिट्टी सुधार के लिए रासायनिक खादों का इस्तेमाल किया, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर उन्होंने प्राकृतिक व जैविक पद्धति अपनाई. अब उनकी उस बंजर जमीन पर सरसों और जीरा की फसल लहलहा रही है.
Rajasthan Success Farmer Dhanraj: बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए राज्य और केंद्र सरकार कई तरह की योजनाएं चला रही हैं. देश की लगभग 960 लाख हेक्टेयर जमीन खराब है, जिसकी मिट्टी सुधार के लिए केंद्रीय स्तर पर काम किया जा रहा है. इस बीच राजस्थान की बंजर, सूखी जमीन को अनुभवी किसान धनराज राजपुरोहित उपजाऊ बनाकर स्थानीय किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं. अब उस जमीन पर सरसों की फसल लहलहा रही है. उन्होंने बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने का तरीका किसानों को बताया है.
राजस्थान के थार रेगिस्तान इलाके में बसा सांचौर जिले के अनखोल गांव के किसान सूखा और मिट्टी उपजाऊ नहीं होने के संकट से जूझ रहे हैं. यहां के अनुभवी किसान धनराज राजपुरोहित ने बंजर पड़ी जमीन को उपजाऊ बनाकर नई मिसाल पेश की है. धनराज ने सूखी और खराब जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए कई बार हरी खाद यानी ढेंचा की फसल उगाई और उसे कल्टीवेटर से काटकर मिट्टी में मिला दिया, जिससे वह खाद बनकर मिट्टी में सुधार करने लगी. कई बार की प्रक्रिया के बाद मिट्टी उपजाऊ हो गई है.
मिट्टी में सुधार के लिए हरी खाद का किया इस्तेमाल
धनराज ने कहा कि खेत में नमी बनाए रखने और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए ढैंचा (हरी खाद) की बुवाई कर मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा को बढ़ाया. इसके बाद अब उसी जमीन पर जीरा और सरसों की खेती शुरू की, जो अब लहलहा रही है. किसान ने बताया कि लंबे समय से यह खेत कम पानी और कमजोर मिट्टी के कारण खेती योग्य नहीं रह गया था.
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रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से नहीं मिला रिजल्ट
किसान धनराज ने कहा कि मिट्टी सुधार के लिए रासायनिक खादों का इस्तेमाल किया, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर उन्होंने प्राकृतिक व जैविक पद्धति अपनाई. उन्होंने कहा कि ढैंचा की बुवाई करने के बाद उसे खेत में ही पलट दिया, जिससे मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ी और पानी रोकने की क्षमता में सुधार हुआ. उन्होंने कहा कि हरी खाद के प्रयोग से खेत की मिट्टी नरम और उपजाऊ बनी.
अब बंजर जमीन पर लहालहा रही सरसों और जीरा की फसल
किसान ने कहा कि मिट्टी ठीक होने के बाद उन्होंने जीरा और सरसों की बुवाई की, जिनकी फसल तेजी से बढ़ रही है. इस तकनीक से न केवल लागत घटी है, बल्कि उत्पादन भी बेहतर होने की उम्मीद है. ढैंचा जैसी हरी खाद भूमि की उर्वरता बढ़ाने का सशक्त माध्यम है. इससे मिट्टी की सेहत सुधरती है और रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होती है.
अखनोल गांव के किसान भंवरलाल, राजाराम और धनराज.
धनराज से मिट्टी सुधार तकनीक सीखने पहुंच रहे किसान
किसान ने कहा कि क्षेत्र के अन्य किसान भी इस सफलता से प्रेरित होकर जैविक खेती अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. कृषि विभाग की ओर से किसानों को ढैंचा के मुफ्त बीज उपलब्ध कराए जाते हैं. किसान उनसे मिट्टी सुधार और खराब जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए ढेंचा की बुवाई का तरीका सीखने पहुंच रहे हैं. किसान धनराज का नवाचार साबित करता है कि सही तकनीक और मेहनत से बंजर जमीन को भी हरियाली में बदला जा सकता है.