Chaitra Navratri: महासप्तमी पर इस तरह करें मां कालरात्रि की पूजा, हर डर होगा खत्म! जानें सही विधि

Chaitra Navratri Day 7: चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन महासप्तमी पर मां कालरात्रि की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. मां कालरात्रि देवी दुर्गा का सबसे उग्र और शक्तिशाली स्वरूप हैं, जिन्हें बुरी शक्तियों का नाश करने वाली और भय को दूर करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है. जिन लोगों को अज्ञात भय, मानसिक तनाव या नकारात्मक ऊर्जा का सामना करना पड़ रहा हो, उनके लिए इस दिन की पूजा बेहद लाभकारी मानी जाती है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 25 Mar, 2026 | 06:00 AM

Chaitra Navratri Day 7: चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन, जिसे महासप्तमी कहा जाता है, बेहद खास और शक्तिशाली माना जाता है. 25 मार्च 2026 को इस दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी, जो देवी दुर्गा का सातवां स्वरूप हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों के सभी भय, संकट और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती हैं. गाजियाबाद के ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी ने किसान इंडिया को बताया कि, जिन लोगों को अज्ञात डर, मानसिक तनाव या बाधाओं का सामना करना पड़ रहा हो, उनके लिए यह दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

मां कालरात्रि का अद्भुत स्वरूप

मां कालरात्रि का स्वरूप भले ही देखने में अत्यंत भयंकर और डरावना प्रतीत होता हो, लेकिन वे अपने भक्तों के लिए हमेशा शुभ फल देने वाली होती हैं, इसलिए उन्हें ‘शुभंकरी’ के नाम से भी जाना जाता है. उनका रंग गहरे अंधकार के समान काला होता है, जो उनके रहस्यमयी और शक्तिशाली स्वरूप को दर्शाता है. उनके बाल खुले और बिखरे रहते हैं, जो उनके उग्र रूप का प्रतीक हैं. मां कालरात्रि का वाहन गर्दभ यानी गधा है. उनके तीन नेत्र हैं, जो त्रिकालदर्शी होने का संकेत देते हैं, और चार भुजाएं हैं.

उनके हाथों में खड्ग और वज्र होते हैं, जबकि अन्य दो हाथ अभय और वर मुद्रा में होते हैं, जिससे वे अपने भक्तों को निर्भयता और आशीर्वाद प्रदान करती हैं. उनके शरीर से अग्नि की ज्वालाएं निकलती हैं, जो उनकी अपार शक्ति और दुष्टों के विनाश की क्षमता को दर्शाती हैं.

मां कालरात्रि की पूजा विधि

ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी बताते हैं कि, महासप्तमी के दिन मां कालरात्रि की पूजा विशेष रूप से रात के समय करना अधिक फलदायी माना जाता है.

  • पूजा के दौरान सरसों के तेल का दीपक जलाएं
  • देवी को लाल फूल या 108 फूलों की माला अर्पित करें
  • “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै नमः” मंत्र का जाप करें
  • लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला से मंत्र जप करना शुभ होता है
  • कपूर से आरती करें और पूरे घर में घुमाएं

मान्यता है कि इस समय देवी की शक्ति अपने चरम पर होती है और मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं. इसके साथ ही पूजा के दौरान मां कालरात्रि को गुड़ का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है. इससे घर में सुख-समृद्धि आती है और कष्ट दूर होते हैं.

मां कालरात्रि के प्रमुख मंत्र

  • बीज मंत्र: “ॐ देवी कालरात्र्यै नमः”
  • ध्यान मंत्र: “एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता.
    लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥”

इन मंत्रों के जाप से देवी की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है.

पूजा के लाभ और महत्व

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मां कालरात्रि की पूजा करने से भक्तों को अनेक लाभ प्राप्त होते हैं. उनकी उपासना से शत्रुओं और बुरी शक्तियों का नाश होता है और जीवन में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है. मां कालरात्रि की कृपा से मानसिक भय, तनाव और असुरक्षा की भावना दूर होती है, जिससे मन में शांति और स्थिरता आती है. साथ ही, उनकी आराधना करने से शनि दोष से मुक्ति पाने में भी सहायता मिलती है. इसके अलावा, भक्तों का आत्मविश्वास बढ़ता है और उनकी आध्यात्मिक शक्ति मजबूत होती है.

महासप्तमी के दिन मां कालरात्रि की पूजा जीवन के हर डर और संकट को दूर करने का एक शक्तिशाली माध्यम मानी जाती है. सच्चे मन और श्रद्धा से की गई पूजा न केवल मानसिक शांति देती है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता के रास्ते भी खोलती है.

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Published: 25 Mar, 2026 | 06:00 AM
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