पारंपरिक डेयरी से बनाई करोड़ों की राह.. 20 भैंसों से रोज 200 किलो दूध, नई सोच से बदली किस्मत

Success Story: हरियाणा के एक किसान ने पारंपरिक डेयरी को आधुनिक व्यवसाय में बदलकर नई मिसाल पेश की है. 20 मुर्रा भैंसों से रोजाना 200 किलो दूध उत्पादन कर वे बेहतर कमाई कर रहे हैं. नई तकनीक, सही नस्ल और परिवार के सहयोग से डेयरी को मुनाफे का मजबूत जरिया बना लिया है.

नोएडा | Published: 24 Apr, 2026 | 12:42 PM

Haryana News: हरियाणा के गोहाना से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जो दिखाती है कि अगर पारंपरिक काम को नई सोच और तकनीक से जोड़ा जाए तो बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है. सुरेंद्र ने अपने परिवार की 50 साल पुरानी डेयरी परंपरा को सिर्फ जारी नहीं रखा, बल्कि उसे आधुनिक और व्यवस्थित व्यवसाय में बदल दिया. पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अनुसार, यह मॉडल आज के किसानों के लिए एक बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे डेयरी को लाभदायक बनाया जा सकता है.

परंपरा से आधुनिकता तक का सफर

हरियाणा के सोनीपत जिले के गोहाना शहर के रहने वाले सुरेंद्र (Surendra) का परिवार पिछले कई दशकों से डेयरी व्यवसाय  से जुड़ा रहा है. लेकिन उन्होंने इस पारंपरिक काम को उसी तरीके से जारी रखने के बजाय इसमें बदलाव करने का फैसला लिया. उन्होंने डेयरी को एक संगठित और प्रोफेशनल तरीके से चलाना शुरू किया, जिसमें साफ-सफाई, बेहतर प्रबंधन और गुणवत्ता पर खास ध्यान दिया गया. उनकी यही सोच आज उन्हें अन्य पशुपालकों से अलग बनाती है और उनकी सफलता की नींव भी यही है.

उन्नत नस्ल और गुणवत्ता से बढ़ा उत्पादन

आज सुरेंद्र के पास 20 उच्च नस्ल की मुर्रा भैंसें  हैं, जो रोजाना 200 किलो से ज्यादा दूध देती हैं. मुर्रा नस्ल अपनी उच्च दूध क्षमता के लिए जानी जाती है. वे अपने दूध को सीधे घर से ही बेचते हैं, जिससे ग्राहकों को शुद्ध और ताजा दूध मिलता है और उन्हें बेहतर कीमत भी मिलती है. लगभग 85 रुपये प्रति किलो की दर से दूध बेचकर वे अच्छी कमाई कर रहे हैं. हाल ही में उन्होंने एक उच्च गुणवत्ता वाली मुर्रा भैंस में करीब 11 लाख रुपये का निवेश किया है, जो उनके भविष्य की योजना और नस्ल सुधार के प्रति उनकी गंभीरता को दिखाता है.

संस्थागत सहयोग से मिली नई दिशा

सुरेंद्र की इस सफलता में केंद्रीय पशुधन पंजीकरण योजना (CHRS), रोहतक का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. इस योजना के तहत उन्हें पशुओं की नस्ल की सही पहचान, दूध और फैट  की रिकॉर्डिंग और वैज्ञानिक प्रजनन की जानकारी दी गई. इससे उन्हें अपने पशुओं की गुणवत्ता सुधारने और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली. पशुपालन और डेयरी विभाग का मानना है कि इस तरह का संस्थागत सहयोग किसानों को नई दिशा देता है और उन्हें आधुनिक खेती की ओर प्रेरित करता है.

नई पीढ़ी और भविष्य की तैयारी

इस डेयरी व्यवसाय में अब सुरेंद्र के बच्चे भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं. वे नई तकनीक  और नए विचारों के साथ इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं. नई पीढ़ी के जुड़ने से व्यवसाय में नई ऊर्जा आई है और इसे आगे बढ़ाने की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं सुरेंद्र का मानना है कि जब परंपरा, ज्ञान और जुनून एक साथ मिलते हैं, तो सफलता तय हो जाती है. उनकी यह सोच आज उन्हें एक सफल पशुपालक के रूप में पहचान दिला रही है.

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