बदलते मौसम ने बिगाड़ा कश्मीर का चेरी कारोबार, उत्पादन में 50 फीसदी तक गिरावट से किसान परेशान

Kashmir cherry production: कश्मीर घाटी में चेरी की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान अप्रैल और मई की शुरुआत में हुए मौसम बदलाव से हुआ. पहले सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ी और फिर लगातार रुक-रुक कर बारिश होती रही. इसका असर फूल आने और फल बनने की प्रक्रिया पर पड़ा, जिससे उत्पादन काफी कम हो गया.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 22 May, 2026 | 08:24 AM

Kashmir cherry production: कश्मीर की मशहूर चेरी इस बार मौसम की मार झेल रही है. घाटी में लगातार बदलते मौसम और अनियमित बारिश की वजह से चेरी उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है. किसानों और व्यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि इस सीजन में चेरी की पैदावार करीब 45 से 50 प्रतिशत तक कम हो गई है. हालांकि अच्छी बात यह है कि बाजार में चेरी की मांग बनी हुई है, जिससे कीमतें स्थिर हैं और किसानों को कुछ राहत मिल रही है.

गर्मी और बारिश ने फसल को पहुंचाया नुकसान

कश्मीर घाटी में चेरी की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान अप्रैल और मई की शुरुआत में हुए मौसम बदलाव से हुआ. पहले सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ी और फिर लगातार रुक-रुक कर बारिश होती रही. इसका असर फूल आने और फल बनने की प्रक्रिया पर पड़ा, जिससे उत्पादन काफी कम हो गया. फल उत्पादक संगठनों का कहना है कि कई इलाकों में आधी से ज्यादा फसल खराब हो चुकी है.

किसानों की चिंता बढ़ी

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, शोपियां के चेरी किसान रियाज अहमद का कहना है कि अभी सिर्फ शुरुआती किस्मों की चेरी की तुड़ाई हो रही है. ऊंचाई वाले इलाकों में कई किस्में अभी पकनी बाकी हैं. अगर लगातार बारिश जारी रही तो फलों की गुणवत्ता खराब हो सकती है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा. किसानों का कहना है कि चेरी बेहद नाजुक फल होती है और मौसम का थोड़ा सा बदलाव भी सीधे उत्पादन और गुणवत्ता पर असर डालता है.

बाजार में अच्छे मिल रहे दाम

उत्पादन घटने के बावजूद बाजार में चेरी की कीमतें अच्छी बनी हुई हैं. खासतौर पर इटैलियन और बुल्गारियन किस्मों की चेरी 200 से 300 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है. फल व्यापारियों का कहना है कि मांग मजबूत रहने से किसानों को बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान नहीं हुआ है. हालांकि अगर मौसम लगातार खराब रहा तो आगे हालात और मुश्किल हो सकते हैं.

भारत की चेरी राजधानी है कश्मीर

देश में कुल चेरी उत्पादन का 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा कश्मीर से आता है. घाटी में हर साल लगभग 12 हजार से 14 हजार मीट्रिक टन चेरी का उत्पादन होता है. कश्मीर अपनी पारंपरिक चेरी किस्मों जैसे मिश्री, मखमली और डबल चेरी के लिए जाना जाता है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में किसान बदलते मौसम को देखते हुए कोर्डिया, रेजिना और स्टेला जैसी विदेशी किस्मों की खेती की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं.

विदेशों तक पहुंच रही कश्मीर की चेरी

पिछले साल पहली बार कश्मीर की प्रीमियम चेरी का निर्यात सऊदी अरब और यूएई के बाजारों में किया गया था. लुलु सुपरमार्केट जैसे बड़े विदेशी स्टोर्स में कश्मीरी चेरी की अच्छी मांग देखने को मिली. इससे घाटी के किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने का नया मौका मिला है.

पार्सल ट्रेन बनेगी गेम चेंजर

चेरी की सबसे बड़ी समस्या इसकी कम शेल्फ लाइफ होती है. समय पर बाजार तक नहीं पहुंचने पर फसल खराब होने लगती है. लेकिन अब रेलवे की पार्सल ट्रेन सेवा किसानों के लिए बड़ी राहत बन सकती है.

रेलवे इस सीजन में 640 टन से ज्यादा चेरी मुंबई पहुंचाने की तैयारी कर रहा है. जम्मू डिवीजन ने चेरी ढुलाई के लिए 28 पार्सल वैन बुक की हैं. हर वैन में करीब 23 टन फल ले जाया जा सकेगा. इससे तेज और सुरक्षित परिवहन तेज और सुरक्षित परिवहन से किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और फसल खराब होने का खतरा भी कम होगा.

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