बॉर्डर इलाके के किसानों को बड़ी राहत, अब 21300 एकड़ जमीन पर आसानी से कर पाएंगे खेती.. मिली सहमति
मुख्यमंत्री ने खाद्यान्न के परिवहन और भंडारण की समस्या का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पिछले पांच महीनों में पंजाब से केवल 4-5 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 5- 6 लाख मीट्रिक टन चावल ही एफसीआई द्वारा भेजे गए. खारीफ 2025-26 सीजन के लिए लंबित 95 लाख मीट्रिक टन चावल में से केवल 20 लाख मीट्रिक टन के लिए भंडारण उपलब्ध है.
Punjab News: भारत-पाकिस्तान सीमा के पास पंजाब के किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब सुरक्षा बाड़ (फेंसिंग) लगाने पर सिद्धांत रूप में सहमति दे दी है. इससे हजारों एकड़ कृषि भूमि, जो अब तक बाड़ के बाहर फंसी हुई थी, खुले रूप से खेती के लिए उपलब्ध हो जाएगी. पाकिस्तान सीमा पर 1988-1991 में हथियार तस्करी रोकने के लिए बाड़ लगाई गई थी और 1993 तक फ्लडलाइटिंग का काम पूरा किया गया था. इस कारण 21,300 एकड़ कृषि भूमि पर किसानों की पहुंच सीमित हो गई थी.
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय तक किसानों को अपनी जमीन तक पहुंचने के लिए पहचान पत्र के साथ बीएसएफ की देखरेख में बाड़ पार करनी पड़ती थी, जिससे 532-किमी लंबी पंजाब सीमा पर रोजाना कठिनाइयां और असुरक्षा बनी रहती थी. मान ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार बाड़ को जीरो लाइन से 150 मीटर आगे लगाना चाहिए, लेकिन पंजाब के कई हिस्सों में यह सीमा 2- 3 किलोमीटर अंदर है.
भारतीय जमीन बाड़ के इस तरफ आ जाएगी
अगर बाड़ को अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब ले जाया गया, तो बड़ी मात्रा में भारतीय जमीन बाड़ के इस तरफ आ जाएगी, जिससे किसान बिना डर और रोजमर्रा की पाबंदियों के खेती कर सकेंगे और राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ेगा. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात में कई अहम मुद्दे उठाए. उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने कहा कि सुरक्षा बाड़ (फेंसिंग) को अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब शिफ्ट करने पर सक्रिय विचार चल रहा है.
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परीक्षण की अनुमति देने को भी गंभीर खतरा बताया
मान ने केंद्र द्वारा प्रस्तावित नए बीज अधिनियम (Seed Act) पर भी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य है और देश के बड़े अनाज उत्पादक राज्यों में शामिल है, लेकिन नए ड्राफ्ट बिल में राज्य का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित नहीं है. बिल में जोन आधारित सिस्टम लागू किया गया है, जिससे पंजाब के केंद्रीय बीज समिति में आवाज सीमित होगी. इसके अलावा, राज्य स्तर की बीज समिति के अधिकार भी कम किए जा रहे हैं और किसानों के नुकसान पर मुआवजे का स्पष्ट ढांचा नहीं है. उन्होंने विदेशों में टेस्ट किए बीजों के बिना राज्य के कृषि जलवायु अनुसार परीक्षण की अनुमति देने को भी गंभीर खतरा बताया.
भंडारण की समस्या का भी जिक्र किया
मुख्यमंत्री ने खाद्यान्न के परिवहन और भंडारण की समस्या का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पिछले पांच महीनों में पंजाब से केवल 4-5 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 5- 6 लाख मीट्रिक टन चावल ही एफसीआई द्वारा भेजे गए. खारीफ 2025-26 सीजन के लिए लंबित 95 लाख मीट्रिक टन चावल में से केवल 20 लाख मीट्रिक टन के लिए भंडारण उपलब्ध है.