बिहार में भारी बारिश के बाद बाढ़ का संकट गहरा गया है और 10 जिलों में 16 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं, जबकि गंगा समेत कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. गंगा के बढ़ते जलस्तर से मुंगेर की 37 पंचायतों के 300 गांव प्रभावित हैं. 27 सामुदायिक रसोई शुरू की गईं. केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने राहत कार्यों की समीक्षा कर बोट एंबुलेंस और पशुओं, मछली पालकों को राहत देने के निर्देश दिए हैं. बता दें कि कई मछली पालकों के तालाबों में भी बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे भारी नुकसान की आशंका जताई गई है.
300 गांवों में बाढ़ का पानी घुसा, 16 लाख लोग प्रभावित
बिहार में ज्यादातर नदियां उफान पर हैं, जिससे 16 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं. मुंगेर जिले में गंगा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है. जिले की 37 पंचायतों के करीब 300 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं, जिससे लगभग 3.05 लाख की आबादी प्रभावित हुई है. स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिए हैं. जबकि, पटना, समस्तीपुर, भोजपुर समेत 10 से ज्यादा जिले बाढ़ से प्रभावित चल रहे हैं.
केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने बाढ़ की स्थिति तथा राहत कार्यों की समीक्षा की. ललन सिंह ने कहा कि बिहार की भौगोलिक स्थिति के कारण कम वर्षा होने के बावजूद कई बार बाढ़ का खतरा बना रहता है. उन्होंने कहा कि गंगा के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में अधिक बारिश होने से नदी का जलस्तर बढ़ जाता है. वहीं, नेपाल में भारी बारिश होने पर कोसी, गंडक और गंगा समेत अन्य नदियों के जलस्तर में भी तेजी से वृद्धि हो सकती है.
प्रभावित लोगों को भोजन के लिए 27 सामुदायिक रसोई शुरू
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मुंगेर जिला प्रशासन बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए तैयार है. प्रभावित लोगों के लिए 27 सामुदायिक रसोई शुरू की गई हैं. बाढ़ के कारण विस्थापित लोगों के ठहरने की भी व्यवस्था की गई है. उन्होंने जिलाधिकारी को सामुदायिक रसोई में भोजन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों को पौष्टिक और सुपाच्य भोजन उपलब्ध कराया जाए. भोजन में चावल, दाल और हरी सब्जियों को शामिल करने पर जोर दिया गया. उन्होंने राहत शिविरों में रह रहे लोगों की आवश्यकताओं के अनुरूप भोजन और अन्य सुविधाएं सुनिश्चित करने को कहा.

केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन मंत्री ललन सिंह ने बाढ़ राहत बचाव कार्यों की समीक्षा की.
तालाबों से निकलकर बाढ़ के पानी में गई मछलियां, भारी नुकसान
केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने कहा कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को भी प्रभावी बनाए रखने की जरूरत है. उन्होंने बताया कि जरूरत वाले क्षेत्रों तक दवाएं और चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के लिए बोट एंबुलेंस की व्यवस्था की जाएगी, ताकि बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं बाधित न हों. बता दें कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में मछली पालन करने वाले किसानों को भारी नुकसान हुआ है, क्योंकि उनके तालाबों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है, जिससे मछलियां तालाब से निकलकर बाढ़ के पानी में चली गई हैं. ऐसे किसानों को बीमा के तहत और राज्य सरकार के तहत राहत दिलाने की प्रक्रिया की जा रही है.
35 हजार हेक्टेयर में फसलों को नुकसान, सर्वे रिपोर्ट मांगी गई
किसानों और पशुपालकों को भी नुकसान होने की बात कही जा रही है. 35 हजार हेक्टेयर से ज्याद खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूब गई हैं. इससे इन फसलों के पूरी तरह बर्बाद होने का खतरा मंडरा रहा है. कृषि मंत्री विजय सिन्हा ने फसल नुकसान आकलन के निर्देश देते हुए किसानों को राहत राशि देने का भरोसा दिया है. केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में केंद्र सरकार बिहार के साथ है और प्रभावित लोगों की सहायता के लिए हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि राहत एवं क्षति का आकलन कर राज्य सरकार केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजेगी. इसके आधार पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी.