यूरोपीय संघ के साथ शून्य ड्यूटी नीति लागू करने की उठी मांग, टेक्सटाइल उद्योग को होगा सीधा फायदा
कॉटन टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ने भारत-EU व्यापार समझौते में बेहतर सौदे की जरूरत पर जोर दिया. शून्य-शुल्क नीति से भारत की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, एमएसएमई निर्यातक मजबूत होंगे और EU में भारतीय कपास वस्त्रों की पैठ बढ़ेगी.. उद्योग और सरकार मिलकर 2030 तक 40 अरब डॉलर निर्यात लक्ष्य हासिल करने की तैयारी में हैं.
Cotton Export: कॉटन टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (Cotton Textiles Export Promotion Council) ने यूरोपीय संघ (EU) के बाजारों में भारतीय कपास वस्त्रों के लिए बेहतर सौदे की आवश्यकता पर जोर दिया है. काउंसिल के अध्यक्ष विजय अग्रवाल ने कहा कि मौजूदा टैरिफ बाधाओं के कारण भारतीय निर्यातक उन देशों के मुकाबले प्रतिस्पर्धा में पीछे हैं जिन्हें विशेष लाभ प्राप्त हैं. वर्तमान में भारत हर साल EU को 1.3 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के कपास-आधारित वस्त्र निर्यात करता है. यदि शून्य-शुल्क (zero-duty) नीति लागू हो जाए, तो इससे भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी, एमएसएमई निर्यातकों को मजबूती मिलेगी, सतत और मूल्य-वर्धित निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और EU में भारत की पैठ काफी बढ़ जाएगी.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, उद्योग की यह मांग ऐसे समय में सामने आई है जब EU के साथ बातचीत अपने अंतिम चरण में हैं. टेक्सटाइल उद्योग और ट्रेड सेक्टर मिलकर यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि भारतीय कपास वस्त्रों के लिए यूरोपीय बाजार में बराबरी का मैदान बना रहे. हाल ही में फ्रैंकफर्ट, जर्मनी में आयोजित हुए हीमटेक्सटाइल शो में, जो घरेलू टेक्सटाइल्स का सबसे बड़ा वैश्विक मंच है, भारतीय निर्यातकों ने भारत–EU व्यापार समझौते को लेकर उत्साह और आशावाद दिखाया. काउंसिल के अध्यक्ष विजय अग्रवाल के अनुसार यह समझौता भारतीय कपास वस्त्रों के लिए नए विकास अवसर खोल सकता है.
भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट जल्द ही अंतिम रूप ले सकता है
एप्पेरेल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के अध्यक्ष ए साक्थिवेल ने कहा कि भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट जल्द ही अंतिम रूप ले सकता है और जैसे-जैसे अन्य देशों को GSP जैसी विशेष बाजार सुविधाएं खोती हैं, स्थिति भारत के पक्ष में मजबूत होगी. उन्होंने आगे कहा कि उद्योग और सरकार के सामूहिक प्रयासों से भारत 2030 तक 40 अरब डॉलर के परिधान निर्यात का महत्वाकांक्षी लक्ष्य हासिल करने में सक्षम होगा.
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कपास की कीमतों में उछाल
बता दें कि अभी मंडी में कपास अच्छा कारोबार कर रहा है. कुछ दिन पहले ही महाराष्ट्र की अकोला मंडी में कपास का भाव 8,400 से 8,500 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गया था. इसके पीछे बाजार में कम आवक, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग में बढ़ोतरी और कुछ नीतिगत कारण बताए जा रहे थे. विशेषज्ञों का कहना था कि अगर यह हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले दिनों में कपास का भाव 9,000 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच सकता है. हालांकि, कपास सीजन की शुरुआत में बाजार का माहौल ठीक नहीं था और कपास के दाम 6,500 से 7,000 रुपए प्रति क्विंटल के बीच थे. उस समय किसानों को लगता था कि इस साल ज्यादा मुनाफा नहीं होगा. लेकिन जैसे-जैसे सीजन आगे बढ़ा, मांग बढ़ने और आवक घटने से कपास के दाम तेजी से बढ़े और जल्दी ही 8,500 रुपए के करीब पहुंच गए.