LPG महंगा तो अपनाएं बायोगैस, सरकार दे रही है भारी सब्सिडी… जानें कैसे करें आवेदन
अमित बदलानी, मैनेजिंग डायरेक्टर (Go Green Mechanisms Pvt. Ltd.) किसान इंडिया को बताते हैं कि हाल के वैश्विक हालात से यह साफ हो गया है कि अगर उद्योग ज्यादा बाहर से आने वाले ईंधन पर निर्भर रहेंगे, तो उन्हें परेशानी हो सकती है. भारत के पास एक अच्छा मौका है कि वह अपने ही देश में मिलने वाले बायोमास ईंधन, जैसे ब्रिकेट्स और पेलेट्स, का ज्यादा इस्तेमाल करे.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान-इजरायल जैसे हालात के कारण दुनियाभर में ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है. इसका असर भारत में भी देखने को मिल रहा है, जहां LPG सिलेंडर की कीमतें और सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ रही है. ऐसे समय में सरकार और विशेषज्ञ लगातार ऐसे विकल्पों पर जोर दे रहे हैं, जो सस्ते, सुरक्षित और लंबे समय तक चलने वाले हों.
इन्हीं विकल्पों में से एक है बायोगैस प्लांट, जो न सिर्फ रसोई गैस की जरूरत पूरी करता है बल्कि खेती के लिए जैविक खाद भी देता है. खास बात यह है कि भारत सरकार इस पर अच्छी-खासी सब्सिडी भी दे रही है, जिससे आम लोगों के लिए इसे लगवाना आसान हो गया है.
अमित बदलानी, मैनेजिंग डायरेक्टर (Go Green Mechanisms Pvt. Ltd.) किसान इंडिया को बताते हैं कि हाल के वैश्विक हालात से यह साफ हो गया है कि अगर उद्योग ज्यादा बाहर से आने वाले ईंधन पर निर्भर रहेंगे, तो उन्हें परेशानी हो सकती है.
भारत के पास एक अच्छा मौका है कि वह अपने ही देश में मिलने वाले बायोमास ईंधन, जैसे ब्रिकेट्स और पेलेट्स, का ज्यादा इस्तेमाल करे. इससे खेतों में बचा हुआ कचरा काम में आ सकता है और उससे ऊर्जा बनाई जा सकती है. इससे एक और फायदा यह होगा कि बाहर से ईंधन मंगाने की जरूरत कम होगी और गांवों की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी. साथ ही, इससे प्रदूषण भी कम होगा और उद्योग पर्यावरण के लिए बेहतर तरीके से काम कर पाएंगे.
आने वाले समय में ऐसे बॉयलर सिस्टम जरूरी होंगे, जो अलग-अलग तरह के ईंधन पर चल सकें. इससे उद्योग बदलते हालात में भी आसानी से काम करते रहेंगे और मजबूत बने रहेंगे.
क्या है बायोगैस प्लांट और कैसे काम करता है?
बायोगैस प्लांट एक ऐसी तकनीक है जिसमें गोबर, किचन वेस्ट और अन्य जैविक कचरे से गैस तैयार की जाती है. इस गैस का इस्तेमाल खाना बनाने, पानी गर्म करने और छोटे-मोटे कामों के लिए किया जा सकता है. इस प्रक्रिया में गोबर और पानी को एक टैंक में डाला जाता है, जहां बिना ऑक्सीजन के सड़ने की प्रक्रिया होती है. इससे मीथेन गैस बनती है, जिसे पाइप के जरिए सीधे रसोई तक पहुंचाया जाता है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पूरी तरह प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल है.
बायोगैस प्लांट लगाने के लिए क्या जरूरी है?
अगर आप अपने घर या खेत पर बायोगैस प्लांट लगवाना चाहते हैं, तो कुछ बुनियादी चीजों का होना जरूरी है. सबसे पहले आपके पास पर्याप्त जगह होनी चाहिए, आमतौर पर 535 से 645 वर्ग फीट जमीन पर्याप्त मानी जाती है. इसके अलावा गोबर या जैविक कचरे की नियमित उपलब्धता जरूरी है, क्योंकि यही इस प्लांट का मुख्य ईंधन होता है.
पानी की सुविधा भी जरूरी होती है, क्योंकि गोबर के साथ पानी मिलाकर ही गैस तैयार की जाती है. ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां पशुधन अधिक होता है, वहां यह सिस्टम ज्यादा सफल साबित होता है.
न धुआँ, न महंगे ईंधन का भार,
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कितना आता है खर्च?
बायोगैस प्लांट की लागत उसके आकार और स्थान के हिसाब से तय होती है. एक सामान्य 2 क्यूबिक मीटर क्षमता वाला प्लांट लगाने में करीब 17,000 रुपये का खर्च आता है. हालांकि, अगर यह प्लांट पहाड़ी इलाकों में लगाया जाए तो लागत लगभग 30 प्रतिशत तक बढ़ सकती है, जबकि उत्तर-पूर्वी राज्यों में यह खर्च 50 प्रतिशत तक अधिक हो सकता है. अगर परिवार बड़ा है, तो 2 से 4 क्यूबिक मीटर का प्लांट लगाया जाता है, जिसकी कुल लागत करीब 30 से 40 हजार रुपये तक हो सकती है.
सरकार देती है कितनी सब्सिडी?
भारत सरकार बायोगैस प्लांट को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग कैटेगरी के तहत सब्सिडी देती है. छोटे यानी 1 क्यूबिक मीटर के प्लांट पर पहाड़ी, उत्तर-पूर्वी राज्यों और एससी/एसटी वर्ग के लोगों को करीब 17,000 रुपये तक की सब्सिडी मिलती है. वहीं अन्य क्षेत्रों में यह करीब 9,800 रुपये होती है.
इसी तरह 2 से 4 क्यूबिक मीटर के प्लांट पर लगभग 14,000 रुपये से लेकर 22,000 रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है. इससे प्लांट लगाने का असली खर्च काफी कम हो जाता है और आम लोगों के लिए यह किफायती बन जाता है.
कैसे करें आवेदन?
बायोगैस प्लांट लगवाने के लिए आप सरकार के पोर्टल biogas.mnre.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी (MNRE) के बायोगैस पोर्टल या मोबाइल ऐप के जरिए रजिस्ट्रेशन करना होता है. आवेदन के बाद संबंधित एजेंसी आपकी साइट का निरीक्षण करती है और सभी शर्तें पूरी होने पर प्लांट लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है.
कितने समय में निकल आता है खर्च?
अमित बदलानी के अनुसार, अगर एक परिवार हर महीने एक LPG सिलेंडर इस्तेमाल करता है, तो मौजूदा कीमत के हिसाब से सालभर में करीब 10-11 हजार रुपये खर्च होते हैं.
ऐसे में बायोगैस प्लांट लगाने के बाद यह खर्च लगभग खत्म हो जाता है. सब्सिडी के बाद अगर आपका खर्च 25-30 हजार रुपये आता है, तो करीब 2 साल में ही यह लागत पूरी तरह निकल जाती है.
इसके बाद आपको लगभग मुफ्त में गैस मिलती रहती है. साथ ही, प्लांट से निकलने वाले वेस्ट से बनी जैविक खाद का इस्तेमाल या बिक्री करके अतिरिक्त फायदा भी लिया जा सकता है.
क्यों है यह भविष्य का समाधान?
आज के समय में जब LPG महंगी हो रही है और सप्लाई पर भी अनिश्चितता बनी रहती है, ऐसे में बायोगैस एक मजबूत विकल्प बनकर उभर रहा है. यह न केवल सस्ता है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित है. इससे प्रदूषण कम होता है और जैविक खेती को बढ़ावा मिलता है.