Farming Tips: समय रहते पहचानें ये लक्षण, वरना बैंगन की पूरी फसल हो सकती है खराब

बैंगन की खेती में सबसे खतरनाक कीट फल और तना छेदक माना जाता है. यह कीट पौधे के तने और फलों में छेद कर अंदर घुस जाता है. तनों में छोटे-छोटे छेद दिखाई देना, टहनियों का मुरझाना और फलों में सड़न इसके मुख्य लक्षण हैं. प्रभावित फल बाजार में बिकने लायक नहीं रहते और किसान को सीधा आर्थिक नुकसान होता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 17 Feb, 2026 | 01:10 PM

Brinjal farming: बैंगन की खेती देशभर में बड़े पैमाने पर की जाती है और यह किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण नकदी फसल मानी जाती है. गांव से लेकर शहर तक इसकी मांग सालभर बनी रहती है. कम समय में तैयार होने वाली यह फसल अच्छी आमदनी दे सकती है, लेकिन यदि रोग और कीटों पर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है. समय पर पहचान और सही प्रबंधन से ही फसल को बचाया जा सकता है.

बैंगन में गलन रोग: नर्सरी से ही खतरा

गलन रोग, जिसे डैम्पिंग ऑफ भी कहा जाता है, बैंगन की फसल में शुरुआती अवस्था में सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है. यह रोग खासकर नर्सरी में तेजी से फैलता है. जब पौधे का तना जमीन के पास से काला या भूरा पड़ने लगे और पौधा अचानक गिर जाए, तो समझना चाहिए कि गलन रोग का हमला हो चुका है. जड़ें सड़ने लगती हैं और पौधे की बढ़वार रुक जाती है.

यह रोग मिट्टी में मौजूद फफूंद जैसे पाइथियम, राइजोक्टोनिया और फ्यूजेरियम के कारण फैलता है. अधिक नमी और जलभराव इसकी मुख्य वजह होती है. इससे बचाव के लिए जरूरी है कि किसान प्रमाणित और रोगमुक्त बीज का ही उपयोग करें. बुवाई से पहले बीज उपचार अवश्य करें. खेत में पानी का ठहराव न होने दें और संक्रमित पौधों को तुरंत हटाकर नष्ट कर दें.

छोटी पत्ती रोग: पौधा बन जाता है झाड़ी जैसा

छोटी पत्ती रोग बैंगन की उपज को गंभीर रूप से प्रभावित करता है. इस रोग में पत्तियां सामान्य आकार से काफी छोटी रह जाती हैं और पौधा झाड़ी जैसा दिखाई देने लगता है. फल और फूल लगना कम हो जाता है, जिससे उत्पादन घटता है. यह रोग अक्सर सफेद मक्खी जैसे कीटों के माध्यम से फैलता है.

यदि खेत में इस तरह के लक्षण दिखाई दें तो संक्रमित पौधों को तुरंत उखाड़कर खेत से बाहर कर दें. कीट नियंत्रण पर विशेष ध्यान दें. नीम तेल का छिड़काव नियमित रूप से करें और आवश्यकता पड़ने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह से दवा का उपयोग करें.

फल और तना छेदक कीट: सीधे उत्पादन पर हमला

बैंगन की खेती में सबसे खतरनाक कीट फल और तना छेदक माना जाता है. यह कीट पौधे के तने और फलों में छेद कर अंदर घुस जाता है. तनों में छोटे-छोटे छेद दिखाई देना, टहनियों का मुरझाना और फलों में सड़न इसके मुख्य लक्षण हैं. प्रभावित फल बाजार में बिकने लायक नहीं रहते और किसान को सीधा आर्थिक नुकसान होता है.

इसकी रोकथाम के लिए जरूरी है कि कीटग्रस्त फलों को तुरंत तोड़कर नष्ट किया जाए. फेरोमोन ट्रैप का उपयोग कर कीटों की संख्या पर नजर रखें. जैविक उपाय जैसे नीम आधारित उत्पादों का प्रयोग करें. यदि प्रकोप ज्यादा हो तो उचित मात्रा में अनुशंसित कीटनाशक का छिड़काव करें.

अच्छी पैदावार के लिए क्या करें?

बैंगन की सफल खेती के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:

• दोमट और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी का चयन करें.
• खेत की तैयारी के समय सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं.
• संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश का प्रयोग करें.
• सिंचाई संतुलित रखें, न अधिक पानी दें और न ही कमी होने दें.
• नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करते रहें.

समय पर पहचान ही बचाएगी फसल

बैंगन की खेती लाभदायक जरूर है, लेकिन यह रोग और कीटों के प्रति संवेदनशील भी है. यदि किसान शुरुआती लक्षणों को पहचानकर तुरंत कदम उठाते हैं तो भारी नुकसान से बच सकते हैं और अच्छी पैदावार हासिल कर सकते हैं.

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