मध्य प्रदेश की रीना और निदा का कमाल, ड्रोन से खेती बदली और कमाई लाखों के पार पहुंचाई
Drone Farming: मध्य प्रदेश की रीना चंदेल और निदा अख्तर ने ड्रोन तकनीक से खेती में नई पहचान बनाई है. नमो ड्रोन दीदी योजना से जुड़कर वे किसानों की मदद कर रही हैं और अच्छी कमाई भी कर रही हैं. उनकी यह सफलता कहानी दिखाती है कि गांव की महिलाएं अब तकनीक के जरिए आत्मनिर्भर बनकर आगे बढ़ रही हैं.
Success Story: गांव की साधारण महिलाएं अब नई तकनीक के सहारे असाधारण काम कर रही हैं. मध्य प्रदेश की रीना चंदेल और निदा अख्तर इसका जीता-जागता उदाहरण हैं, जिन्होंने ड्रोन से खेती में नई पहचान बनाई है. नमो ड्रोन दीदी योजना से जुड़कर ये महिलाएं न सिर्फ किसानों की मदद कर रही हैं, बल्कि खुद भी अच्छी कमाई कर रही हैं. उनकी यह सफलता कहानी दिखाती है कि सही मौका और मेहनत से महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं और दूसरों के लिए प्रेरणा बनती हैं.
ड्रोन से बदली जिंदगी, बढ़ी आमदनी
नमो ड्रोन दीदी योजना (Namo Drone Didi Scheme) ने गांव की महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है. आगर-मालवा की रीना चंदेल इस योजना से जुड़कर अब ड्रोन के जरिए खेतों में नैनो यूरिया और कीटनाशकों का छिड़काव करती हैं. पहले जहां उन्हें सीमित आय होती थी, वहीं अब एक कृषि सीजन में वे 40 हजार रुपये से ज्यादा कमा रही हैं. सालभर में उनकी कमाई करीब 1 लाख रुपये तक पहुंच जाती है. ड्रोन से काम करने में समय भी कम लगता है और काम ज्यादा होता है, जिससे उनकी आमदनी लगातार बढ़ रही है.
कुछ ही मिनटों में पूरा होता है काम
उर्वरक विभाग के अनुसार, रीना ने कहा कि ड्रोन से एक हेक्टेयर खेत में सिर्फ 5 से 10 मिनट में स्प्रे हो जाता है. इससे किसानों का समय बचता है और दवा का सही मात्रा में उपयोग होता है. वे किसानों को नैनो तकनीक के फायदे भी समझा रही हैं, जिससे खेती में लागत कम हो रही है और उत्पादन बढ़ रहा है. रीना ने इंदौर और भोपाल से ट्रेनिंग लेकर ड्रोन उड़ाना सीखा और अब वे दूसरे किसानों के लिए मिसाल बन चुकी हैं.
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निधा बनीं किसानों की सलाहकार
ग्वालियर की निदा अख्तर (Nidha Akhtar) भी ड्रोन दीदी के रूप में जानी जा रही हैं. वे गांव-गांव जाकर किसानों के खेतों में ड्रोन से छिड़काव कर रही हैं और उन्हें नई तकनीक के बारे में जागरूक कर रही हैं. निदा ने अब तक 325 किसानों के 2250 एकड़ से ज्यादा खेतों में काम किया है. इससे उन्हें एक साल से भी कम समय में करीब 3 लाख रुपये की शुद्ध आय हुई है. उन्हें इफको द्वारा मुफ्त प्रशिक्षण मिला और बाद में ड्रोन, इलेक्ट्रिक गाड़ी और अन्य उपकरण भी दिए गए, जिससे उनका काम और आसान हो गया.
महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा
रीना चंदेल (Reena Chandel) और निदा अख्तर की कहानी आज कई ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है. ये दोनों महिलाएं साबित कर रही हैं कि अगर सही मौका और प्रशिक्षण मिले, तो महिलाएं किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं. इनकी सफलता से यह भी साफ है कि तकनीक का सही उपयोग खेती को आसान और लाभदायक बना सकता है. अब गांव की महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार और समाज में मजबूत भूमिका निभा रही हैं. ये कहानी सिर्फ दो महिलाओं की नहीं, बल्कि उस बदलते भारत की है जहां गांव की महिलाएं अब तकनीक के साथ नई उड़ान भर रही हैं.